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CBRN Command Center: दिल्ली में बनेगा सीबीआरएन कमांड सेंटर, परमाणु हमले में भी करेगा काम; इसलिए पड़ी जरूरत
Fri, 03 Jul 2026 03:13 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Fri, 03 Jul 2026 03:13 AM IST
सार
कनॉट प्लेस स्थित मौजूदा फायर मुख्यालय की जगह नया अत्याधुनिक मुख्यालय बनेगा। मुख्यालय के भूमिगत हिस्से में भारत का पहला रेडिएशन-शील्डेड (सीबीआरएन) कमांड सेंटर स्थापित होगा।
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सांकेतिक चित्र
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
राजधानी दिल्ली को परमाणु, जैविक और रासायनिक आपदाओं से बचाने के लिए दिल्ली फायर सर्विसेज (डीएफएस) ने ऐतिहासिक कदम उठाया है। कनॉट प्लेस स्थित मौजूदा फायर मुख्यालय की जगह नया अत्याधुनिक मुख्यालय बनेगा। मुख्यालय के भूमिगत हिस्से में भारत का पहला रेडिएशन-शील्डेड (सीबीआरएन) कमांड सेंटर स्थापित होगा। परियोजना का टेंडर जारी हो चुका है और अगले पांच वर्ष में काम पूरा होगा।
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मुख्य अग्निशमन अधिकारी अभिलाष मलिक के अनुसार, सीबीआरएन सेंटर सामान्य कंट्रोल रूम से अलग होगा। इसे विशेष तकनीक से जमीन के नीचे इस तरह बनाया जाएगा कि बाहरी परमाणु विकिरण या जहरीली गैस अंदर नहीं आ सकेगी। परमाणु हमले या रेडियोलॉजिकल रिसाव के दौरान भी यहां से अधिकारी और वैज्ञानिक सुरक्षित रहकर पूरे शहर में राहत-बचाव का संचालन कर सकेंगे। यह सेंटर नेहरू प्लेस, लक्ष्मी नगर और रोहिणी के तीन आपदा केंद्रों और डीएफएस सर्च एंड रेस्क्यू बटालियन को सीधे निर्देश देगा।
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एआई आधारित सेंट्रल कमांड रूम भी बनेगा
यह परियोजना डीएफएस के 25-वर्षीय आधुनिकीकरण रोडमैप का हिस्सा है। अगले एक साल में एआई आधारित सेंट्रलाइज्ड कमांड रूम भी बनेगा। एआई सिस्टम ट्रैफिक, कॉल पैटर्न और मौसम का विश्लेषण कर आग लगने की आशंका पहले ही बता देगा, जिससे रिस्पॉन्स टाइम घटेगा। साथ ही दिल्ली के पांच ऑपरेशनल जोन-उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम और मध्य में अलग कमांड सेंटर विकसित होंगे।
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इस्राइल, अमेरिका और रूस में बने हैं सेंटर
सीबीआरएन यानी रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल और परमाणु कमांड सेंटर अमेरिका, इस्राइल और रूस जैसे देशों में पहले से हैं। अमेरिका का माउंट वेदर और रूस का कोविंस्की कामेन बंकर इसी तरह के हैं। दिल्ली का यह सेंटर भारत को सीबीआरएन आपदा प्रबंधन में अग्रणी देशों की कतार में ला देगा। विशेषज्ञों के मुताबिक, बदलते भू-राजनीतिक हालात और शहरी आतंकवाद के खतरे को देखते हुए ऐसे सेंटर अब बड़े शहरों की जरूरत बन गए हैं।