अमर उजाला समृद्धि संवाद: किसी एक कारण से नहीं आई ऑटो सेक्टर में मंदी, एक्सपर्ट्स ने गिनाए कारण
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ऑटो सेक्टर में आई मंदी का कोई एक स्पष्ट कारण नहीं है। इसके बजाय कई छोटे-छोटे कारणों ने मिलकर इंडस्ट्री पर असर डाला है। अमर उजाला समृद्धि संवाद में ऑटो सेक्टर और इंडस्ट्री एसोसिएशन से जुड़े एक्सपर्ट्स ने मंदी के कई संभावित कारण गिनाए।
उन्होंने कहा कि कुछ सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं, जिससे अगले कुछ समय में ऑटो सेक्टर मंदी से उबर सकता है। आइए नजर डालते हैं एक्सपर्ट्स के अनुसार ऑटो सेक्टर की मंदी के प्रमुख कारणों पर...
ऑफर्स का इंतजार
ग्राहकों को ऑफर्स का इंतजार है। ग्राहकों को उम्मीद है कि शायद मंदी से जूझ रहे ऑटो सेक्टर में त्योहारी सीजन में अच्छे ऑफर्स आ सकते हैं। कीमतों में कमी के अलावा अन्य तरह की छूट की उम्मीद के चलते ग्राहक अभी खरीदारी से बच रहे हैं।
टेक्नोलॉजी पर नजर
एक तरफ देश के ऑटो सेक्टर में मंदी की खबर है, वहीं दूसरी तरफ कई कंपनियां ऐसी भी हैं, जिनकी गाड़ियों की अगले छह से आठ माह की बुकिंग फुल हो चुकी है। इसका मतलब है कि ग्राहक नई टेक्नोलॉजी और फीचर्स वाली गाड़ियां खरीदने में दिलचस्पी ले रहे हैं।
इलेक्ट्रिक व्हीकल
पिछले कुछ समय में केंद्र सरकार की तरफ से इलेक्ट्रिक व्हीकल को बढ़ावा देने के लिए तमाम बातें हुई हैं। लोगों को लगता है कि पेट्रोल-डीजल की तुलना में इन पर कम खर्च आएगा। गाड़ी खरीदने की योजना बना रहे कई लोग इलेक्ट्रिक व्हीकल की तरफ मुड़ गए हैं। विशेषकर गाड़ी खरीदकर सरकारी विभागों में लगाने वाले लोगों ने योजना टाल दी है। उन्हें लगता है कि कहीं अगले साल सरकारी उनकी गाड़ी को बाहर न कर दे।
बीएस-6 वाहन
केंद्र सरकार ने अप्रैल 2020 से बीएस-6 वाहन ही पंजीकृत करने का ऐलान किया है। बीएस-3 वाहन जब बंद हुए तब लोगों को गाड़ी खरीदने पर हजारों रुपये की छूट मिली थी। कई लोगों को लगता है कि बीएस-6 वाहनों के उतरते समय भी शायद ऐसा होगा और बीएस-4 वाहनों को कम कीमत पर बेचा जाएगा।
पुरानी गाड़ियों का बाजार गुलजार
विशेषज्ञों ने कहा कि नई गाड़ियों के बाजार में मंदी का असर दिख रहा है। वहीं दूसरी तरफ पुरानी गाड़ियों के बाजार में मंदी जैसा कुछ नहीं है। पुरानी गाड़ियों का बाजार पहले से कई गुना बढ़ चुका है। पुरानी गाड़ी खरीदने वालों की संख्या में कमी नहीं आई। नई गाड़ी खरीदने वाले जरूर फिलहाल बच रहे हैं।
ओला-उबर भी बड़े कारण
कुछ दिन पूर्व जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऑटो सेक्टर में मंदी के लिए ओला-उबर के बड़े इस्तेमाल को भी एक कारण बताया, तब सोशल मीडिया पर उन्हें खूब ट्रोल किया गया। लेकिन ऑटो सेक्टर के विशेषज्ञ उनकी बात से पूरी तरह सहमत हैं। विशेषज्ञों ने कहा कि जब ओला-उबर जैसी कंपनियां ग्राहकों को निजी कार जैसी सुविधाएं उपलब्ध करा रही हैं, तो फिर कार खरीदने वाले घटेंगे ही। विशेषकर महानगरों में गाड़ी खरीदने के बाद पार्किंग, ड्राइवर की व्यवस्था जैसी दिक्कतों के चलते ग्राहक किराए की गाड़ी लेना ज्यादा पसंद कर रहे हैं।
युवाओं की बदलती पसंद
