अमर उजाला समृद्धि संवाद: विशेषज्ञ बोले- देश में सिर्फ मंदी का हौव्वा, त्योहारी सीजन में झूमेगा बाजार
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बाजार के सूरत-ए-हाल पर अमर उजाला का समृद्धि संवाद जारी है। मंगलवार को इस संवाद की दूसरी किस्त का आयोजन हुआ। रियल एस्टेट, सर्राफा, आईटी और दूसरे कई सेक्टरों के व्यापार प्रतिनिधि अमर उजाला कार्यालय में आए।
उन सब की बातचीत से मुख्य संदेश यह निकला कि भारत में मंदी नहीं है, अलबत्ता कारोबारी सुस्ती जरूर है। उन्होंने कहा कि मार्केट में नकदी का अभाव है, जिससे व्यापारियों की मुश्किलें कुछ बढ़ी हुई हैं। उधर, बैंकों से भी उम्मीद के मुताबिक सहयोग नहीं मिल पा रहा।
लेकिन, नवरात्रों और त्योहारी सीजन से मौजूद सुस्ती छंटने की पूरी उम्मीद है। कुल मिलाकर कमोबेश सबने माना कि निराश होने की जरूरत नहीं है। बाजार जल्दी ही सुधर जाएंगे, उपभोक्ता लौटेंगे और मार्केट में डिमांड बढ़ेगी। ‘मेक इन इंडिया’ और निर्यात को बढ़ावा देने के साथ ही जीएसटी की दरों में और अधिक कटौती कर देश के विकास को और अधिक गति दी जा सकती है। पेश है इस बातचीत के कुछ अंश....
ये बोले एक्सपर्ट्स
विशेषज्ञों ने अमर उजाला समृद्धि संवाद के जरिए इस बात पर जोर दिया कि ‘मेक इन इंडिया’ व निर्यात को बढ़ावा देने के साथ ही जीएसटी की दरों में और अधिक कटौती कर देश के विकास को और अधिक गति दे सकती है। विशेषज्ञों, उद्यमियों ने एक स्वर में कहा कि सुस्ती जल्द समाप्त होगी और त्यौहारी सीजन के साथ ही बाजार झूम उठेगा। संवाद में उद्यमियों, कारोबारियों, अर्थशास्त्रियों ने कुछ इस अंदाज में अपनी प्रतिक्रियाएं दी।
देश में आर्थिक मंदी कतई नही है। थोड़ी आर्थिक सुस्ती है। लेकिन इस सुस्ती को दूर करने के लिए सरकार ने तेजी से कई कदम उठाए हैं जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। सरकार की ओर से कारपोरेट टैक्स बढ़ाने से निवेशकों में थोड़ी मायूसी जरूत है। उम्मीद है कि सरकार कारपोरेट टैक्स में कमी लाएगी। सरकार को मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने के साथ ही आटो सेक्टर को जीएसटी में छूट देने की जरूरत है।
प्रो, एचसी पुरोहित, दून विवि
देश में सिर्फ मंदी का हौव्वा है। सराफा कारोबार में मंदी का कोई असर नही है। देश दुनिया में सोने के दामों में बढ़ोत्तरी होने के बावजूद सराफा कारोबार में कोई कमी नही आयी है। श्राद्ध पक्ष और मानसून की वजह से थोड़ी सुस्ती जरूत आयी, लेकिन नवरात्र से शुरू हो रहे त्यौहारी सीजन में एक बार फिर सराफा बाजार झूमेगा, इसकी पूरी उम्मीद है। आर्थिक मंदी का जो शोर मचाया जा रहा है, वह काफी हद तक राजनीति से भी प्रेरित है।
सुनील मैसोन, अध्यक्ष, सराफा मंडल देहरादून
यह कहना कि पूरे देश में आर्थिक मंदी का माहौल है किसी भी सूरत में उचित नही है। हां रीयल एस्टेट जैसे कुछ क्षेत्रों में मंदी का थोड़ा असर जरूर दिखायी दे रहा है। जो पिछलेे कई साल से जारी है। जहां तक आटो सेक्टर का सवाल है तो आटो इंडस्ट्री लगातार ग्रोथ कर रही है। हां सरकार की कुछ आर्थिक नीतियाें के चलते उद्यमियाें, कारोबारियों की दुश्वारियां थोड़ी बढ़ृी है। लेकिन वक्त आ गया है कि इन्हीं दुश्वारियों के बीच आगे बढ़ने की सोचें।
वीरेंद्र कालरा, अध्यक्ष , पीएचडी चैंबर्स आफ कामर्स
इन्होंने भी रखी अपनी राय
देश में आर्थिक मंदी नहीं, वरन नकदी की कमी है। नोटबंदी के बाद से ही नकदी का संकट बरकरार है। जिसका सीधा असर सभी क्षेत्र के कारोबार पर पड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छायी मंदी का थोड़ा बहुत असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ना लाजिमी है। लेकिन केंद्र सरकार ने आर्थिक सुधार को लेकर जो कदम उठाए ह्रैं उसकी वजह से जो थोड़ी बहुत आर्थिक दिक्कतें हैं वह भी आने वाले समय में दूर हो जाएगी।
चंद्रगुप्त विक्रम, रिटेल फर्नीचर कारोबारी
