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लिपुलेख दर्रा: भारत-चीन संबंधों को नई ऊंचाई देगा शुरू होने वाला व्यापार, सीमा के करीब बसे लोगों को होगा फायदा

अमित शर्मा , अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: Renu Saklani Updated Mon, 04 May 2026 08:38 AM IST
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सार

भारत-चीन संबंधों को लिपुलेख दर्रे से शुरू होने वाला व्यापार नई ऊंचाई देगा। सीमा के करीब बसे लोगों को इसका फायदा होगा। लिपुलेख दर्रे से दो से पांच करोड़ रुपये के बीच व्यापार होता है। 

Trade starting from Lipulekh Pass will give new heights to India-China relations Uttarakhand news
चीन और भारत - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार

पिथौरागढ़ के लिपुलेख दर्रे से इस जून में भारत-चीन के बीच व्यापार शुरू होने की उम्मीद है। सीमा के आसपास बसे उत्तराखंड और तिब्बत के स्थानीय निवासियों को अच्छा आर्थिक लाभ मिलेगा। व्यापार की शुरुआत होने के बाद दोनों देशों के बीच संबंधों को एक नई ऊर्जा मिलेगी। यही कारण है कि इस व्यापार को लेकर दोनों देश बहुत उत्साहित हैं।

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भारत-चीन के बीच लिपुलेख दर्रे से लंबे समय से व्यापार होता रहा है, लेकिन कोरोना काल और भारत-चीन के बीच तनावपूर्ण संबंधों के बीच इसे बंद कर दिया गया था। लगभग छह वर्ष बाद व्यापार एक बार फिर शुरू होने जा रहा है। रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि वर्तमान भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच भारत और चीन दोनों ही देश आपसी संबंधों को मजबूत करना चाहते हैं।

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लिपुलेख व्यापार इसमें अहम भूमिका निभा सकता है। मौद्रिक मूल्यों में यह व्यापार बहुत बड़ा नहीं है। दोनों देशों के बीच करीब दो से पांच करोड़ रुपये के बीच का ही व्यापार होता रहा है। सीमा के आसपास बसे चीन और भारत के स्थानीय निवासी इस दर्रे से आपस में व्यापार करते आए हैं, लेकिन रणनीतिक रूप से यह बहुत अहम है। पूरी क्षमता का उपयोग होने से सौ करोड़ रुपये तक व्यापार होने की संभावना है।

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सीमा के करीब बसे लोगों को लाभ

उत्तराखंड और आसपास के किसान इस दर्रे से कपड़े, तेल-घी, मसाले और अनाज जैसी वस्तुओं का निर्यात करते हैं, जबकि चीनी इलाकों, विशेषकर तिब्बत से, ऊन, कच्चा रेशम, छिर्बी और सुहागा जैसी वस्तुओं का आयात करते हैं। इस व्यापार की शुरुआत से दोनों देशों के सीमापार लोगों के बीच लेनदेन बढ़ेगी जो आपसी संबंधों को मजबूत करने का काम करेगी।

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