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Delhi NCR News: जसोला में अवैध निर्माण पर डीडीए सख्त, हाईकोर्ट से स्टे हटाने की मांग
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-डीडीए ने हाल ही में एनजीटी में भी इस मामले से जुड़े दस्तावेज और नई तस्वीरें जमा की
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। जसोला इलाके में सरकारी जमीन पर कथित अवैध निर्माण हटाने को लेकर दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने कानूनी कार्रवाई तेज कर दी है। डीडीए ने दिल्ली हाईकोर्ट में 2019 से जारी स्टे ऑर्डर हटाने की मांग की है, ताकि जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया जा सके। साथ ही, हाल ही में एनजीटी में भी मामले से जुड़े दस्तावेज और नई तस्वीरें जमा की हैं।
मामला अपोलो अस्पताल के पीछे खसरा नंबर एक व दो की जमीन से जुड़ा है। डीडीए का दावा है कि यह जमीन अधिग्रहीत है और वर्तमान निर्माण अवैध है। प्राधिकरण ने धारा 151 सीपीसी के तहत याचिका दायर कर 23 दिसंबर 2019 के स्टे आदेश को हटाने की मांग की है, जिसमें कोर्ट ने किसी भी कार्रवाई पर रोक लगा दी थी।
डीडीए का सामना राधा कृष्ण सुधार समिति से है, जो इसे ‘राधा कृष्ण विहार’ कॉलोनी का हिस्सा बताती है। समिति ने दिल्ली सरकार के दिसंबर 2019 के उस आदेश का हवाला दिया है, जिसमें अनधिकृत कॉलोनियों के लिए भूमि अधिग्रहण वापस लेने की बात कही गई थी। हाईकोर्ट ने 17 अप्रैल 2026 की सुनवाई में सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि याचिकाकर्ता को और समय नहीं दिया जाएगा। अगली सुनवाई नौ जुलाई को होगी।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। जसोला इलाके में सरकारी जमीन पर कथित अवैध निर्माण हटाने को लेकर दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने कानूनी कार्रवाई तेज कर दी है। डीडीए ने दिल्ली हाईकोर्ट में 2019 से जारी स्टे ऑर्डर हटाने की मांग की है, ताकि जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया जा सके। साथ ही, हाल ही में एनजीटी में भी मामले से जुड़े दस्तावेज और नई तस्वीरें जमा की हैं।
मामला अपोलो अस्पताल के पीछे खसरा नंबर एक व दो की जमीन से जुड़ा है। डीडीए का दावा है कि यह जमीन अधिग्रहीत है और वर्तमान निर्माण अवैध है। प्राधिकरण ने धारा 151 सीपीसी के तहत याचिका दायर कर 23 दिसंबर 2019 के स्टे आदेश को हटाने की मांग की है, जिसमें कोर्ट ने किसी भी कार्रवाई पर रोक लगा दी थी।
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डीडीए का सामना राधा कृष्ण सुधार समिति से है, जो इसे ‘राधा कृष्ण विहार’ कॉलोनी का हिस्सा बताती है। समिति ने दिल्ली सरकार के दिसंबर 2019 के उस आदेश का हवाला दिया है, जिसमें अनधिकृत कॉलोनियों के लिए भूमि अधिग्रहण वापस लेने की बात कही गई थी। हाईकोर्ट ने 17 अप्रैल 2026 की सुनवाई में सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि याचिकाकर्ता को और समय नहीं दिया जाएगा। अगली सुनवाई नौ जुलाई को होगी।
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