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कांग्रेस, आप व सपा के कुटिल रुख के कारण विधेयक नहीं हुआ पास : भाजपा
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। प्रदेश भाजपा ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पास न होने को लेकर विपक्षी दलों पर हमला बोला है। प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा के साथ वरिष्ठ शिक्षाविद् रमा शर्मा और रूबी मिश्रा ने प्रेस वार्ता में कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और समाजवादी पार्टी पर आरोप लगाया कि उनके नकारात्मक और कुटिल रुख के चलते यह विधेयक पर्याप्त समर्थन न जुटा सका। वक्ताओं ने कहा कि देश की आधी आबादी इस फैसले को लेकर विपक्षी दलों को कभी माफ नहीं करेगी।
वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि जिन दलों ने विधेयक का विरोध किया, उन्हें अपनी ही पार्टी की महिला कार्यकर्ताओं के आक्रोश का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने दावा किया कि संसद में बिल गिरने पर कुछ विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रिया महिलाओं की भावनाओं के प्रति असंवेदनशीलता दर्शाती है। उन्होंने कहा कि यदि 33 प्रतिशत आरक्षण जैसे प्रस्ताव पर भी सहमति नहीं बन पाई तो भविष्य में महिलाओं को अधिक प्रतिनिधित्व देने की दिशा में गंभीर बाधाएं उत्पन्न होंगी।
हंसराज कॉलेज की प्रिंसिपल रमा शर्मा ने कहा कि महिलाएं आज शिक्षा, समाज और राष्ट्र निर्माण में तेजी से आगे बढ़ रही हैं और ऐसे में राजनीतिक प्रतिनिधित्व उनका अधिकार बनता है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब 33 फीसदी आरक्षण पर ही सहमति नहीं बन पाई, तो 50 फीसदी प्रतिनिधित्व की दिशा में कैसे बढ़ा जाएगा।
भगिनी निवेदिता कॉलेज की प्रिंसिपल रूबी मिश्रा ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि छात्राओं में इस विधेयक को लेकर खासा उत्साह था। उन्होंने बताया कि कई छात्राओं ने उनसे सवाल किया कि हमेशा हमारे साथ ऐसा ही क्यों होता है? उन्होंने कहा कि यह मुद्दा केवल एक नीति का नहीं, बल्कि लाखों लड़कियों की उम्मीदों का है।
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नई दिल्ली। प्रदेश भाजपा ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पास न होने को लेकर विपक्षी दलों पर हमला बोला है। प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा के साथ वरिष्ठ शिक्षाविद् रमा शर्मा और रूबी मिश्रा ने प्रेस वार्ता में कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और समाजवादी पार्टी पर आरोप लगाया कि उनके नकारात्मक और कुटिल रुख के चलते यह विधेयक पर्याप्त समर्थन न जुटा सका। वक्ताओं ने कहा कि देश की आधी आबादी इस फैसले को लेकर विपक्षी दलों को कभी माफ नहीं करेगी।
वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि जिन दलों ने विधेयक का विरोध किया, उन्हें अपनी ही पार्टी की महिला कार्यकर्ताओं के आक्रोश का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने दावा किया कि संसद में बिल गिरने पर कुछ विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रिया महिलाओं की भावनाओं के प्रति असंवेदनशीलता दर्शाती है। उन्होंने कहा कि यदि 33 प्रतिशत आरक्षण जैसे प्रस्ताव पर भी सहमति नहीं बन पाई तो भविष्य में महिलाओं को अधिक प्रतिनिधित्व देने की दिशा में गंभीर बाधाएं उत्पन्न होंगी।
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हंसराज कॉलेज की प्रिंसिपल रमा शर्मा ने कहा कि महिलाएं आज शिक्षा, समाज और राष्ट्र निर्माण में तेजी से आगे बढ़ रही हैं और ऐसे में राजनीतिक प्रतिनिधित्व उनका अधिकार बनता है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब 33 फीसदी आरक्षण पर ही सहमति नहीं बन पाई, तो 50 फीसदी प्रतिनिधित्व की दिशा में कैसे बढ़ा जाएगा।
भगिनी निवेदिता कॉलेज की प्रिंसिपल रूबी मिश्रा ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि छात्राओं में इस विधेयक को लेकर खासा उत्साह था। उन्होंने बताया कि कई छात्राओं ने उनसे सवाल किया कि हमेशा हमारे साथ ऐसा ही क्यों होता है? उन्होंने कहा कि यह मुद्दा केवल एक नीति का नहीं, बल्कि लाखों लड़कियों की उम्मीदों का है।

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