आज गाड़ी खरीदने वालों में युवाओं की संख्या सबसे अधिक है। परिवार के लिए भी गाड़ी खरीदते वक्त युवाओं की राय जरूर ली जाती है। यह युवा पहले से ज्यादा स्मार्ट और टेक्नोलॉजी फ्रेंडली हैं। वह फीचर्स पर विशेष जोर देते हैं। पिछले कुछ वर्षों में गाड़ी खरीदने वाले युवाओं की पसंद में बहुत अधिक बदलाव आया है।
योजना बंद होने से झटका
केंद्र सरकार पहले अपने कर्मचारियों को वाहन खरीदने के लिए ब्याज रहित लोन देती थी। इससे सरकारी कर्मचारी बड़ी संख्या में गाड़ियां खरीदते थे। पिछले साल से सरकार ने यह योजना बंद कर दी है। इससे कई सरकारी कर्मियों ने गाड़ी खरीदने की अपनी योजना फिलहाल के लिए टाल दी है।
बैंक लोन में सख्ती से बढ़ी दिक्कत
पिछले कुछ समय में ज्यादातर बैंक लोन देने में सख्ती कर रहे हैं। अब पहले की तरह लोन नहीं बांटा जा रहा है। बैंकों की इस बेरुखी से सीधी तौर पर वाहनों की खरीद प्रभावित हुई है। निम्न मध्य और मध्य वर्ग वाहन खरीदने के लिए बैंक लोन पर निर्भर रहता है। जब लोन नहीं मिलेगा तो स्वाभाविक तौर पर वाहन नहीं खरीदा जा सकेगा।
सभी राज्यों में एक हो पंजीकरण शुल्क
उत्तराखंड इंडस्ट्रीज वेलफेयर एसोसिएशन के समन्वयक महेश शर्मा ने कहा कि देश के सभी राज्यों के लिए वाहन पंजीकरण की नीति और शुल्क एकसमान होना चाहिए। एक देश एक शुल्क की व्यवस्था लागू होनी चाहिए। इससे कई तरह की दिक्कतों का आसानी से समाधान हो सकेगा।
उत्तराखंड में ज्यादा है दरें
उत्तराखंड में वाहन पंजीकरण की दरें अन्य पड़ोसी राज्यों से अधिक है। ओबरॉय मोटर के केके नौटियाल ने बताया कि उत्तराखंड में पांच लाख से अधिक की गाड़ी पर नौ फीसदी टैक्स लगाया जा रहा है। हिमाचल प्रदेश में यह दर केवल तीन फीसदी है। चंडीगढ़ में 20 लाख से ज्यादा कीमत की गाड़ी पर 10 फीसदी टैक्स लगाया जाता है।
सरकार के टैक्स पर पड़ेगा असर
बाजार को गति देने के लिए सरकार को खुद प्रयास करने होंगे। यह नहीं भूलना चाहिए कि सरकार को भी टैक्स की जरूरत पड़ती है। जब बाजार और अर्थव्यवस्था की स्थिति बेहतर होगी तो जनता का विश्वास बना रहेगा।
कई चीजें डालती हैं बाजार पर असर
भारत पर बाजार पर कई चीजें असर डालती है। धार्मिक मान्यताएं, मौसम, खरीदारी की आदतें हमारे बाजार को प्रभावित करती हैं। उदाहरण के लिए आजकल श्राद्ध है तो नई चीजों की खरीदारी कम हुई। कुछ समय बाद त्योहार आएंगे तो सभी तरह की खरीदारी बढ़ जाएगी।
आम आदमी की गाड़ी पर 40 फीसदी टैक्स
टू व्हीलर आम आदमी की जरूरत की गाड़ी है। एक तरफ सरकार पांच लाख तक की आय वालों को आयकर में छूट देने की घोषणा करती है। दूसरी तरफ इसी वर्ग के लोग जिस गाड़ी से चलते हैं, उन पर भारी टैक्स लगाया जाता है। दोपहिया वाहनों पर भी फोर व्हीलर की तरह 28 फीसदी टैक्स लगाया गया है। इसके अलावा 12 फीसदी अन्य टैक्स हैं। उन्होंने कहा कि लाखों रुपये की कार खरीदने वालों को भी उतना ही टैक्स अदा करना पड़ रहा है, जितना कुछ हजार की बाइक खरीदने वालों को।
एमवी एक्ट पर भी चर्चा
समृद्धि संवाद में ऑटो सेक्टर विशेषज्ञों ने एमवी एक्ट के नए प्रावधानों पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने इसे आम लोगों के लिए फायदेमंद बताया। एक्सपर्ट ने कहा कि कानून मानने वालों को ड़रने की जरूरत नहीं है। सारे प्रावधान आम लोगों को सड़क पर सुरक्षा देने के लिए बनाए गए हैं। अगर जुर्माने की दर ज्यादा है तो इसीलिए कि लोग ड़रे और कानून का पालन करें। इससे दुर्घटनाएं रोकने में निश्चित तौर पर मदद मिलेगी।