Jollygrant: राजनीति की भेंट चढ़ा रानीपोखरी में विधि विवि, सौंग बांध प्रभावितों को भूमि आवंटन के बाद जागे लोग
रानीपोखरी में प्रस्तावित विधि विश्वविद्यालय राजनीति की भेंट चढ़ गया। सौंग बांध प्रभावितों को भूमि आवंटन होने के बाद लोग जागे। शासन द्वारा लॉ यूनिवर्सिटी से संबंधित भूमि को सौंग बांध परियोजना प्रभावितों को दे दिया गया है।
विस्तार
रानीपोखरी के लिस्ट्राबाद गांव में रेशम विभाग की करीब दस एकड़ भूमि पर प्रस्तावित विधि विश्वविद्यालय प्रदेश के बड़े नेताओं की राजनीति के बीच फंसकर फंसकर रह गया है। मार्च 2019 में डोईवाला विधायक और तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने रानीपोखरी में देश की 22वीं लॉ यूनिवर्सिटी बनाने के लिए शिलान्यास किया था, लेकिन शिलान्यास के बाद काफी समय तक यह कार्य आगे नहीं बढ़ पाया। जिसके बाद प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन हो गया।
रानीपोखरी के लोग भी शिलान्यास के बाद इंतजार में थे कि मुख्यमंत्री ने शिलान्यास किया है तो कभी न कभी लिस्ट्राबाद में विधि विवि जरूर बनेगा, लेकिन अचानक से इस जमीन को सौंग बांध परियोजना से प्रभावित परिवारों को दे दिया गया। जिसके बाद ग्रामीण और महिलाएं धरने पर बैठ गए।
इस संबंध में क्षेत्रीय विधायक बृजभूषण गैरोला ने दो बाद सदन में प्रश्न पूछे। एक बार तो संबंधित मंत्री ने विधायक को लिखित में जवाब दिया है कि रानीपोखरी में विधि विवि का प्रस्ताव खारिज नहीं हुआ है। रानीपोखरी में विधि विवि जरूर बनाया जाएगा। जबकि जवाब के बाद यह जमीन किसी और को दे दी गई।
2019 में त्रिवेंद्र सिंह रावत ने जिस पत्थर का शिलान्यास किया था वो भी अब मौके से गायब हो चुका है। स्थानीय लोग कह रहे हैं कि तत्कालीन मुख्यमंत्री के शिलान्यास को रद्द करना समझ से परे हैं। वहीं कांग्रेस इस मुद्दे पर ग्रामीणों के साथ पूरी तरह से मुखर है। प्रदेश के करीब सभी बड़े नेता आंदोलन कर रहे ग्रामीणों और महिलाओं को अपना सर्मथन दे रहे हैं।
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तीन साल से अमर उजाला में प्रकाशित हो रही हैं खबरें
करीब पिछले तीन वर्ष से अमर उजाला में विधि विवि को लेकर लगातार खबरें प्रकाशित की जा रही हैं। विधायक, सांसद और स्थानीय नेताओं तक का पक्ष कई बार खबरों में लगाया जा चुका है। लेकिन संबधित जमीन के किसी और को दिए जाने के बाद ग्रामीण अब जागे हैं। जिसके बाद करीब 38 दिनों से धरना प्रदर्शन किया जा रहा है।
विधि विवि को लेकर पुलिस-प्रशासन से भिड़े ग्रामीण और महिलाएं, कई हिरासत में लिए
शासन द्वारा रानीपोखरी में प्रस्तावित लॉ यूनिवर्सिटी से संबंधित भूमि को सौंग बांध परियोजना प्रभावितों को दे दिया गया है। रेशम विभाग की करीब 6.233 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई विभाग को हस्तांतरित कर दिया गया है। संबंधित भूमि के सीमांकन के समय लिस्ट्राबाद में पुलिस-प्रशासन और ग्रामीणों के बीच हंगामा हो गया।
भूमि सीमांकन के लिए सुबह करीब नौ बजे आसपास के थानों का भारी पुलिस बल, फायर बिग्रेड, प्रशासन और संबंधित अधिकारी मौके पर पहुंचे। काफी देर तक लोग मौके पर बैठकर धरना-प्रदर्शन और नारेबाजी करते रहे। जिसके बाद ग्रामीण, महिलाएं और कांग्रेस नेता सीमांकन कार्य बंद कराने की मांग पर पुलिस-प्रशासन से भिड़ गए। करीब आधे घंटे तक हाई वोल्टेज ड्रामा चलता रहा। जिसके बाद सीमांकन कार्य बंद करवाने की कोशिश कर रहे रानीपोखरी प्रधान सुधीर रतूड़ी, कांग्रेस जिलाध्यक्ष मोहित उनियाल, ब्लॉक प्रमुख गौरव सिंह, प्रधान संगठन अध्यक्ष अनुप चौहान आदि को पुलिस जबरन उठाकर बस में बैठाकर मौके से रायवाला की तरफ ले गई।
हंगामे के दौरान कई महिलाओं को भी महिला पुलिस कर्मियों ने जबरन हटाया। करीब डेढ़ घंटे तक लिस्ट्राबाद में पुलिस और स्थानीय लोगों के बीच हंगामा चलता रहा। सुधीर रतूड़ी का कहना था कि सौंग बांध प्रभावितों से उन्हें कोई दिक्कत नहीं है। पुलिस-प्रशासन बताए कि विधि विवि किस भूमि पर बनाया जाएगा। गौरव सिंह और मोहित उनियाल ने कहा कि लोकतंत्र में लोगों की आवाज को पुलिस से जबरन दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
क्षेत्रीय विधायक पहुंचे मौके पर
भूमि का सीमांकन किए जाने की सूचना पाकर क्षेत्रीय विधायक बृजभूषण गैरोला भी मौके पर पहुंचे। क्षेत्रीय विधायक ने प्रशासन से कहा कि इस भूमि पर लॉ यूनिवर्सिटी के लिए शिलान्यास किया गया था। ग्रामीण भी पिछले करीब 38 दिनों से इसके लिए धरना प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन एसडीएम ऋषिकेश द्वारा कहा गया कि उन्हें ऊपर से जो आदेश दिए गए हैं। वो उसी का पालन करने आए हैं। विधायक ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि लॉ यूनिवर्सिटी इसी भूमि पर बनाई जाएगी। विधायक के जाने के बाद ग्रामीण और महिलाएं पुलिस से भिड़ गए।
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लिस्ट्राबाद में रेशम विभाग के नाम दर्ज करीब 6.233 हेक्टेयर भूमि को शासनादेश के बाद सौंग बांध परियोजना प्रभावितों के लिए सिंचाई विभाग को हस्तांतरित कर दी गई है। जिलाधिकारी की ओर से गठित कमेटी ने भूमि का सीमांकन कार्य किया। यदि विधि विवि से संबंधित भूमि का कोई शासनादेश होगा तो उसका भी चिह्नीकरण किया जाएगा। - योगेश मेहरा, उपजिलाधिकारी ऋषिकेश