Uttarakhand: अधिकारियों की नियुक्ति-ट्रांसफर का आधार निजी सूचना नहीं, आयोग ने कहा-सरकार को स्पष्ट करें स्थिति
सरकारी अधिकारियों की नियुक्ति और तबादलों से जुड़ी जानकारी को निजी सूचना बताकर छिपाया नहीं जा सकता। उत्तराखंड सूचना आयोग ने इस मुद्दे पर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए राज्य सरकार से वैधानिक स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।
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उत्तराखंड सूचना आयोग ने राज्य की प्रशासनिक मशीनरी में पारदर्शिता बढ़ाने के संदर्भ में महत्त्वपूर्ण टिप्पणी की है। आयोग ने कहा कि अधिकारियों की नियुक्ति और स्थानांतरण के पीछे लोकहित को आधार बताया जाता है। ऐसे में किसी अधिकारी की नियुक्ति या स्थानांतरण का आधार अधिकारी की निजी सूचना नहीं हो सकती और इसे साझा करने से इनकार नहीं किया जा सकता।
दरअसल, राज्य के वरिष्ठ आईएफएस अधिकारी संजीव चतुर्वेदी ने एक आरटीआई दाखिल कर लोकायुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया और कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्ति-पदमुक्ति से संबंधित सूचनाएं मांगी थीं। अधिकारी ने इसे अधिकारियों की निजी सूचना बताते हुए चतुर्वेदी को देने से इनकार कर दिया था। प्रथम विभागीय अधिकारी ने भी इससे सहमति जताई थी।
संजीव चतुर्वेदी ने उत्तराखंड सूचना आयोग में अपील दायर की थी। इस मामले की सुनवाई करते हुए सूचना आयोग ने कहा कि अधिकारियों की नियुक्ति और स्थानांतरण के समय सरकार इसे जनहित में लिया गया निर्णय बताती है, लेकिन जब यही जानकारी सूचना अधिकार के अंदर मांगी जाती है तो इसे अधिकारियों की निजी जानकारी बताई जाती है।
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आयोग ने इसे परस्पर विरोधी बताते हुए सरकार से इस विषय पर वैधानिक स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिए हैं। सूचना आयोग ने कहा कि प्रशासनिक अपारदर्शिता को छिपाने के लिए गोपनीयता को आधार नहीं बनाया जा सकता। आयोग ने 15 दिनों के अंदर मांगी गई सूचना संजीव चतुर्वेदी को उपलब्ध कराने का भी आदेश दिया है।