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Delhi NCR News: बिहार में बालू खनन के आरोपी एसपी के खिलाफ छह माह में जांच पूरी करने के आदेश

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 06 Mar 2026 07:06 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
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नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने बिहार राज्य सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्रीय प्रशासनिक ट्रिब्यूनल (सीएटी) के आदेश को रद्द कर दिया। अदालत ने पूर्व पुलिस अधीक्षक (एसपी) राकेश कुमार दुबे के खिलाफ लंबित अनुशासनिक जांच को पूरा करने के लिए बिहार सरकार को अतिरिक्त छह महीने का समय दिया है। दुबे पर अवैध बालू खनन और उसके परिवहन में सहायता देने का आरोप है।



न्यायमूर्ति अनिल क्षेत्रपाल और न्यायमूर्ति अमित महाजन की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि ट्रिब्यूनल का आदेश टिकाऊ नहीं है, क्योंकि जांच प्रक्रिया में पहले से ही काफी विलंब हो चुका है, जो ट्रिब्यूनल के ही अंतरिम आदेशों के कारण हुआ। अदालत ने नोट किया कि जांच नवंबर 2022 से दिसंबर 2023 तक एक साल से अधिक समय तक स्थगित रही थी। दुबे ने सीएटी में मूल आवेदन दाखिल कर जांच में कुछ दस्तावेजों की आपूर्ति न होने का आरोप लगाया था। ट्रिब्यूनल ने 10 नवंबर 2022 को जांच पर रोक लगा दी थी, जो 15 दिसंबर 2023 तक चली। फरवरी 2024 में मूल आवेदन का निपटारा करते हुए ट्रिब्यूनल ने जांच तीन महीने में पूरी करने का निर्देश दिया था। बाद में, बिहार सरकार की मांग पर छह महीने का विस्तार दिया गया, लेकिन इसे 10 मई 2024 से प्रभावी माना गया, जिससे सरकार को व्यावहारिक रूप से केवल 38 दिन ही मिले। बिहार सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता अजमत हयात अमानुल्लाह ने अदालत को बताया कि जांच को ईमानदारी से पूरा करने के प्रयास किए जा रहे हैं और इसमें कोई जानबूझकर विलंब नहीं है। उन्होंने कहा कि गवाहों की परीक्षा चल रही है और जांच अधिकारी को इसे शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, दुबे की ओर से तर्क दिया गया कि जांच की लंबी लंबित स्थिति से उनके मुवक्किल को गंभीर नुकसान हो रहा है, क्योंकि वे जल्द ही सेवानिवृत्त होने वाले हैं और इससे उनके सेवा हित प्रभावित हो रहे हैं।
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अदालत ने कहा, अनुशासनिक जांच, खासकर जहां गंभीर आरोप जैसे अवैध बालू खनन में सहायता शामिल हैं, में गवाहों की परीक्षा, दस्तावेजों की जांच और प्रक्रियात्मक सुरक्षा का पालन आवश्यक है। जांच को असमाप्त छोड़ना न तो नियोक्ता के हित में है और न ही आरोपी अधिकारी के। अदालत ने जोर दिया कि दुबे के सेवानिवृत्ति के निकट होने का तथ्य जांच को पूरा करने की आवश्यकता से ऊपर नहीं हो सकता। इस फैसले से बिहार सरकार को जांच पूरी करने का मौका मिला है, जो अब 27 फरवरी 2026 से छह महीने के भीतर संपन्न होनी चाहिए।
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