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अमर उजाला शतरंज प्रतियोगिता: फिनाले में बोले ग्रैंडमास्टर श्रीराम- 100 मीटर की रेस नहीं, मैराथन है शतरंज
अंकुर त्रिपाठी, अमर उजाला, नोएडा
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 09 Feb 2026 06:55 AM IST
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सार
अमर उजाला शतरंज प्रतियोगिता के ग्रैंड फिनाले में पहुंचे श्रीराम ने कहा कि अभिभावकों को समझना होगा कि शतरंज में परिणाम जल्दी नहीं मिलते। परिणाम तक पहुंचने में छह माह से तीन साल तक का समय लग सकता है। धैर्य और लगन के साथ आगे बढ़ते रहना होता है।
अमर उजाला शतरंज प्रतियोगिता के ग्रैंड फिनाले में 21वें ग्रैंडमास्टर श्रीराम झा।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
शतरंज 100 मीटर रेस की तरह नहीं है, यह मैराथन दौड़ने जैसा है। कई बार परिणाम अनुकूल न आने पर अभिभावक धैर्य खो देते हैं। उन्हें इससे बचना होगा और बच्चों को भी हिम्मत देनी होगी। रविवार को यह बातें देश के 21वें ग्रैंडमास्टर श्रीराम झा ने कहीं।
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अमर उजाला शतरंज प्रतियोगिता के ग्रैंड फिनाले में पहुंचे श्रीराम ने कहा कि अभिभावकों को समझना होगा कि शतरंज में परिणाम जल्दी नहीं मिलते। परिणाम तक पहुंचने में छह माह से तीन साल तक का समय लग सकता है। धैर्य और लगन के साथ आगे बढ़ते रहना होता है।
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श्रीराम कहते हैं कि अब यूरोपीय प्रतियोगिताओं में करीब 500 भारतीय खिलाड़ी खेल रहे हैं। देश से अब तक 92 ग्रैंडमास्टर निकल चुके हैं। शतरंज तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। अकेले दिल्ली से ही अब तक 7 ग्रैंडमास्टर बन चुके हंै। अमर उजाला की यह पहल देश के हर कोने तक पहुंचनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि विश्व भी भारत की शतरंज शक्ति को मान रहा है। दक्षिण भारत में बच्चे स्कूल छोड़कर शतरंज खेल रहे हैं, ऐसा नहीं होना चाहिए। उत्तर भारत में भी गांव से लेकर शहर तक लोग शतरंज से जुड़ते जा रहे हैं। साल दर साल प्रतिस्पर्धा बढ़ती जा रही है। चेस ओलंपियाड में महिला और पुरुष वर्ग में भारत स्वर्ण पदक जीत चुका है।
मोबाइल के बजाय बोर्ड पर खेलें : उन्होंने कहा कि शतरंज से निर्णय लेने की शक्ति बढ़ती है। खिलाड़ी 30 चालों के खेल में 30 निर्णय लेते हैं। बच्चों को मोबाइल पर शतरंज खेलने की बजाय बोर्ड पर खेलना चाहिए, क्योंकि हर प्रतियोगिता बोर्ड पर खेली जाती है। बोर्ड पर खेलने से अभ्यास बढ़ेगा और बेहतर परिणाम सामने आएंगे।
नन्हे उस्तादों ने ग्रैंड मास्टर से पूछे सवाल, मांगी सलाह
शतरंज खेलते समय रणनीति कैसे तैयार करनी चाहिए। प्रतिद्वंद्वी को चाल में फंसाने के लिए क्या करें?
- रुद्रांश, एस्टर पब्लिक स्कूल, ग्रेनो वेस्ट
शतरंज खेलते समय सबसे पहले एकाग्रता होनी चाहिए। अपने प्रतिद्वंद्वी की हर मूव पर नजर रखनी चाहिए। रोज तीन से चार अभ्यास मैच खेलें। खेल खत्म होने के बाद विश्लेषण जरूर करें।
शतरंज में सबसे मुख्य पीस कौन सी होती है। खेल के समय क्या क्या सावधानियां रखें?
