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Uttarakhand: अब नहीं निकल रही बत्तीसी, 60% के जबड़े का आकार घटा, जगह न मिलने से अक्ल दाढ़ निकलने में मुश्किल

Tue, 30 Jun 2026 08:05 AM IST
Renu Saklani संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून Published by: Renu Saklani Updated Tue, 30 Jun 2026 08:05 AM IST
सार

बचपन से पढ़ाया जाता रहा है कि इंसान के मुंह में 32 दांत होते हैं, लेकिन अब यह धारणा तेजी से बदल रही है। विशेषज्ञों के अनुसार बदलती जीवनशैली और जबड़े के घटते आकार के कारण बड़ी संख्या में लोगों की अक्ल दाढ़ (थर्ड मोलर) बाहर ही नहीं निकल पा रही है।

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Shrinking Jaws Are Preventing Full Set of 32 Teeth 32 Teeth Theory Changing AIIMS Rishikesh Uttarakhand news
दांत - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक

विस्तार

किताबों और चिकित्सकों की ओर से बताई जाने वाली 32 दांत की थ्योरी अब बदल गई है। समय के साथ जबड़े का आकार घटने से लोगों के सभी दांत नहीं निकल पा रहे हैं। थर्ड मोलर यानी अक्ल दाढ़ को निकलने के लिए जगह ही नहीं मिल रही है। अलग-अलग जगहों पर किए गए शोध में करीब 60 प्रतिशत लोगों में जबड़े का आकार घटा हुआ मिला है। इससे दंत वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ गई है।

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आपने बचपन में यह बात जरूर सुनी होगी कि इंसान के मुंह में 32 दांत होते हैं। समय के साथ बदली जीवन शैली ने प्राकृतिक रूप से निकलने वाले दांतों की संख्या भी घटा दी है। एम्स ऋषिकेश के वरिष्ठ दंत सर्जन डॉ. प्रेम कुमार राठौड़ बताते हैं कि दांतों की संख्या घटने और उनके आड़े-तिरछे निकलने के वैसे तो कई कारण हैं लेकिन जीवनशैली मुख्य है। अब बच्चों को शुरुआत से ही नरम खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन करवाया जाता है। इससे उनके जबड़े का विकास नहीं हो पाता।

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खून जमकर हड्डी बना देता
इसके अलावा बच्चे अक्सर बचपन में मुंह के बल गिर जाते हैं। ऐसी स्थिति में जबड़े का ग्रोथ सेंटर यानी कोंडाइल चोटिल हो जाता है। इससे जबड़े का विकास रुक जाता है। इसी स्थिति में कोंडाइल जोड़ में खून भी भर जाता है। यह खून जमकर हड्डी बना देता है। इससे जोड़ का घुमाव बंद हो जाता है और जबड़े का विकास नहीं हो पाता है। जगह कम होने की वजह से थर्ड मोलर के चार दांत अंदर ही फंस जाते हैं। इनको निकालने के लिए सर्जरी की आवश्यकता पड़ती है।

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डॉ. राठौड़ के अनुसार एम्स में हर रोज करीब 10 लोगों की थर्ड मोलर निकाली जाती है। ऐसी स्थिति में मुंह में सिर्फ 28 दांत ही बचते हैं। कुछ परिस्थितियों में यह आनुवंशिक भी हो सकता है। जनरल ऑफ नियोनेटल सर्जरी की ओर से वर्ष 2025 में महाराष्ट्र में एक शोध भी किया गया। इसमें इस बात का खुलासा हुआ कि करीब 60 प्रतिशत लोगों के जबड़े का आकार छोटा है। विशेषज्ञों के मुताबिक कमोबेश यह स्थिति हर राज्य और शहर की है।


 

जल्दी टूट जाते दूध के दांत

दून मेडिकल कॉलेज ने दंत रोग विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. योगेश्वरी कृष्णन की मानें तो दांतों के आड़े-तिरछे निकलने का मुख्य कारण अशुद्ध खाने का अधिक सेवन है। इसकी वजह से दांतों में कीड़ा लग जाता है। इसके बाद जो दूध के दांत 12-13 वर्ष की उम्र में गिरने चाहिए वह जल्द ही गिर जाते हैं। दांत गिरने के बाद आसपास के दांत खाली जगह की ओर बढ़ने लगते हैं। ऐसे में जब स्थाई दांत अपने तय समय पर बाहर निकलते हैं तो उन्हें जगह नहीं मिल पाती है। इसके बाद दांतों को जिस ओर जगह मिलती है वे निकल जाते हैं।

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इन बातों का रखें ध्यान

-बच्चों को बचपन से चबाने का अभ्यास करवाएं

-बचपन में गिरने को हल्के में न लें

-शुद्ध खाद्य पदार्थों का सेवन कराएं


 

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