पॉलिथीन के कचरे से मिलेगी आजादी: बांस बनेगा भविष्य का प्लास्टिक; मिट्टी में दबाने पर विघटित हो जाते हैं उत्पा
विशेषज्ञ मानते हैं कि बांस निर्मित फाइबर प्लास्टिक-पॉलिथीन का विकल्प बन सकती है। इसे और उपयोगी बनाने के लिए रिसर्च की आवश्यकता है।
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आज दुनिया की सबसे बड़ी चिंता प्लास्टिक और पॉलिथीन का कचरा है लेकिन बांस अब प्लास्टिक-पॉलिथीन के इस कचरे से दुनिया को आजादी दिला सकता है। बांस-स्टार्च के मिश्रण से बने ग्रेन्यूल्स से किचन के बर्तन, खिलौने, कपड़े से लेकर टाइल्स तक बनाए जा रहे हैं। बांस से बनी ये वस्तुएं प्रकृति के लिए खतरा नहीं बनतीं, बल्कि उपयोग के बाद मिट्टी में दबाने पर छह महीने में पूरी तरह विघटित हो जाती हैं।
सस्ता होने और पानी से वस्तुओं को बचाने की क्षमता के कारण पॉलिथीन पैकेजिंग उद्योग की बड़ी आवश्यकता बन चुका है, लेकिन इससे भारी मात्रा में कचरा पैदा हो रहा है, जबकि बांस-स्टार्च से पॉलिथीन के जितनी ही पतली, अधिक मजबूत और बेहतर गुणवत्ता की फिल्म तैयार की जा सकती है जो आसानी से विघटित हो सकती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि बांस निर्मित फाइबर प्लास्टिक-पॉलिथीन का विकल्प बन सकती है। इसे और उपयोगी बनाने के लिए रिसर्च की आवश्यकता है।
भारत की तकनीकी पीछे नहीं
इस समय चीन और जर्मनी बांस से बने उत्पादों और उपभोग में आगे हैं। प्रकृति संरक्षण के लिए संवेदनशील यूरोपीय समाज में भी बांस निर्मित वस्तुओं की खपत बढ़ रही है। भारत में बांस का उपयोग पारंपरिक वस्तुओं के निर्माण तक सीमित है। बांस-स्टार्च से बनी वस्तुएं धातुओं से निर्मित वस्तुओं की तुलना में महंगी और कम समय तक चलने वाली हैं, लिहाजा ये कम लोकप्रिय हो रही हैं। महंगी होने से ये प्रीमियर क्लास के ड्राइंग रूम तक सीमित हैं, जबकि इनकी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए अधिक प्रयास किए जाने की आवश्यकता है।
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10 से 50 फीसदी तक बांस
बांस-स्टार्च से बनी वस्तुओं में बांस की मात्रा आवश्यकता के अनुसार दस फीसदी से 50 फीसदी तक हो सकती है। यह वस्तु की उपयोगिता और ग्राहकों की मांग पर निर्भर करता है। बांस वस्तुओं को मजबूती प्रदान करता है, जबकि स्टार्च उसमें चिकनाहट और सफाई देने का काम करता है। बांस-स्टार्च से बने किचन के बर्तन पूरी तरह चीनी मिट्टी की गुणवत्ता के होते हैं। इन्हें देखकर यह पता लगाना मुश्किल होता है कि बर्तन चीनी मिट्टी से बना है या बांस-स्टार्च से। लेकिन उपयोग के बाद जहां चीनी मिट्टी का बर्तन हजारों साल तक विघटित नहीं होता, वहीं बांस-स्टार्च से बना बर्तन छह महीने में मिट्टी में मिल जाता है।
यहां हो रहा उत्पादन
उत्तराखंड बांस और रेशा विकास बोर्ड की सहायता से बायोक्राफ्ट इन्नोवेशन प्रा.लि. कोटद्वार में इस समय 300-350 टन क्षमता से बांस से बनी वस्तुओं का उत्पादन हो रहा है। उच्च गुणवत्ता के बांस की प्रचुर उपलब्धता को देखते हुए पूर्वोत्तर में बांस निर्मित वस्तुओं के उत्पादन का बड़ा केंद्र स्थापित किया जा रहा है।
प्लास्टिक-पॉलिथीन का विकल्प बनने की क्षमता
आईआईटी दिल्ली से पॉलीमर इंजीनियर अनुभव मित्तल ने कहा कि बांस निर्मित उत्पादों में प्लास्टिक-पॉलिथीन का विकल्प बनने की पूरी क्षमता है। इसे और लोकप्रिय बनाने के लिए इस सेक्टर में ज्यादा रिसर्च की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि तकनीकी सुधार, बड़े पैमाने पर उत्पादन और बांस निर्मित वस्तुओं के उपयोग को लेकर जागरूकता पैदा करने से इसकी खपत आम लोगों के बीच लोकप्रिय हो सकती है।