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बदरीनाथ मंदिर चढ़ावा हेराफेरी: सियासत हुई तेज, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के आरोपों पर हेमंत द्विवेदी का पलटवार

Wed, 15 Jul 2026 12:51 PM IST
Renu Saklani अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: Renu Saklani Updated Wed, 15 Jul 2026 12:51 PM IST
सार

बदरीनाथ मंदिर चढ़ावा हेराफेरी मामले को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के आरोपों के बाद बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने पलटवार किया है। 

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Badrinath Temple Donation Theft Case BKTC President Hemant Dwivedi Hits Back at Godiyal’s Allegations
पत्रकारवार्ता करते बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बदरीनाथ मंदिर के चढ़ावे को लेकर छिड़े विवाद में अब घमासान बढ़ गया है। कांग्रेस  प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने खुद पर लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में मंदिर निर्माण के लिए पैसा दिया गया था, न कि चढ़ावे में कोई हेराफेरी की गई। उन्होंने बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी पर सवालों का जवाब देने से बचने का आरोप भी लगाया। वहीं आज बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने पत्रकारवार्ता कर गोदियाल के आरोपों पर पलटवार किया।

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कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि आरोपों पर सार्वजनिक बहस की चुनौती देकर बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी का ना आना बताता है कि भाजपा के पास कोई जवाब नहीं है। कहा, प्रदेश की जनता का ध्यान भटकाने के लिए मेरे ऊपर आरोप लगाए जा रहे हैं। बतौर बीकेटीसी अध्यक्ष मेरे कार्यकाल में मंदिर बनाने को पैसा दिया गया है लेकिन चढ़ावा चोरी नहीं किया गया।

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बीकेटीसी अध्यक्ष द्विवेदी की बहस की चुनौती को स्वीकार करते हुए गोदियाल मंगलवार को प्रेस क्लब पहुंचे। प्रेसवार्ता में गोदियाल ने कहा, चुनौती देने वाले खुद मैदान छोड़ कर भाग गए। जो व्यक्ति सार्वजनिक रूप से बहस की चुनौती देता है और फिर निर्धारित समय पर उपस्थित नहीं होता, वह स्वयं अपनी विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगा देता है। इससे यही संदेश जाता है कि सच्चाई का सामना करने का साहस उनके पास नहीं है। उन्होंने कहा कि आरोपी कर्मचारी प्रमोद नौटियाल वर्ष 2003 में बीकेटीसी में नियुक्त हुआ था। वर्ष 2010 में भाजपा सरकार में 32 कर्मचारियों के नियमितीकरण का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था, उसमें नौटियाल का नाम भी शामिल था। वर्ष 2014 में शासन की स्वीकृति के बाद नियमितीकरण किया गया।

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मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए स्वीकृति के बाद दिया पैसा

गोदियाल ने कहा, बिनसर मंदिर व पोखरी के शिव मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए बोर्ड बैठक में स्वीकृति के लिए बाद पैसा दिया गया। नौ लाख खर्च होने के बाद वर्ष 2017 में भाजपा ने सत्ता में आने के बाद बिनसर मंदिर का निर्माण कार्य रोक दिया। एक साल बाद देवस्थानम बोर्ड की बैठक में फिर से मंदिर निर्माण की स्वीकृति दी गई। टिहरी जिले के प्रताप नगर में मंदिर समिति को दी गई, जमीन के लिए संपर्क मार्ग निर्माण के लिए पैसा दिया गया। उन्होंने सवाल किया नौ साल बाद भाजपा सरकार व बीकेटीसी ने मेरे ऊपर लगे आरोपों की जांच क्यों नहीं कराई। उन्होंने यह भी कहा, बीकेटीसी अध्यक्ष से जुड़ा कोई भी कर्मचारी दान गणना ड्यूटी में तैनात नहीं किया जा सकता है।



 

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