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Dehradun News: नई शिक्षा नीति भारतीय भाषाओं को सशक्त करने की आधारशिला
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- गुजरात साहित्य अकादमी के भारतीय भाषा संगम 2.0 में बोले पूर्व सीएम निशंक
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। गुजरात साहित्य अकादमी और शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के सहयोग से आयोजित राष्ट्रीय कार्यक्रम भारतीय भाषा संगम 2.0 में उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने नई शिक्षा नीति को भारतीय भाषाओं की सशक्त आधारशिला बताया।
विकसित भारत का सांस्कृतिक संदर्भ भारतीय भाषाओं की भूमिका विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में देशभर से 300 से अधिक भाषाविदों और शिक्षाविदों ने भाग लिया। पूर्व सीएम डॉ. निशंक ने कहा कि नई शिक्षा नीति भारतीय भाषाओं को सशक्त करने की दिशा में एक ठोस आधारशिला है। उन्होंने जोर दिया कि हिंदी सहित सभी भारतीय भाषाएं ही विकसित भारत के सपने को साकार करने की वास्तविक शक्ति बनेंगी। भारतीय भाषाएं केवल संवाद का माध्यम नहीं बल्कि देश की सांस्कृतिक आत्मा और ज्ञान परंपरा की वाहक हैं।
उन्होंने मातृभाषाओं और क्षेत्रीय भाषाओं में शिक्षा, शोध और नवाचार को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया। यह भारत को वैश्विक स्तर पर ज्ञान-समृद्ध राष्ट्र बनाने के लिए अत्यंत आवश्यक है। डॉ. निशंक के अनुसार, इससे युवाओं में आत्मगौरव और सांस्कृतिक जुड़ाव की भावना विकसित होगी। यह भावना राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इस अवसर पर गुजरात साहित्य अकादमी के अध्यक्ष डॉ. भाग्येश झा, गुजरात साहित्य अकादमी के महासचिव डॉ. जयेंद्र सिंह जादव, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय संयोजक ए विनोद, डॉ. अनिल जोशी, स्वारंगी साने और डॉ. सूर्यदेव राम मौजूद रहे।
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अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। गुजरात साहित्य अकादमी और शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के सहयोग से आयोजित राष्ट्रीय कार्यक्रम भारतीय भाषा संगम 2.0 में उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने नई शिक्षा नीति को भारतीय भाषाओं की सशक्त आधारशिला बताया।
विकसित भारत का सांस्कृतिक संदर्भ भारतीय भाषाओं की भूमिका विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में देशभर से 300 से अधिक भाषाविदों और शिक्षाविदों ने भाग लिया। पूर्व सीएम डॉ. निशंक ने कहा कि नई शिक्षा नीति भारतीय भाषाओं को सशक्त करने की दिशा में एक ठोस आधारशिला है। उन्होंने जोर दिया कि हिंदी सहित सभी भारतीय भाषाएं ही विकसित भारत के सपने को साकार करने की वास्तविक शक्ति बनेंगी। भारतीय भाषाएं केवल संवाद का माध्यम नहीं बल्कि देश की सांस्कृतिक आत्मा और ज्ञान परंपरा की वाहक हैं।
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उन्होंने मातृभाषाओं और क्षेत्रीय भाषाओं में शिक्षा, शोध और नवाचार को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया। यह भारत को वैश्विक स्तर पर ज्ञान-समृद्ध राष्ट्र बनाने के लिए अत्यंत आवश्यक है। डॉ. निशंक के अनुसार, इससे युवाओं में आत्मगौरव और सांस्कृतिक जुड़ाव की भावना विकसित होगी। यह भावना राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इस अवसर पर गुजरात साहित्य अकादमी के अध्यक्ष डॉ. भाग्येश झा, गुजरात साहित्य अकादमी के महासचिव डॉ. जयेंद्र सिंह जादव, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय संयोजक ए विनोद, डॉ. अनिल जोशी, स्वारंगी साने और डॉ. सूर्यदेव राम मौजूद रहे।
