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Dehradun News: दहेज उत्पीड़न से साक्ष्य के अभाव में पति और सास-ससुर दोषमुक्त
Sun, 09 Aug 2026 12:04 AM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
Updated Sun, 09 Aug 2026 12:04 AM IST
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अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) विकासनगर अभिषेक कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने दहेज उत्पीड़न, मारपीट और धमकी के मामले में अहम फैसला सुनाया। अदालत ने अभियोजन पक्ष के आरोपों को साबित करने में विफल रहने पर कोतवाली क्षेत्र के ढकरानी निवासी पति आसिफ खान, ससुर शहजाद खान और सास परवीन को दोषमुक्त कर दिया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, पीड़िता रजुमा का निकाह 11 नवंबर 2024 को आसिफ खान के साथ हुआ था। प्राथमिकी में आरोप लगाया गया था कि शादी के बाद ससुराल पक्ष ने अतिरिक्त दहेज के रूप में पांच लाख रुपये और स्विफ्ट कार की मांग की। मांग पूरी न होने पर पीड़िता का शारीरिक व मानसिक उत्पीड़न किया गया। पांच अगस्त 2025 को मारपीट की सूचना पर पुलिस ने पीड़िता को ससुराल से मुक्त कराकर अस्पताल पहुंचाया था, जिसके बाद आरोपियों पर मुकदमा दर्ज हुआ।
सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से केवल पीड़िता की ही गवाही कराई गई। अदालत में दिए बयान में पीड़िता अपने पूर्व के आरोपों से मुकर गई। उसने कहा कि पति और ससुराल वालों ने उसके साथ कोई मारपीट, गाली-गलौज या दहेज की मांग नहीं की थी। उसने अदालत को बताया कि वर्तमान में उसका पति और सास-ससुर के साथ समझौता हो चुका है और वह इस आपराधिक मुकदमे को आगे नहीं चलाना चाहती।
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अदालत ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि अभियोजन की ओर से आरोपों की पुष्टि करने के लिए कोई अन्य गवाह या ठोस साक्ष्य पेश नहीं किया गया। पीड़िता के बयान से भी अभियोजन का कथानक साबित नहीं हुआ। ऐसे में अभियोजन आरोपों को संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह विफल रहा, जिसके चलते न्यायालय ने संदेह का लाभ देते हुए तीनों आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।
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अभियोजन पक्ष के अनुसार, पीड़िता रजुमा का निकाह 11 नवंबर 2024 को आसिफ खान के साथ हुआ था। प्राथमिकी में आरोप लगाया गया था कि शादी के बाद ससुराल पक्ष ने अतिरिक्त दहेज के रूप में पांच लाख रुपये और स्विफ्ट कार की मांग की। मांग पूरी न होने पर पीड़िता का शारीरिक व मानसिक उत्पीड़न किया गया। पांच अगस्त 2025 को मारपीट की सूचना पर पुलिस ने पीड़िता को ससुराल से मुक्त कराकर अस्पताल पहुंचाया था, जिसके बाद आरोपियों पर मुकदमा दर्ज हुआ।
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सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से केवल पीड़िता की ही गवाही कराई गई। अदालत में दिए बयान में पीड़िता अपने पूर्व के आरोपों से मुकर गई। उसने कहा कि पति और ससुराल वालों ने उसके साथ कोई मारपीट, गाली-गलौज या दहेज की मांग नहीं की थी। उसने अदालत को बताया कि वर्तमान में उसका पति और सास-ससुर के साथ समझौता हो चुका है और वह इस आपराधिक मुकदमे को आगे नहीं चलाना चाहती।
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अदालत ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि अभियोजन की ओर से आरोपों की पुष्टि करने के लिए कोई अन्य गवाह या ठोस साक्ष्य पेश नहीं किया गया। पीड़िता के बयान से भी अभियोजन का कथानक साबित नहीं हुआ। ऐसे में अभियोजन आरोपों को संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह विफल रहा, जिसके चलते न्यायालय ने संदेह का लाभ देते हुए तीनों आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।