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दिल्ली में गड्ढे में गिरकर मौत: हादसे पर सरकार सख्त, आठ सूत्रीय सुरक्षा निर्देश लागू; खोदाई की रिपोर्ट तलब

अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 08 Feb 2026 03:28 AM IST
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सार

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घटना को गंभीर मानते हुए राजधानी भर में चल रहे सभी खोदाई कार्यों के लिए आठ-सूत्रीय सुरक्षा निर्देश तत्काल लागू करने के आदेश दिए हैं।

Death in a pothole in Delhi: Government takes strict action on the accident
रेखा गुप्ता - फोटो : ANI
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विस्तार

जनकपुरी में हुए दुखद हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने साफ संदेश दे दिया है कि अब खुदाई कार्यों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घटना को गंभीर मानते हुए राजधानी भर में चल रहे सभी खोदाई कार्यों के लिए आठ-सूत्रीय सुरक्षा निर्देश तत्काल लागू करने के आदेश दिए हैं। सीएम ने सभी संबंधित विभागों और एजेंसियों से तीन दिनों के भीतर दिल्ली में मौजूद हर खोदाई स्थल की विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

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मुख्यमंत्री के निर्देश पर मुख्य सचिव ने आदेश जारी करते हुए कहा है कि सड़कों, फुटपाथों और भूमिगत सेवाओं से जुड़े किसी भी काम में सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा। नियमों की अनदेखी जहां भी पाई गई, वहां जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा, खोदाई के कारण किसी की जान जा रही या कोई घायल हो रहा, तो ये सिर्फ हादसा नहीं बल्कि गंभीर प्रशासनिक चूक है। ऐसे मामलों में दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। 
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ये हैं निर्देश 

  • सभी दिशाओं से दिखने वाले स्पष्ट चेतावनी संकेत
  • रिफ्लेक्टर लाइट, ब्लिंकर और चमकीले टेप की व्यवस्था
  • मजबूत, लगातार और साफ दिखाई देने वाली बैरिकेडिंग
  • खोदाई की मिट्टी या सामग्री राहगीरों को न दिखे
  • धूल प्रदूषण रोकने के लिए जरूरी इंतजाम
  • सुरक्षित पैदल मार्ग और ट्रैफिक डायवर्जन
  • फील्ड अधिकारियों और एजेंसियों की स्पष्ट जिम्मेदारी
  • नियमित निरीक्षण और तीन दिन में समेकित रिपोर्ट

निरीक्षण में कमी मिली, तो कार्रवाई तय
निर्देश लोक निर्माण विभाग, दिल्ली जल बोर्ड, सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण विभाग, नगर निगम, नई दिल्ली नगर पालिका परिषद, बिजली वितरण कंपनियों और सभी निजी ठेकेदारों पर समान रूप से लागू होंगे। विभागों को आदेश दिया गया है कि वे हाल में पूरे हुए सभी खोदाई कार्यों की तुरंत समीक्षा करें। इन स्थलों की सूची, सुरक्षा इंतजाम और सुधारात्मक कदमों की जानकारी तीन दिनों के भीतर मुख्य सचिव कार्यालय को दें। कागजी निरीक्षण नहीं चलेगा। इंजीनियर-इन-चार्ज और फील्ड इंजीनियर सीधे तौर पर जिम्मेदार होंगे। निरीक्षण में कमी मिली, तो कार्रवाई तय होगी।


कमल के परिजनों ने शुरू की न्याय की लड़ाई तेज, दोषी एजेंसियों पर मुकदमा करने की तैयारी
25 वर्षीय कमल ध्यानी की मौत के मामले में परिजनों ने दिल्ली पुलिस और दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) समेत सभी दोषी एजेंसीयों के खिलाफ कोर्ट जाने का फैसला किया है। परिवार का आरोप है कि 20 फीट गहरे खुले गड्ढे में कोई बैरिकेडिंग, चेतावनी लाइट या सुरक्षा नहीं थी, जिससे कमल की बाइक गिर गई और मौके पर मौत हो गई। रातभर तलाश के दौरान पुलिस ने फोन लोकेशन ट्रैकिंग में जानबूझकर देरी की और मदद नहीं की, जिससे बेटा बच नहीं सका। परिजनों की वकील ने कहा, यह महज हादसा नहीं, लापरवाही से हुई हत्या है।

वे सीसीटीवी फुटेज, ठेकेदार की जिम्मेदारी और पुलिस की उदासीनता पर सवाल उठाते हुए मानहानि, लापरवाही से मौत और गैर-इरादतन हत्या में मुकदमा दायर करने की तैयारी कर रहे हैं। भाई करन ने भावुक होकर कहा, हम न्याय के लिए लड़ेंगे, ताकि कोई और परिवार ऐसा दर्द न झेले। पुलिस ने ठेकेदार राजेश प्रजापति को गिरफ्तार किया, तीन डीजेबी इंजीनियर सस्पेंड किए लेकिन परिजन तेज जांच, कड़ी सजा और सिस्टम में सुधार की मांग कर रहे हैं।

जैव-चिकित्सीय कचरे के गहरे गड्ढों में निस्तारण पर एनजीटी सख्त, सभी राज्यों से रिपोर्ट मांगी
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने जैव-चिकित्सीय कचरे के गहरे गड्ढों में निस्तारण (डीप बरीयल) को लेकर सख्त रुख अपनाया है। एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. ए सेंथिल वेल ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) को निर्देश दिया है कि वह सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से इस संबंध में विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट पेश करे। 

पीठ ने कहा कि अब तक दी गई रिपोर्ट से यह साफ नहीं हो पाया है कि जिन राज्यों में अभी भी जैव-चिकित्सीय कचरे को गड्ढों में दबाया जा रहा है, वहां पर्यावरण से जुड़ी तय शर्तों और मानकों का पालन हो रहा है या नहीं। यह मामला जैव-चिकित्सीय अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के अनुपालन से जुड़ा है। सुनवाई के दौरान सीपीसीबी ने बताया कि कुछ राज्यों में डीप बरीयल की प्रक्रिया अब भी जारी है, जबकि कई राज्यों ने इसे बंद कर कॉमन बायो-मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट फैसिलिटी (सीबीडब्ल्यूटीएफ) के जरिए कचरे का निस्तारण शुरू कर दिया है।

अदालत ने साफ किया कि जहां डीप बरीयल की अनुमति है, वहां भूजल स्तर, स्थल का चयन, निगरानी और पर्यावरण सुरक्षा जैसे मानकों का सख्ती से पालन होना चाहिए। अधिकरण ने सीपीसीबी से कहा कि वह खुद सत्यापन कर यह बताए कि किन राज्यों में नियमों का सही तरह से पालन हो रहा है और किन जगहों पर नहीं। मामले की अगली सुनवाई 21 अप्रैल 2026 को होगी। संवाद 

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