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Delhi NCR News: कैडर रिव्यू में देरी से नाराज एम्स कर्मी, आंदोलन की चेतावनी
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के कर्मचारी और अधिकारी कैडर रिव्यू लागू न होने से नाराज हैं और अब आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से उनकी मांगों को नजरअंदाज किया जा रहा है। कैडर रिव्यू एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें कर्मचारियों की संख्या, पदों की संरचना और पदोन्नति के अवसरों की समय-समय पर समीक्षा की जाती है। नियमों के अनुसार, यह हर पांच साल में होना चाहिए, लेकिन एम्स में यह प्रक्रिया 1992 से लंबित बताई जा रही है।
कर्मचारियों का आरोप है कि इस वजह से कई लोग वर्षों से पदोन्नति से वंचित हैं। काम का बोझ बढ़ता जा रहा है, लेकिन स्टाफ की संख्या और पदों में कोई बदलाव नहीं हुआ। इससे कर्मचारियों के करियर पर असर पड़ रहा है और उनका मनोबल भी गिर रहा है। एम्स ऑफिसर्स एसोसिएशन ने कहा कि यह प्रस्ताव पिछले दो साल से स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के पास लंबित है। एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द फैसला नहीं लिया गया, तो आंदोलन को तेज किया जाएगा। हालांकि, विरोध के बावजूद एम्स में मरीजों की सेवाएं फिलहाल सामान्य रूप से जारी हैं।
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नई दिल्ली। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के कर्मचारी और अधिकारी कैडर रिव्यू लागू न होने से नाराज हैं और अब आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से उनकी मांगों को नजरअंदाज किया जा रहा है। कैडर रिव्यू एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें कर्मचारियों की संख्या, पदों की संरचना और पदोन्नति के अवसरों की समय-समय पर समीक्षा की जाती है। नियमों के अनुसार, यह हर पांच साल में होना चाहिए, लेकिन एम्स में यह प्रक्रिया 1992 से लंबित बताई जा रही है।
कर्मचारियों का आरोप है कि इस वजह से कई लोग वर्षों से पदोन्नति से वंचित हैं। काम का बोझ बढ़ता जा रहा है, लेकिन स्टाफ की संख्या और पदों में कोई बदलाव नहीं हुआ। इससे कर्मचारियों के करियर पर असर पड़ रहा है और उनका मनोबल भी गिर रहा है। एम्स ऑफिसर्स एसोसिएशन ने कहा कि यह प्रस्ताव पिछले दो साल से स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के पास लंबित है। एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द फैसला नहीं लिया गया, तो आंदोलन को तेज किया जाएगा। हालांकि, विरोध के बावजूद एम्स में मरीजों की सेवाएं फिलहाल सामान्य रूप से जारी हैं।
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