रियल एस्टेट सेक्टर पिछले कई साल से आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है। केंद्र सरकार की ओर से रेरा जैसी नीतियों को लागू करने के बाद रियल एस्टेट कारोबारियों की स्थिति और खराब हुई है। देश के तमाम सरकारी, निजी बैंक बिल्डर्स को बेहद दराें पर ऋण मुहैया करा रहे हैं। ऋण की दरों को छह फीसदी तक लाने की जरूरत है। यदि रियल एस्टेट सेक्टर को मुसीबत से उबारना है कि सरकार को रियल एस्टेट कारोबारियों के साथ बैठक कर उनकी समस्याआेें को सुनने के साथ ही उनका समाधान करना होगा।
आशीष अग्रवाल, निदेशक अग्रवाल, बिल्डर्र्स
देश के आईटी सेक्टर मेें आर्थिक मंदी जैसी कोई बात नजर नही आ रही है। सोशल मीडिया में सिर्फ आर्थिक मंदी का हौव्वा दिखाया जा रहा है। जबकि हकीकत कुछ और ही है। आईटी सेक्टर के रिटेल पार्ट में ई कामर्स को लेकर कुछ समस्याएं जरूर है लेकिन वह इतनी खराब नही है कि स्थिति नियंत्रण से बाहर हो। सरकार की ओर से कुछ कदम उठाकर इसे दुरुस्त किया जा सकता है।
अनुज संगल, निदेशक , सिटी हार्डवेयर पल्स
केंद्र सरकार ने नोटबंदी को लेकर जो कदम उठाए , उसका असर अब बाजार पर दिखायी देने लगा है। नोटबंदी की वजह से बाजार में नकदी की कमी है। जिससे रिटेल समेत कई सेक्टर प्रभावित हैं। अमेरिका - चीन के बीच जारी व्यापार युद्ध का असर भी भारत समेत पूरी दुनिया पर दिखायी दे रहा है। जहां तक आर्थिक मंदी का सवाल है तो मंदी जैसे हालात नही है। सरकार बाजार में अधिक से अधिक नकदी उतारकर स्थिति पर नियंत्रण पा सकती है। सरकार की ओर से इस दिशा में कई कदम उठाए भी गए हैं।
प्रो. हर्ष डोभाल, दून विवि
ये भी बोले...
रियल एस्टेट में जो आर्थिक मंदी दिखायी दे रही है उसके लिए काफी हद तक रियल एस्टेट कारोबारी ही जिम्मेदार हैं। तेजी से भारी मुनाफा कमाने की चाहत में देश भर में रियल एस्टेट कारोबारियों करोड़ों की संख्या में मकान बना डाले। लेकिन केंद्र सरकार की ओर से नोटबंदी लागू किए जाने के बाद कारोबारियों को करारा झटका लगा है। उम्मीद है कि आने वाले वक्त में रियल एस्टेट कारोबार इस मुसीबत से उबरेगा।
एमसी जोशी, सदस्य, उत्तराखंड रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथारिटी
आर्थिक आंकड़ों की बात करें तो देश में आर्थिक मंदी का माहौल है। लेकिन स्थिति भयावह नही है। केेंद्र व राज्य सरकारें कुछ आर्थिक नीतियां लागू कर स्थिति पर काबू पा सकती है। लेकिन इसके लिए जल्द से जल्द कदम उठाने होंगे। सरकार की ओर से कुछ कदम उठाए भी गए हैं जिसके सकारात्मक परिणाम जल्द ही सामने आएंगे।
विजय गोयल, निदेशक श्री हर्बल आयुर्वेदिक
सोने चांदी की कीमतों में उछाल के बावजूद कारोबार पर बहुत असर नही पड़ा है। लोग सोने व चांदी में निवेश को एक अच्छा विकल्प मानते हैं , इसलिए सराफा कारोबार में मंदी जैसा कुछ भी नही है। त्यौहारी सीजन शुरू होने वाला है और कारोबार में औसतन 30 फीसदी की वृद्धि तय है। मंदी को लेकर बहुत हायतौबा मचाने की जरूरत नही है। बाजार में थोड़ी सुस्ती है जिस पर काबू पाने को सरकार की ओर से कई कदम उठाए गए हैं।
विजय बग्गा, संरक्षक, सराफा मंडल
बोले कारोबारी...
रियल एस्टेट जैसे कुछ क्षेत्राें में आर्थिक मंदी की बात बेशक की जा रही हो, लेकिन आईटी सेक्टर में मंदी का कोई असर नही है। उल्टे साल दर साल कारोबार में बढ़ोत्तरी हो रही है। ई कामर्स शुरू होने के बाद कीमतों को लेकर कुछ जरूर दिक्कतें आ रही हैं। लेकिन इसे आर्थिक मंदी का असर नही कहा जा सकता है।
गुरमीत सिंह, निदेशक, आईटी जोन
आर्थिक मंदी का जो ढिढोरा पीटा जा रहा है वह सोशल मीडिया की देन है। सराफा कारोबार में आर्थिक मंदी जैसी कोई बात नही है। कारोबार पूर्व की भांति हो रहा है। हां बाजार में नकदी की कमी के चलते थोड़ी दिक्कतें है। लेकिन इसे आर्थिक मंदी नही कहा जा सकता है। सरकार बाजार में अधिक से अधिक नकदी उतारकर स्थिति पर काबू पा सकती है।
प्रीतपाल सिंह बेदी, सराफा कारोबारी
अमेरिका समेत पूरी दुनिया में जहां आर्थिक मंदी का खासा असर है। चरमरा रही अर्थव्यस्थाओं को संभालने में सरकारों के पसीने छूट रहे हैं। वहीं देश में मंदी का कोई असर नही दिखायी दे रहा है। आर्थिक मंदी की बातें की जा रही हैं। सरकार की ओर से आर्थिक सुधार को लेकर कई कदम भी उठाए गए हैं। लेकिन आर्थिक मदंी का आम आदमी पर कोई खास असर नही दिखायी दे रहा है।
नरेश बत्रा, अध्यक्ष, आईटी एसोसिएशन