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Delhi NCR News: आईजीएनसीए में सौहार्द और सचित्र संविधान दर्शन प्रदर्शनी का समापन
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। देहरादून के ग्राफिक एरा हिल विश्वविद्यालय परिसर में पिछले तीन दिनों से चल रही ‘सौहार्द’ और ‘सचित्र संविधान दर्शन’ प्रदर्शनी का गुरुवार को समापन हुआ। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) के कला दर्शन विभाग ने संस्कार भारती उत्तराखंड और ग्राफिक एरा हिल विश्वविद्यालय के सहयोग से इन दोनों प्रदर्शनियों का आयोजन किया। ‘सौहार्द’ प्रदर्शनी भारतीय सभ्यता के उस विचार को सामने रखती है, जिसमें सहअस्तित्व, पारस्परिक सम्मान और सद्भाव को समाज की बुनियादी विशेषताओं के रूप में देखा गया है। वहीं ‘सचित्र संविधान दर्शन’ में भारत के मूल संविधान की कलात्मक सज्जा और उससे जुड़े कलाकारों के योगदान को दर्शाया गया। दोनों प्रदर्शनियों को एक साथ देखने पर यह अहसास होता है कि भारतीय संविधान केवल कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि देश की विविध सांस्कृतिक विरासत और कलात्मक चेतना से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। कला के माध्यम से सौहार्द, विविधता और संवैधानिक चेतना जैसे विषयों को आम दर्शकों तक पहुंचाने की कोशिश प्रदर्शनी की खासियत रही। इनमें नंदलाल बोस समेत कई प्रतिष्ठित कलाकारों और महिला कलाकारों का योगदान भी शामिल है। प्रदर्शनी का उद्घाटन पद्मश्री लोक गायिका और संगीतकार माधुरी बड़थ्वाल के मुख्य आतिथ्य में हुआ था। इस दौरान ग्राफिक एरा हिल विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. (डॉ.) तबस्सुम नकवी, संस्कार भारती उत्तराखंड की अध्यक्ष और उत्तराखंड सरकार की विधायक सविता कपूर, आईजीएनसीए के कला दर्शन विभाग की विभागाध्यक्ष और प्रदर्शनी संयोजिका प्रो. (डॉ.) ऋचा काम्बोज समेत कई लोग मौजूद रहे।
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नई दिल्ली। देहरादून के ग्राफिक एरा हिल विश्वविद्यालय परिसर में पिछले तीन दिनों से चल रही ‘सौहार्द’ और ‘सचित्र संविधान दर्शन’ प्रदर्शनी का गुरुवार को समापन हुआ। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) के कला दर्शन विभाग ने संस्कार भारती उत्तराखंड और ग्राफिक एरा हिल विश्वविद्यालय के सहयोग से इन दोनों प्रदर्शनियों का आयोजन किया। ‘सौहार्द’ प्रदर्शनी भारतीय सभ्यता के उस विचार को सामने रखती है, जिसमें सहअस्तित्व, पारस्परिक सम्मान और सद्भाव को समाज की बुनियादी विशेषताओं के रूप में देखा गया है। वहीं ‘सचित्र संविधान दर्शन’ में भारत के मूल संविधान की कलात्मक सज्जा और उससे जुड़े कलाकारों के योगदान को दर्शाया गया। दोनों प्रदर्शनियों को एक साथ देखने पर यह अहसास होता है कि भारतीय संविधान केवल कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि देश की विविध सांस्कृतिक विरासत और कलात्मक चेतना से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। कला के माध्यम से सौहार्द, विविधता और संवैधानिक चेतना जैसे विषयों को आम दर्शकों तक पहुंचाने की कोशिश प्रदर्शनी की खासियत रही। इनमें नंदलाल बोस समेत कई प्रतिष्ठित कलाकारों और महिला कलाकारों का योगदान भी शामिल है। प्रदर्शनी का उद्घाटन पद्मश्री लोक गायिका और संगीतकार माधुरी बड़थ्वाल के मुख्य आतिथ्य में हुआ था। इस दौरान ग्राफिक एरा हिल विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. (डॉ.) तबस्सुम नकवी, संस्कार भारती उत्तराखंड की अध्यक्ष और उत्तराखंड सरकार की विधायक सविता कपूर, आईजीएनसीए के कला दर्शन विभाग की विभागाध्यक्ष और प्रदर्शनी संयोजिका प्रो. (डॉ.) ऋचा काम्बोज समेत कई लोग मौजूद रहे।