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Delhi NCR News: एआई से वित्त मंत्री का फर्जी वीडियो बनाकर कर रहे थे ठगी, 11 आरोपी गिरफ्तार
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- निवेश कराकर भारी मुनाफा दिलवाने का बहाना कर रहे थे ठगी
- कंबोडिया में बैठे गिरोह के लिए करते थे काम
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। कंबोडिया में बैठे साइबर जालसाजों के लिए काम कर रहे भारत में जालसाजी कर रहे थे। इन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री का एआई से एक फर्जी वीडियो बना रखा था। ये इस वीडियो के आधार पर साेशल मीडिया पर लोगों से निवेश कराकर भारी मुनाफे का लालच देकर ठगी कर रहे थे। दक्षिण-पश्चिमी जिले की साइबर थाना पुलिस ने इस गिरोह का पर्दाफाश कर 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में यह भी सामने आया कि यह गिरोह कंबोडिया में बैठे साइबर जालसाजों के लिए काम कर रहा था। दक्षिण-पश्चिमी जिला पुलिस उपायुक्त अमित गोयल ने बताया कि पुलिस गिरफ्तार आरोपियों तजिंद्र सिंह उर्फ लकी (26), आशीष सैनी (24), शिव दयाल सिंह (28), शिवा (18), गिरिराज किशोर (18), रामदेव सांगला (50), प्रवीण कुमावत उर्फ लकी (20), दीपक मेवाड़ा उर्फ देव (35), त्रिलोक चंद नायक (32), प्रतिभा उर्फ पायल (25), सतीश (34) के पास से 40 मोबाइल फोन, 92 फर्जी सिम कार्ड, 39 पासबुक/चेकबुक, 27 एटीएम कार्ड, लैपटॉप, 6 यूपीआई स्कैनर, 1 प्रिंटर और नकली दस्तावेज और अन्य डिजिटल उपकरण बरामद किए हैं। साइबर थाना पुलिस इस पूरे गिरोह के नेटवर्क को खंगालने में लगी है।
पुलिस उपायुक्त गोयल ने बताया कि एक 60 वर्षीय बुजुर्ग ने अपने साथ हुई 22.67 लाख रुपये की ठगी की शिकायत पुलिस को की थी कि उन्होंने इस वित्त मंत्री का एक वीडियो देखा था। जिस पर उन्होंने एक ऐप के जरिये निवेश करने के लिए कहा था। पीड़ित ने बताया कि उन्होंने वीडियो पर भरोसा कर लिंक के जरिए रजिस्ट्रेशन किया। इसके बाद आरोपियों ने खुद को निवेश सलाहकार बताकर संपर्क किया। उन्हें ‘मुद्रावन ऐप’ और अन्य प्लेटफॉर्म के जरिए निवेश करने के लिए कहा गया। शुरुआत में उन्हें कुछ मुनाफा दिखाया गया, लेकिन बाद में आरोपियों ने संपर्क बंद कर दिया। इस तरह पीड़ित से कुल 22.67 लाख रुपये की ठगी की गई। साइबर थाना एसएचओ इंस्पेक्टर प्रवीण कौशिक की टीम ने केस दर्ज कर जांच शुरू की।
एआई को दुरुपयोग कर बनाई वीडियाे से लोगों को झांसे में लेते थे : एसआई लव देसवाल और हवलदार सचिन की टीम ने वित्त मंत्री के वीडियो की जांच की। पता चला कि आरोपियों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से वित्त मंत्री के भाषण जैसा दिखने वाला वीडियो तैयार किया। जिसमें वह एक विशेष ऐप के जरिए लोगों ने निवेश करने के लिए कह रही है। पुलिस की जांच में सामने आया कि आरोपियों ने वीडियो फेसबुक सहित अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल किया। वीडियो में निवेश करने पर मोटा मुनाफा मिलने का दावा किया गया था, जिससे लोग आसानी से उनके जाल में फंस जाते थे।