- रुद्र पाराशर, रायन इंटरनेशनल स्कूल, ग्रेटर नोएडा
शतरंज में हर किरदार महत्वपूर्ण होता है। सबसे कठिन चाल घोड़े की होती है। कई लोग उसे समझ नहीं पाते। काफी सोच समझकर इसे चलना चाहिए।
एक दिन में कितनी देर अभ्यास करना चाहिए और कितने मिनट का खेल खेलना चाहिए?
- अविरल यादव, जेपी पब्लिक स्कूल, नोएडा
प्रतिदिन तीन से चार मैच का अभ्यास जरूर करना चाहिए। सबसे अच्छा 20 प्लस 5 मिनट का खेल होता है। स्कूली पढ़ाई को छोड़कर खेल खेलना नहीं चाहिए। पढ़ाई को भी उतना ही समय देना होगा। जितना खेल को दे रहे हैं।
शतरंज खेलते समय मेंटल प्रेशर को कैसे मैनेज करें?
- केशव त्यागी, एस्टर पब्लिक स्कूल, ग्रेटर नोएडा
हर खेल को आनंद लेते हुए खेलना चाहिए। शतरंज में हर चाल चलने से पहले काफी सोचना पड़ता है। इसलिए खेलते समय मानसिक दबाव में नहीं आएं। यदि आप मानसिक दबाव के साथ खेलेंगे तो जीत मुश्किल होगी। खेलते समय सारी परेशानियों को दूर रखेंगे तो जीत मिलेगी।
शतरंज खेलते समय क्या रणनीति अपनानी चाहिए?
- श्रेयस हरिहरन, दिल्ली वर्ल्ड पब्लिक स्कूल, ग्रेटर नोएडा
शतरंज के खेल में तीन बिंदु महत्वपूर्ण होते हैं। क्या करना है, क्यों करना है, कैसे करना है। पहले का जवाब आपके कोच बता सकते हैं। बाकी तो खुद सीखना पड़ता है। शतरंज को पढ़ाया नहीं जा सकता है। उसकी सीखना ही पड़ेगा। शतरंज अभ्यास से ही सीखा जा सकता है।
अमर उजाला नेशनल ओलंपियाड से निखरेगी छात्रों की सोच
शतरंज प्रतियोगिता के दौरान अमर उजाला नेशनल ओलंपियाड को लेकर प्रेजेंटेशन दिया गया। इस दौरान छात्रों और अभिभावकों को ओलंपियाड की जानकारी दी गई। मौके पर अमर उजाला नेशनल ओलंपियाड की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर विद्यार्थियों को ऑनलाइन पंजीकरण के बारे में बताया गया है। पंजीयन के बाद कक्षा 3 से लेकर 12वीं तक के छात्र-छात्राएं वार्षिक प्रतियोगिता में शामिल हो सकते हैं।
अमर उजाला नेशनल ओलंपियाड के चीफ मैनेजर राहुल पालीवाल ने बताया कि वार्षिक प्रतियोगिता दो चरणों में आयोजित की जाती है। पहले चरण में कक्षा तीन से पांचवीं तक के विद्यार्थियों से 40 प्रश्न, जबकि छठी से 12वीं तक के छात्रों से 50 प्रश्न पूछे जाते हैं। पहले चरण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले करीब 20 प्रतिशत छात्र दूसरे चरण यानी फाइनल राउंड के लिए चुने जाते हैं।
ओलंपियाड का उद्देश्य विद्यार्थियों में विश्लेषणात्मक सोच विकसित करना और विषयों की समझ पैदा करना है। प्रतियोगिता में सफल विद्यार्थियों को पुरस्कार प्रदान किए जाते हैं। इस मौके पर अभिभावकों से इस प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करने की अपील की गई। मौके पर छात्रों के लिए सवाल जवाब सत्र आयोजित हुआ। अहम है कि अमर उजाला नेशनल ओलंपियाड में गणित, विज्ञान, अंग्रेजी, सामान्य ज्ञान, वित्तीय जागरूकता, तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और लॉजिकल रीजनिंग जैसे विषय शामिल हैं। इच्छुक छात्र-छात्राएं amarujalaolympiad.com पर जाकर अपना रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं।