स्वतंत्रता दिवस: भारत की युवा शक्ति किसी बाहरी सोच या मॉडल की मोहताज नहीं, राज्यपाल गुरमीत सिंह ने बताया विजन
उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने कहा कि 21वीं सदी में भारत की वास्तविक शक्ति उसकी ज्ञान-संपन्न युवा ऊर्जा में है। युवाओं को जॉब सीकर तक सीमित रखने के बजाय उन्हें जॉब क्रिएटर, शोधकर्ता और राष्ट्र-निर्माता बनने का अवसर देना होगा। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक और भारतीय मूल्यों का संगम विकसित भारत की मजबूत आधारशिला बनेगा।
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15 अगस्त प्रत्येक भारतीय के लिए वह पावन अवसर है, जब हम मां भारती को नमन करते हुए देश की आजादी के लिए सर्वस्व न्योछावर करने वाले अमर बलिदानियों का श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हैं। लेकिन यह दिवस केवल अतीत के गौरव-स्मरण का दिन नहीं है, यह वर्तमान के सामर्थ्य और ‘विकसित भारत @2047’ के महासंकल्प की दिशा में हुई प्रगति के मूल्यांकन का अवसर भी है।
आज जब पूरा विश्व आर्थिक अनिश्चितताओं, जलवायु परिवर्तन और भू-राजनीतिक चुनौतियों से गुजर रहा है, तब भारत अपनी युवा शक्ति के सामर्थ्य के बल पर नए सपनों और नए लक्ष्यों की ओर निरंतर आगे बढ़ रहा है। भारत की युवा शक्ति किसी बाहरी सोच या मॉडल की मोहताज नहीं है, वह हमारी 5000 वर्ष पुरानी समृद्ध और जीवंत सभ्यता की आधुनिक पहचान है। इनके हाथों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम कम्प्यूटिंग और डेटा साइंस जैसी आधुनिक तकनीकों की शक्ति है, तो हृदय में ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की संवेदना और मातृभूमि की सेवा का संकल्प भी है।
जॉब सीकर नहीं जॉब क्रिएटर बने युवा
21वीं सदी में भारत की वास्तविक शक्ति केवल हमारी जनसंख्या नहीं, हमारी ज्ञान-संपन्न युवा ऊर्जा भी है। आज आवश्यकता इस बात की है कि हम युवाओं को केवल ‘जॉब सीकर’ के रूप में न देखें, बल्कि उन्हें ‘जॉब क्रिएटर’, शोधकर्ता और राष्ट्र-निर्माता बनने का अवसर दें। भारत सरकार ने केंद्रीय बजट 2024-25 में रोजगार, कौशल विकास और अन्य अवसरों के लिए 2 लाख करोड़ के पैकेज का प्रावधान किया है जिससे करोड़ों युवाओं के लिए रोजगार और कौशल विकास के अवसर सृजित हो रहे हैं।
तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में ऐतिहासिक कदम बढ़ाते हुए भारत सरकार ‘इंडिया एआई मिशन’ के तहत देश में व्यापक एआई कंप्यूटिंग क्षमता विकसित कर रही है। 45,000 से अधिक GPUs की उपलब्धता ने भारत के स्टार्टअप्स, शोधकर्ताओं और नवाचारकर्ताओं के लिए उच्च क्षमता वाली कंप्यूटिंग सुविधाओं को अधिक सुलभ बनाया है। साथ ही, इस क्षमता का निरंतर विस्तार किया जा रहा है।
एआई तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही
यह इंफ्रास्ट्रक्चर देश के लिए एक ‘डिजिटल सुपर-इंजन’ की तरह काम करेगा। अब हमारे युवा, शोधकर्ता और स्टार्टअप्स विदेशी सर्वरों पर निर्भर रहने के बजाय देश में उपलब्ध कंप्यूटिंग संसाधनों का उपयोग कर सकेंगे। इससे वे भारतीय भाषाओं, कृषि, स्वास्थ्य और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप स्वदेशी एआई समाधान विकसित करने में और अधिक सक्षम होंगे।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की वास्तविक सार्थकता केवल संवाद या सूचना के आदान-प्रदान तक सीमित रहने में नहीं, बल्कि जन-सामान्य के जीवन को सुगम बनाने में है। एआई का उपयोग प्रशासनिक प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और दक्षता बढ़ाने का महत्वपूर्ण आधार बन रहा है। मौसम के सटीक पूर्वानुमान से किसानों की मदद करने, सरकारी योजनाओं की पारदर्शी निगरानी करने, संसाधनों के न्यायसंगत वितरण तथा अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक त्वरित नागरिक सेवाएं पहुंचाने में एआई तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। जब तकनीक और मानवीय संवेदना का यह संगम धरातल पर उतरता है, तभी ‘सुशासन’ का वास्तविक लक्ष्य सिद्ध होता है।
देश के विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों और अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशालाओं में अनुसंधान, नवाचार और तकनीकी भविष्य को नई दिशा देने के लिए ‘अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन’ (ANRF) की स्थापना की है। इससे देश में अनुसंधान एवं नवाचार के लिए सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बीच सहयोग को बढ़ावा मिलेगा। हमारे विश्वविद्यालयों और संस्थानों में होने वाला शोध केवल प्रयोगशालाओं या शोध-पत्रों तक सीमित न रहकर पेटेंट, नई दवाइयों, आधुनिक कृषि तकनीकों और स्वदेशी उत्पादों के रूप में आम जनजीवन में बदलाव लाए, यही इस प्रयास की सबसे बड़ी उपलब्धि होगी। ANRF भारतीय युवाओं के विचारों को वास्तविक उत्पादों और सफल स्टार्टअप्स में बदलने का सशक्त माध्यम सिद्ध हो सकता है।
ग्रीन एनर्जी और बायोटेक जैसे क्षेत्रों में नई संभावनाओं को आकार
भारत की विकास यात्रा महिलाओं की समान और प्रभावी भागीदारी के बिना पूरी नहीं हो सकती। हमारी बेटियां शिक्षा, विज्ञान, खेल, प्रशासन, न्यायपालिका, उद्यमिता और सशस्त्र बलों सहित प्रत्येक क्षेत्र में नई सीमाएं स्थापित कर रही हैं। स्वयं सहायता समूहों और ‘लखपति दीदी’ जैसे प्रयासों ने सिद्ध किया है कि प्रशिक्षण, वित्त, तकनीक और बाजार की उपलब्धता महिलाओं को केवल परिवार की आय बढ़ाने तक सीमित नहीं रखती, बल्कि वे पूरे गांव और समाज की अर्थव्यवस्था को गति दे सकती हैं। ‘विकसित भारत @2047’ के राष्ट्रीय महासंकल्प को सिद्धि तक पहुंचाने में उत्तराखण्ड एक प्रमुख विकास इंजन के रूप में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। नीति आयोग द्वारा जारी SDG India Index (2023-24) में उत्तराखण्ड का पूरे देश में प्रथम स्थान हासिल करना यह सिद्ध करता है कि राज्य ने सतत विकास और सुशासन के क्षेत्र में उल्लेखनीय मानदंड स्थापित किए हैं। हमारी वास्तविक शक्ति यहां की अपार युवा ऊर्जा और कर्मठ मातृशक्ति है। राष्ट्रीय स्तर पर ‘स्टार्टअप इंडिया’ के अंतर्गत उत्तराखंड का स्टार्टअप इकोसिस्टम आज एआई, एग्रोटेक, ग्रीन एनर्जी और बायोटेक जैसे क्षेत्रों में नई संभावनाओं को आकार दे रहा है। सुगम उद्योग नीतियों, बेहतर सिंगल-विंडो सिस्टम और ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट जैसे प्रयासों के बल पर राज्य देश-विदेश के निवेशकों के लिए एक आकर्षक निवेश गंतव्य के रूप में उभर रहा है।
आजीविका के नए अवसर बन रहे
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा 21वीं सदी के तीसरे दशक को ‘उत्तराखण्ड का दशक’ बताए जाने का संकल्प आज धरातल पर साकार हो रहा है। चारधाम ऑल-वेदर रोड, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना तथा हवाई और डिजिटल कनेक्टिविटी के विस्तार ने उत्तराखण्ड की विकास यात्रा को नई गति और नई दिशा दी है। आज हमारा पर्यटन केवल धार्मिक आस्था तक सीमित न रहकर शीतकालीन पर्यटन, साहसिक पर्यटन और ‘Wed in Uttarakhand’ जैसी नई अवधारणाओं के साथ आगे बढ़ रहा है। ‘ग्राम्या’ और ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ जैसे अभियानों के जरिए हमारे होमस्टे, ऑर्गेनिक खेती, सुगंधित पौधे, स्थानीय उत्पाद और बागवानी उपज व्यापक बाजारों तक पहुंच रहे हैं।
इस स्वतंत्रता दिवस पर हमें गर्व है कि उत्तराखण्ड अपनी समृद्ध जैव विविधता, सांस्कृतिक मूल्यों और आधुनिक नवाचारों के बल पर भारत की आर्थिक एवं तकनीकी प्रगति में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। सीमांत क्षेत्रों की यात्राओं में मैंने वहां आशा और आत्मविश्वास का नया वातावरण देखा है। ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ ने सीमांत गांवों को देश के अंतिम गांव के बजाय प्रथम गांव के रूप में देखने की दृष्टि दी है। सड़क, संचार और पर्यटन सुविधाओं के विस्तार तथा स्थानीय उत्पादों को बाजार से जोड़ने के कारण आजीविका के नए अवसर बन रहे हैं। सीमांत क्षेत्रों की समृद्धि विकास के साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा से भी सीधे जुड़ी है।
स्वतंत्रता तभी वास्तविक अर्थ पाती है, जब नागरिक अपने अधिकारों के साथ-साथ राष्ट्र के प्रति अपने उत्तरदायित्वों को भी समझें। 21वीं सदी का भारत आर्थिक शक्ति बनने के साथ ही अपनी प्राचीन ज्ञान-परंपरा, वेद, उपनिषद, संस्कृत, योग और आयुर्वेद के आधुनिक एवं वैज्ञानिक पुनरुत्थान के साथ ‘विश्व गुरु’ के रूप में स्थापित होने की दिशा में भी निरंतर अग्रसर है।
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आइए, इस स्वतंत्रता दिवस पर हम संकल्प लें कि अपने युवाओं को नवाचार, शोध, उद्यमिता और राष्ट्र-सेवा से जोड़ने में अपना योगदान देंगे। जब हमारे युवाओं के हाथों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसी आधुनिकतम तकनीक होगी और हृदय में भारतीय मूल्यों के प्रति निष्ठा, तब भारत को "विश्वगुरु" बनने से कोई रोक नहीं सकता। यही युवा शक्ति विकसित भारत की आधारशिला बनेगी और आने वाले भारत की नई पहचान गढ़ेगी।