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Uttarakhand: टिहरी में 54% बुनियादी ढांचा उच्च जोखिम क्षेत्र में, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों का मानचित्र तैयार
विजेंद्र श्रीवास्तव, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
Published by: Renu Saklani
Updated Sat, 21 Mar 2026 01:46 PM IST
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सार
वाडिया संस्थान ने भूस्खलन संभावित क्षेत्रों का मानचित्र तैयार किया है। इसी के तहत वाडिया संस्थान के डॉ नवीन चंद और वैज्ञानिकों की टीम ने टिहरी जिले का अध्ययन किया है।
टिहरी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
टिहरी जिले में 54 प्रतिशत बुनियादी ढांचा उच्च जोखिम से बहुत अधिक उच्च जोखिम वाले क्षेत्र में है। वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों ने जिले में भूस्खलन के खतरे का आकलन करने के साथ ही भूस्खलन संभावित क्षेत्रों का मानचित्र तैयार किया है। इससे भविष्य में योजना बनाने और आपदा प्रबंधन के लिए सुरक्षा प्रबंध करने में मदद मिलेगी।
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प्रदेश में भूस्खलन से बचाव के उपायों के साथ ही संस्थान अध्ययन में जुटे हैं। इसी के तहत वाडिया संस्थान के डॉ नवीन चंद और वैज्ञानिकों की टीम ने टिहरी जिले का अध्ययन किया है। पिछले साल जिले में एक-दो नहीं बल्कि छोटे-बड़े 2612 भूस्खलन की घटनाएं रिपोर्ट हुई हैं।
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वैज्ञानिकों ने भूस्खलन के 15 मुख्य कारण ढाल, ऊंचाई, मानवीय गतिविधियां, भूआकृति, भू-उपयोग, नदियों और सड़क से दूरी आदि को शामिल करते हुए अध्ययन किया है। फिर इनको पांच श्रेणियों में बहुत कम, कम, मध्यम, उच्च जोखिम और बहुत उच्च जोखिम में बांटा गया।
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फिर एक माॅडल के जरिये परीक्षण किया गया। इससे पता चलता है कि जिले में 54 प्रतिशत बुनियादी ढांचा (मसलन सड़क, पुल, भवन ) के साथ ही 57 प्रतिशत आबादी उच्च जोखिम से बहुत अधिक उच्च जोखिम वाले क्षेत्र में स्थित हैं।