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Rishikesh: उज्जैनी एक्सप्रेस हादसा, ट्रेन में नहीं था लोको पायलट, शंटिंग मास्टर ने हटा दी थी चेन और गुटके

अंकित यादव, संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश Published by: Renu Saklani Updated Wed, 20 May 2026 02:58 PM IST
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सार

उज्जैनी एक्सप्रेस हादसे की शुरुआती जांच में असल कारण सामने आए हैं। ट्रेन में लोको पायलट नहीं था। मामले में लोको पायलट के बयान दर्ज कराए गए तो चौंकाने वाली बात सामने आई। 

Ujjaini Express Accident Rishikesh No Loco Pilot on Board Shunting Master Removed the Chains and Wheel Chocks
उज्जैनी एक्सप्रेस - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार

सोमवार देर रात ऋषिकेश में हुए रेल हादसे की शुरुआती जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। नाम न छापने की शर्त पर एक अधिकारी ने बताया कि घटना के समय ट्रेन में लोको पायलट नहीं था। शंटिंग मास्टर ने जीरो प्रेशर के साथ खड़ी ट्रेन से चेन और गुटके हटा दिए। यार्ड में ढलान होने से ट्रेन ने रफ्तार पकड़ ली और हादसा हो गया।



गौरतलब है कि योग नगरी ऋषिकेश रेलवे स्टेशन से थोड़ी दूरी पर स्थित खांड गांव इलाके में लक्ष्मीबाई नगर-योग नगरी ऋषिकेश एक्सप्रेस (14310) के तीन कोच और इंजन पटरी से उतर गए। ट्रेन की गति अधिक होने के कारण कोच बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए।
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चौंकाने वाली बात सामने आई
घटना के बाद रेलवे विभाग में अफरा-तफरी मच गई। दिल्ली और मुरादाबाद से बड़ी संख्या में अधिकारी घटना स्थल पर पहुंचे। जानकारी के मुताबिक हादसा तब हुआ जब ट्रेन को मेंटेनेंस के लिए यार्ड की लेन नंबर 10 में खड़ा किया गया था। इस मामले में लोको पायलट के बयान दर्ज कराए गए तो चौंकाने वाली बात सामने आई। उसने अपने बयान में बताया कि घटना के समय वह ट्रेन में नहीं था।
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यह बात सुनकर अधिकारी भी हैरान हो गए। जब उन्होंने इत्मीनान से घटना के बारे में पूछा तो लोको पायलट और वहां मौजूद अन्य कर्मचारियों ने पूरी बात बताई। बताया कि ट्रेन को वाशिंग लाइन में ले जाने के लिए खड़ा किया गया था। अगले दिन यानी मंगलवार को सुबह 6.15 बजे ट्रेन को इंदौर के लक्ष्मीबाई नगर के लिए रवाना होना था।

लोको पायलट के इंजन में सवार होने से पहले शंटिंग मास्टर ने गुटके और चेन हटा दिया। ट्रेन के कई घंटे से खड़े होने की वजह से उसमें प्रेशर शून्य हो चुका था। ऐसे में ट्रेन चल पड़ी। यार्ड में 250 मीटर की दूरी पर एक मीटर ढलान होने की वजह से ट्रेन ने रफ्तार पकड़ ली और हादसा हो गया। हालांकि अधिकारी अभी आधिकारिक रूप इसके कारण स्पष्ट नहीं कर रहे हैं।
 

इंजन चलने के बाद 15-20 मिनट में बनता है प्रेशर
अधिकारियों के मुताबिक किसी भी ट्रेन का ब्रेकिंग सिस्टम प्रेशर से चलता है। जब गुटका हटाया गया तो प्रेशर शून्य हो चुका था। ट्रेन के ब्रेक का प्रेशर चार घंटे में खत्म हो जाता है। यह ट्रेन भी कई घंटे से खड़ी थी। लोको पायलट इंजन को चालू कर दोबारा प्रेशर बना पाता इससे पहले ही चक्कों को खोल दिया गया। ब्रेक प्रेशर बनने में 15 से 20 मिनट का समय लगता है।

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हादसों के कारण का पता लगाने के लिए उच्च स्तरीय ज्वाइंट कमेटी का गठन किया गया है। इसमें अलग-अलग विभागों को शामिल किया गया है। कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद ही हादसे का कारण स्पष्ट हो पाएगा। -महेश यादव, वरिष्ठ वाणिज्य प्रबंधक, मुरादाबाद मंडल

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