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विश्व मोटापा दिवस: उत्तराखंड में पांच से कम आयु के बच्चों में 3.4% बढ़ा, सेहत का नया फॉर्मूला, 5-2-1-0 नियम

संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश। Published by: Renu Saklani Updated Wed, 04 Mar 2026 04:17 PM IST
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सार

उत्तराखंड में पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों में मोटापा 2.1 से बढ़कर 3.4 प्रतिशत हो गया। 5-2-1-0 नियम से बचाव मिल सकता है।

World Obesity Day New Formula for Health Obesity among children under five in Uttarakhand increased
बच्चों में मोटापे की समस्या - फोटो : istock
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विस्तार

आधुनिक युग की भागदौड़ और स्वाद के फेर में हमने अपनी सेहत को दांव पर लगा दिया है। आज मोटापा सिर्फ एक शारीरिक बदलाव नहीं, बल्कि एक अदृश्य महामारी बन चुका है जो बच्चों से लेकर बड़ों तक को अपनी गिरफ्त में ले रहा है। यह साइलेंट किलर भविष्य में मधुमेह और हृदय रोगों जैसी बड़ी चुनौतियों का द्वार खोल रहा है। लेकिन घबराएं नहीं, स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस चक्रव्यूह को तोड़ने के लिए 5-2-1-0 का एक मंत्र दिया है, जो आपकी जीवनशैली को फिर से ऊर्जावान बना सकता है।

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इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स की उत्तराखंड शाखा के सचिव व हिमालयन अस्पताल के बाल रोग विभाग में तैनात डॉ. राकेश कुमार का कहना है कि मोटापा अब केवल सौंदर्य से जुड़ा विषय नहीं, बल्कि यह एक गंभीर चिकित्सीय स्थिति है, जिस पर समय रहते नियंत्रण आवश्यक है।

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डॉ. राकेश ने कहा कि फास्ट-फूड, पैकेज्ड,अधिक शक्कर व वसा युक्त खाद्य पदार्थों का बढ़ता सेवन, शारीरिक गतिविधियों में कमी और मोबाइल-टीवी पर अधिक समय बिताना मोटापे के प्रमुख कारण हैं। पारंपरिक और पौष्टिक घर के भोजन की जगह जंक-फूड का बढ़ता चलन बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है।डॉ. राकेश ने बताया कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2019–21 के अनुसार उत्तराखंड में पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों में अधिक वजन/मोटापा 2.1 प्रतिशत से बढ़कर 3.4 प्रतिशत हो गया है। सबसे अधिक हरिद्वार जनपद में 7 प्रतिशत उच्च दरें दर्ज की गई हैं, जो चिंता का विषय है।

5-2-1-0 नियम से मिल सकता है बचाव

डॉ. राकेश कुमार ने मोटापे से बचाव के लिए 5-2-1-0 नियम अपनाने की सलाह दी।

5 - प्रतिदिन 5 या अधिक फल और सब्जियों का सेवन

2 – स्क्रीन टाइम 2 घंटे से कम

1 – रोज कम से कम एक घंटा सक्रिय खेल या व्यायाम

0 – शुगर युक्त कोल्ड ड्रिंक बिल्कुल नहीं

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अभिभावकों की भूमिका अहम

डॉ. राकेश कहते हैं कि बच्चों में स्वस्थ आदतें विकसित करने में अभिभावकों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। घर में संतुलित और पौष्टिक भोजन, नियमित दिनचर्या और आउटडोर गतिविधियों को बढ़ावा देकर मोटापे की समस्या पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है। विश्व मोटापा दिवस का उद्देश्य लोगों में जागरूकता बढ़ाना और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना है, ताकि आने वाली पीढ़ी को मोटापे और उससे जुड़ी बीमारियों से सुरक्षित रखा जा सके।

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