{"_id":"69c0532828161e57cf0e11e1","slug":"blood-thinning-drugs-are-less-effective-with-one-in-three-patients-at-risk-2026-03-23","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"AIIMS Study: खून पतला करने वाली दवाओं का असर घटा, हर तीसरा मरीज जोखिम में; बदल सकता है इलाज का तरीका","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
AIIMS Study: खून पतला करने वाली दवाओं का असर घटा, हर तीसरा मरीज जोखिम में; बदल सकता है इलाज का तरीका
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 23 Mar 2026 05:05 AM IST
विज्ञापन
सार
नए अध्ययन के अनुसार, करीब हर तीसरे मरीज में ये दवाएं पूरी तरह या आंशिक रूप से काम नहीं कर रहीं। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के डॉक्टरों द्वारा किए गए इस अध्ययन में 151 दिल और धमनियों की बीमारी (सीएडी) से पीड़ित मरीजों को शामिल किया गया।
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Adobe Stock
विज्ञापन
विस्तार
खून पतला करने के लिए अब तक सबसे भरोसेमंद मानी जाने वाली दवाएं एस्पिरिन और क्लोपिडोग्रेल कई मरीजों में असर खोती दिख रही है। नए अध्ययन के अनुसार, करीब हर तीसरे मरीज में ये दवाएं पूरी तरह या आंशिक रूप से काम नहीं कर रहीं। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के डॉक्टरों द्वारा किए गए इस अध्ययन में 151 दिल और धमनियों की बीमारी (सीएडी) से पीड़ित मरीजों को शामिल किया गया। जांच में पाया गया कि एस्पिरिन करीब 30 फीसदी मरीजों में पूरी या आंशिक रूप से बेअसर रही, जबकि क्लोपिडोग्रेल का असर इससे भी कम देखा गया।
शोधकर्ताओं ने प्लेटलेट एग्रेशन टेस्ट के जरिए यह समझने की कोशिश की कि ये दवाएं खून को थक्का बनने से रोकने में कितनी कारगर हैं। हैरानी की बात है कि मधुमेह (डायबिटीज) से पीड़ित मरीजों में इन दवाओं के प्रति प्रतिरोध ज्यादा पाया गया। अध्ययन के अनुसार, अगर दवाएं ठीक से काम नहीं करेंगी तो हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है।
अध्ययन के दौरान कुछ मरीजों में दोबारा दिल का दौरा भी देखा गया और कुछ मौतें भी हुईं, हालांकि इनके सीधे संबंध पर अभी और शोध की जरूरत बताई जा रही है। एम्स के हृदय रोग विभाग से शोधकर्ता डॉ. निर्मल घाटी कि बताया अब इलाज के तरीकों में बदलाव की जरूरत हो सकती है। मरीजों के लिए वन-साइज-फिट्स-ऑल यानी एक जैसी दवा की रणनीति कारगर नहीं रही। भविष्य में मरीज की स्थिति और शरीर की प्रतिक्रिया के हिसाब से दवा तय करनी पड़ सकती है।
Trending Videos
शोधकर्ताओं ने प्लेटलेट एग्रेशन टेस्ट के जरिए यह समझने की कोशिश की कि ये दवाएं खून को थक्का बनने से रोकने में कितनी कारगर हैं। हैरानी की बात है कि मधुमेह (डायबिटीज) से पीड़ित मरीजों में इन दवाओं के प्रति प्रतिरोध ज्यादा पाया गया। अध्ययन के अनुसार, अगर दवाएं ठीक से काम नहीं करेंगी तो हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
अध्ययन के दौरान कुछ मरीजों में दोबारा दिल का दौरा भी देखा गया और कुछ मौतें भी हुईं, हालांकि इनके सीधे संबंध पर अभी और शोध की जरूरत बताई जा रही है। एम्स के हृदय रोग विभाग से शोधकर्ता डॉ. निर्मल घाटी कि बताया अब इलाज के तरीकों में बदलाव की जरूरत हो सकती है। मरीजों के लिए वन-साइज-फिट्स-ऑल यानी एक जैसी दवा की रणनीति कारगर नहीं रही। भविष्य में मरीज की स्थिति और शरीर की प्रतिक्रिया के हिसाब से दवा तय करनी पड़ सकती है।