विश्व पर्यावरण दिवस: विकास की राह में सिमटते वन, बढ़ती जरूरतों के बीच उत्तराखंड के जंगलों पर बढ़ रहा दबाव
उत्तराखंड के जंगलों पर लगातार दबाव बढ़ रहा है। टाइगर रिजर्व को तुलनात्मक तौर पर अधिक संरक्षित माना जाता है। पर यहां पर भी दबाव बढ़ रहा है।
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विकास की राह में सिमटते वन, बढ़ती जरूरतों के बीच उत्तराखंड के जंगलों पर बढ़ रहा दबाव विकास, पर्यटन और रोजगार की बढ़ती जरूरतों के बीच उत्तराखंड के जंगलों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। हमारे जंगल चुपचाप इसकी कीमत चुका रहे हैं।
वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार राज्य गठन से लेकर वर्ष 2023-24 तक प्रदेश में 44,825 हेक्टेयर वन भूमि गैर-वानिकी कार्यों के लिए हस्तांतरित की जा चुकी है। इनमें से करीब 21,450 हेक्टेयर वन भूमि केवल देहरादून जिले में दी गई, जो दून शहर (नगर निगम क्षेत्र) के क्षेत्रफल से भी अधिक है। इसके अलावा वन भूमि हस्तांतरण के अनेक प्रस्ताव अभी लंबित हैं।
इको-टूरिज्म से रोजगार बढ़ा, जंगलों पर भी असर
राज्य में इको-टूरिज्म के विस्तार से स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिले हैं। इसके तहत कार्बेट और कालागढ़ टाइगर रिजर्व, राजाजी टाइगर रिजर्व, रामनगर, तराई पश्चिम, अल्मोड़ा, हरिद्वार, लैंसडौन, नंधौर वन्यजीव अभयारण्य और तराई पूर्वी क्षेत्र में 26 सफारी जोन विकसित किए गए हैं। रामनगर क्षेत्र में ही करीब 500 वाहनों के माध्यम से सफारी संचालित होती है।
पर्यटकों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। वित्तीय वर्ष 2022-23 में 6.58 लाख, 2023-24 में 7.17 लाख और 2024-25 में 8.08 लाख पर्यटक वन क्षेत्रों में पहुंचे। हालांकि, वन विभाग ने इको-टूरिज्म से रोजगार पर अध्ययन कराया है, लेकिन जंगलों और वन्यजीवों पर इसके प्रभाव का समग्र अध्ययन अभी नहीं हुआ है।
टाइगर रिजर्व पर भी दबाव बढ़ रहा
टाइगर रिजर्व को तुलनात्मक तौर पर अधिक संरक्षित माना जाता है। पर यहां पर भी दबाव बढ़ रहा है। राजाजी टाइगर रिजर्व जो कि देहरादून, ऋषिकेश, हरिद्वार से सटी हुई है। ऐसे में यहां भी विकास योजनाओं का दबाव है। यहां केकोर जोन में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए चौरासी कुटिया के सौंदर्याकरण की अनुमति दी गई।
नीलकंठ रोपवे बनना है, जिसके लिए भारतीय वन्यजीव संस्थान के माध्यम से अध्ययन किया जा रहा है। दो सड़क की बड़ी परियोजनाओं गंगा भोगपुर- कौड़िया से नया मोटर मार्ग प्रस्तावित किया गया। इसके अलावा ऋषिकेश बैराज से पीपलकोटी मार्ग को चौड़ा करने की योजना को लेकर भी संस्थान को अध्ययन का काम सौंपा गया था, यहां पर बड़ी संख्या में पेड़ आ रहे हैं। हरिद्वार बाईपास फेज-2 के लिए भी राजाजी टाइगर रिजर्व होकर जाने की संभावनाओं को देखा जा रहा है
देहरादून- दिल्ली एक्सप्रेस वे पर अंडरपास ने एक नई संभवानाओं के द्वार खोले हैं। इसमें वन्यजीव के मूवमेंट के दृष्टिगत योजना को तैयार किया गया। इसके निर्माण के बाद वन्यजीवों का मूवमेंट बढ़ा है। कुछ इसी तरह ऋषिकेश बाईपास को भी तैयार करने की योजना बनाई गई है। इकोलॉजी और इकोनॉमी संतुलन की बात अधिकारी कह रहे हैं।
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विकास और संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित किया जाए डॉ. उनियाल
भारतीय वन्यजीव संस्थान के पूर्व वैज्ञानिक डॉ. वीपी उनियाल बताते हैं कि आज विकास और पर्यटन के नाम पर तेजी से बढ़ रका हैं। पर्यटन स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है, पर इसका अनियंत्रित विस्तार हिमालय जैसे संवेदनशील पारिस्थितिक तंत्रों को असंतुलित कर रहा है। सबसे अधिक चिंता का विषय वन्यजीव आवासों पर बढ़ता दबाव है। पर्यटकों की भारी भीड़, वाहनों का अत्यधिक आवागमन, ध्वनि प्रदूषण से वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास प्रभावित हो रहे हैं। अनेक प्रजातियों के व्यवहार, प्रवास मार्ग, भोजन खोजने की गतिविधियों तथा प्रजनन प्रक्रियाओं में परिवर्तन देखने को मिल रहा है। आज आवश्यकता है कि विकास और संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित किया जाए।