फर्जी कॉल सेंटर में बैठकर करते थे ठगी : इंस्पेक्टर प्रवीण कौशिक की टीम ने तकनीकी जांच, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और मनी ट्रेल के आधार पर पुलिस ने रोहिणी और नेताजी सुभाष प्लेस स्थित फर्जी कॉल सेंटर का पता लगाया। यहां से म्यूल बैंक खातों के जरिए ठगी की रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किया जाता था।पुलिस ने छापेमारी कर पांच आरोपियों तजिंद्र सिंह उर्फ लकी, आशीष सैनी, शिव दयाल सिंह, शिवा और गिरिराज किशोर को मौके से गिरफ्तार किया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि गिरोह का बैकएंड ऑफिस रोहिणी के दीप विहार में चल रहा था। आगे की जांच में इस नेटवर्क के तार मुंबई और राजस्थान तक जुड़े पाए गए। पुलिस टीम ने राजस्थान से चार आरोपियों रामदेव सांगला, प्रवीण कुमावत उर्फ लकी, दीपक मेवाड़ा उर्फ देव, त्रिलोक चंद नायक को पकड़ा गया। आरोपियों से पूछताछ के बाद दो अन्य आरोपियों प्रतिभा उर्फ पायल और सतीश को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया।
खाते पीके को दे देते थे : आरोपियों ने बताया कि वे म्यूल खाते (धोखाधड़ी के लिए इस्तेमाल होने वाले खाते) का इंतजाम करते थे और उन्हें मुंबई से काम करने वाले एक व्यक्ति पीके को सौंप देते थे। खाते की जानकारी व्हाट्सएप और अन्य ऑनलाइन माध्यमों से साझा की जाती थी, और ठगी की रकम जमा करने के लिए इस्तेमाल करने से पहले इन खातों की पूरी जाँच-पड़ताल की जाती थी। आरोपी दिल्ली और मुंबई में मौजूद म्यूल बैंक खातों का इंतज़ाम और प्रबंधन करते थे। ये खाते कंबोडिया में बैठे उन साइबर जालसाजों के लिए इस्तेमाल होते थे, जो भारतीय नागरिकों को निवेश से होने वाले भारी मुनाफ़े का लालच देकर निवेश-घोटाले का शिकार बनाते थे।
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- कंबोडिया में बैठे गिरोह के लिए करते थे काम
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। कंबोडिया में बैठे साइबर जालसाजों के लिए काम कर रहे भारत में जालसाजी कर रहे थे। इन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री का एआई से एक फर्जी वीडियो बना रखा था। ये इस वीडियो के आधार पर साेशल मीडिया पर लोगों से निवेश कराकर भारी मुनाफे का लालच देकर ठगी कर रहे थे। दक्षिण-पश्चिमी जिले की साइबर थाना पुलिस ने इस गिरोह का पर्दाफाश कर 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में यह भी सामने आया कि यह गिरोह कंबोडिया में बैठे साइबर जालसाजों के लिए काम कर रहा था। दक्षिण-पश्चिमी जिला पुलिस उपायुक्त अमित गोयल ने बताया कि पुलिस गिरफ्तार आरोपियों तजिंद्र सिंह उर्फ लकी (26), आशीष सैनी (24), शिव दयाल सिंह (28), शिवा (18), गिरिराज किशोर (18), रामदेव सांगला (50), प्रवीण कुमावत उर्फ लकी (20), दीपक मेवाड़ा उर्फ देव (35), त्रिलोक चंद नायक (32), प्रतिभा उर्फ पायल (25), सतीश (34) के पास से 40 मोबाइल फोन, 92 फर्जी सिम कार्ड, 39 पासबुक/चेकबुक, 27 एटीएम कार्ड, लैपटॉप, 6 यूपीआई स्कैनर, 1 प्रिंटर और नकली दस्तावेज और अन्य डिजिटल उपकरण बरामद किए हैं। साइबर थाना पुलिस इस पूरे गिरोह के नेटवर्क को खंगालने में लगी है।
