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गड्ढे में गिरकर मौत: हादसे की सूचना इधर-उधर घूमती रही, मदद की जगह सबूत मिटाते रहे ठेकेदार; मिट्टी पर बड़ा सवाल

पुरुषोत्तम वर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 08 Feb 2026 03:38 AM IST
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सार

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसे से पहले गड्ढे के चारों ओर मिट्टी नहीं थी, लेकिन बाद में अचानक मिट्टी दिखाई देने लगी। सवाल यही है,जब कमल मदद की आस में तड़प रहा था, तब गड्ढे के चारों ओर मिट्टी आखिर कौन डाल रहा था?

News of the accident kept circulating, contractors kept erasing evidence instead of helping.
demo - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

जनकपुरी में बाइक सवार कमल ध्यानी की मौत किसी एक हादसे की नहीं, बल्कि संवेदनहीनता और साजिशन लापरवाही की कहानी बनती जा रही है। हादसे की सूचना जहां एक से दूसरे के बीच घूमती रही, वहीं मदद पहुंचाने के बजाय ठेकेदार सबूत मिटाने में जुटे रहे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसे से पहले गड्ढे के चारों ओर मिट्टी नहीं थी, लेकिन बाद में अचानक मिट्टी दिखाई देने लगी। सवाल यही है,जब कमल मदद की आस में तड़प रहा था, तब गड्ढे के चारों ओर मिट्टी आखिर कौन डाल रहा था?

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दिल्ली पुलिस ने इस मामले में लापरवाही और संवेदनहीनता को गंभीर अपराध मानते हुए उप-ठेकेदार राजेश कुमार प्रजापति (47) को हादसे की जानकारी अधिकारियों को न देने का आरोपी बनाया है। मुख्य ठेकेदार शुभम गुप्ता पर भी सूचना छिपाने का आरोप लगाया गया है। 
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दिल्ली जल बोर्ड के इस कार्य का ठेका केके स्पून कंपनी के पास था, जिसके खिलाफ अलग से प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस के अनुसार, हादसे वाली जगह से गुजर रहे सागरपुर निवासी कार चालक विपिन सिंह ने सबसे पहले सुरक्षा गार्ड को इसकी सूचना दी। गार्ड ने कंपनी के कर्मचारी योगेश को बताया, जिसने उप-ठेकेदार राजेश प्रजापति को जानकारी दी और मौके पर पहुंचा।

राजेश प्रजापति ने मुख्य ठेकेदार शुभम गुप्ता को फोन कर हादसे की सूचना दी। जांच में सामने आया है कि प्रजापति ने उस रात दो–तीन अन्य लोगों को भी फोन कर हादसे की चर्चा की, लेकिन न पुलिस को सूचना दी गई और न ही कमल को गड्ढे से निकालने की कोशिश की गई।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि सूचना मिलने के बावजूद मुख्य ठेकेदार रात में मौके पर क्यों नहीं पहुंचा। पुलिस के अनुसार, उसकी लोकेशन कानपुर में मिली है। पूछताछ में उप-ठेकेदार ने दावा किया कि वह डर गया था, इसलिए कमल को गड्ढे से नहीं निकाल सका। हालांकि पुलिस को यह दलील स्वीकार्य नहीं लग रही है। पुलिस का मानना है कि डर से बड़ी इंसानियत होती है, और अगर समय रहते मदद की जाती तो शायद एक जान बचाई जा सकती थी। 

यह हादसा सिर्फ एक गड्ढे की वजह से नहीं हुआ, बल्कि उस समाज और सिस्टम की विफलता का नतीजा है, जहां एक इंसान तड़पता रहा और आसपास खड़े लोग, जिम्मेदार और व्यवस्था सब खामोश बने रहे।

परिजनों को भी नहीं दी जानकारी 
राजेश और योगेश ने इसकी जानकारी पुलिस तक को नहीं दी। यहां तक कि तलाश करते परिजनों को वहां पहुंचने पर उसने उन्हें भी गड्ढे में किसी के गिरने के बारे में नहीं बताया। राजेश के मुताबिक गार्ड योगेश इटावा यूपी का रहने वाला है, जो घटना के बाद से भागा हुआ है। पुलिस उपायुक्त ने बताया कि योगेश की गिरफ्तारी के लिए एक पुलिस टीम को इटावा भेजी गई है।

ऐसे खुला राज
दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने जब हादसे वाली जगह के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली तो हादसे वाली जगह से सबसे पहले विपिन सिंह की कार दिखाई दी। पुलिस कार के रजिस्ट्रेशन नंबर से विपिन तक पहुंची। इसके बाद कमल के गुनहगारों के नाम खुलते चले गए।

पुलिस ने बताया कि फोन पर बातचीत के रिकॉर्ड से पता चला कि योगेश ने रात करीब 12:21 बजे प्रजापति को घटना की जानकारी दी, जिसके बाद वह 15-20 मिनट के भीतर मौके पर पहुंचा। ठेकेदार और दिल्ली जल बोर्ड के संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 105 (गैर इरादतन हत्या) के तहत जनकपुरी थाने में एक प्राथमिकी पहले ही दर्ज की जा चुकी है। 

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