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Uttarakhand: एआई की सलाह से ले रहे दवाई, आफत आई, दवाओं के रिएक्शन के बाद अस्पताल पहुंच रहे हर रोज 15 मरीज

अंकित यादव, संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Tue, 17 Feb 2026 07:49 AM IST
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सार

 एआई से सलाह लेकर लोग दवाओं का सेवन कर रहे हैं। जोकि बेहद खतरनाक है। दून अस्पताल के मेडिसिन विभाग की ओपीडी में दवाओं के रिएक्शन के हर रोज 15 मरीज पहुंच रहे हैं। घबराहट, शरीर में खुजली और चेहरे पर सूजन समेत कई लक्षण दिख रहे हैं।

Taking medication based on AI advice is dangerous Drug reactions  patients to reach Doon Hospital every day
Medicine - फोटो : Freepik.com
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विस्तार

आप भी अगर तबीयत बिगड़ने पर लक्षणों के आधार पर एआई में दवाई के लिए पूछते हैं तो सावधान हो जाइए। इससे आपकी जान के लिए जोखिम पैदा हो सकता है। दून अस्पताल के मेडिसिन विभाग की ओपीडी में गलत दवाएं लेने से रिएक्शन की चपेट में आए हर रोज करीब 15 मरीज पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों ने इसके प्रति गहरी चिंता जाहिर की है।

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विशेषज्ञों के अनुसार लोग एआई को डॉक्टर मानने लगे हैं। उन्हें स्वास्थ्य संबंधी कोई भी दिक्कत होती है तो वे फौरन अपने लक्षणों के आधार पर एआई से पूछते हैं कि क्या मैं बीमार हूं। इसके बाद एआई संभावित गंभीर से गंभीर बीमारी के बारे में बताता है। इससे मरीजों के अंदर डर भी पैदा होता है। लोग एआई की सलाह पर दवाइयां भी खा लेते हैं। जो उनके शरीर में नकारात्मक रिएक्शन के रूप में दिखाई देते हैं। ऐसे में मरीज को घबराहट, शरीर में खुजली, चेहरे पर सूजन और एलर्जी समेत कई दिक्कतें आती हैं।

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दून अस्पताल के मेडिसिन विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अरुन पांडेय के मुताबिक शरीर में दवाओं का रिएक्शन बीमारी के प्रतिकूल दवा सेवन करने पर होता है। इसका असर शरीर के कई अंगों पर भी पड़ता है। यह भी देखा गया है कि कई दवाओं की स्पेलिंग मिलती-जुलती होती है, ऐसे में कई बार एआई की ओर से बताई गईं दवाएं बीमारी से बिल्कुल अलग हो जाती हैं। इस तरह के मरीज पिछले करीब एक-डेढ़ वर्षाें में बढ़े हैं। इससे जान भी जोखिम में पड़ सकती है।

जांच रिपोर्ट का अध्ययन करने के लिए ले रहे एआई का सहारा

चिकित्सक के अनुसार लोग जांच रिपोर्ट आते ही सबसे पहले एआई से अध्ययन करवाते हैं। एआई बिना भाैतिक जांच के आंकड़ों के आधार पर संभावित सभी बीमारियों के बारे में बताता है। उसके परिणाम इसलिए भी खतरनाक साबित हो सकते हैं क्योंकि एआई न तो मरीज का बीपी-शुगर देखता है और न ही उसके अन्य पैरामीटर्स।

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ऑपरेशन से पूर्व उसकी प्रक्रिया को पहले ही समझ रहे मरीज

विशेषज्ञ बताते हैं कि कई मरीज ऑपरेशन से पहले उन्हें बताते हैं कि ऑपरेशन के दौरान यह सब प्रक्रिया की जाएगी। तो वे भी हैरान हो जाते हैं। जब मरीज से पूछते हैं तो वह बताते हैं कि एआई से पूछा था। इसकी प्रक्रिया पहले ही जानकर लोगों के मन में ऑपरेशन के लिए डर भी पैदा हो सकता है। इससे वे पूरा इलाज न करवाने का भी फैसला ले सकते हैं जो उनकी जान के लिए खतरा पैदा कर सकता है।

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