पुलिस उपायुक्त गोयल ने बताया कि एक 60 वर्षीय बुजुर्ग ने अपने साथ हुई 22.67 लाख रुपये की ठगी की शिकायत पुलिस को की थी कि उन्होंने इस वित्त मंत्री का एक वीडियो देखा था। जिस पर उन्होंने एक ऐप के जरिये निवेश करने के लिए कहा था। पीड़ित ने बताया कि उन्होंने वीडियो पर भरोसा कर लिंक के जरिए रजिस्ट्रेशन किया। इसके बाद आरोपियों ने खुद को निवेश सलाहकार बताकर संपर्क किया। उन्हें ‘मुद्रावन ऐप’ और अन्य प्लेटफॉर्म के जरिए निवेश करने के लिए कहा गया। शुरुआत में उन्हें कुछ मुनाफा दिखाया गया, लेकिन बाद में आरोपियों ने संपर्क बंद कर दिया। इस तरह पीड़ित से कुल 22.67 लाख रुपये की ठगी की गई। साइबर थाना एसएचओ इंस्पेक्टर प्रवीण कौशिक की टीम ने केस दर्ज कर जांच शुरू की।
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एआई को दुरुपयोग कर बनाई वीडियाे से लोगों को झांसे में लेते थे : एसआई लव देसवाल और हवलदार सचिन की टीम ने वित्त मंत्री के वीडियो की जांच की। पता चला कि आरोपियों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से वित्त मंत्री के भाषण जैसा दिखने वाला वीडियो तैयार किया। जिसमें वह एक विशेष ऐप के जरिए लोगों ने निवेश करने के लिए कह रही है। पुलिस की जांच में सामने आया कि आरोपियों ने वीडियो फेसबुक सहित अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल किया। वीडियो में निवेश करने पर मोटा मुनाफा मिलने का दावा किया गया था, जिससे लोग आसानी से उनके जाल में फंस जाते थे।
फर्जी कॉल सेंटर में बैठकर करते थे ठगी : इंस्पेक्टर प्रवीण कौशिक की टीम ने तकनीकी जांच, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और मनी ट्रेल के आधार पर पुलिस ने रोहिणी और नेताजी सुभाष प्लेस स्थित फर्जी कॉल सेंटर का पता लगाया। यहां से म्यूल बैंक खातों के जरिए ठगी की रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किया जाता था।पुलिस ने छापेमारी कर पांच आरोपियों तजिंद्र सिंह उर्फ लकी, आशीष सैनी, शिव दयाल सिंह, शिवा और गिरिराज किशोर को मौके से गिरफ्तार किया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि गिरोह का बैकएंड ऑफिस रोहिणी के दीप विहार में चल रहा था। आगे की जांच में इस नेटवर्क के तार मुंबई और राजस्थान तक जुड़े पाए गए। पुलिस टीम ने राजस्थान से चार आरोपियों रामदेव सांगला, प्रवीण कुमावत उर्फ लकी, दीपक मेवाड़ा उर्फ देव, त्रिलोक चंद नायक को पकड़ा गया। आरोपियों से पूछताछ के बाद दो अन्य आरोपियों प्रतिभा उर्फ पायल और सतीश को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया।
खाते पीके को दे देते थे : आरोपियों ने बताया कि वे म्यूल खाते (धोखाधड़ी के लिए इस्तेमाल होने वाले खाते) का इंतजाम करते थे और उन्हें मुंबई से काम करने वाले एक व्यक्ति पीके को सौंप देते थे। खाते की जानकारी व्हाट्सएप और अन्य ऑनलाइन माध्यमों से साझा की जाती थी, और ठगी की रकम जमा करने के लिए इस्तेमाल करने से पहले इन खातों की पूरी जाँच-पड़ताल की जाती थी। आरोपी दिल्ली और मुंबई में मौजूद म्यूल बैंक खातों का इंतज़ाम और प्रबंधन करते थे। ये खाते कंबोडिया में बैठे उन साइबर जालसाजों के लिए इस्तेमाल होते थे, जो भारतीय नागरिकों को निवेश से होने वाले भारी मुनाफ़े का लालच देकर निवेश-घोटाले का शिकार बनाते थे।