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वाहन चोर गिरोह बेनकाब, 10 दबोचे: चेसिस नंबर से छेड़छाड़ कर हजार से ज्यादा वाहन बेचे, 31 महंगी गाड़ियां बरामद

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vijay Singh Pundir Updated Sat, 02 May 2026 01:09 PM IST
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सार

जांच में पता चला कि अंतरराज्यीय आपराधिक गिरोह महंगी गाड़ियां चुराने और चोरी की गई तथा लोन पर ली गई गाड़ियों को हासिल करने के काम में लिप्त था। गिरोह के सदस्य चेसिस नंबरों से छेड़छाड़ करते थे। जाली बिक्री पत्रों (फॉर्म-21), मनगढ़ंत दस्तावेजों और नकली बैंक अनापत्ति प्रमाण पत्र का इस्तेमाल करके धोखाधड़ी से रजिस्ट्रेशन हासिल करते थे।

Delhi Crime Branch team busted a car theft gang and arrested several accused
दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा को मिली बड़ी कामयाबी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने गाडियां चुराने वाले और वाहनों के चेसिस नंबर से छेड़छाड़ करके बेचने वाले गिरोह का खुलासा करते हुए 10 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनके नाम हेमराज सिंह, दमनदीप सिंह, अरविंद शर्मा, अमनदीप, सुभाष चंद, मनबीर, कंवरजीत, बृज मोहन कपूर, तिफ्ले नौखेज और प्रदीप सिंह हैं। इस अंतरराज्यीय गिरोह से कुल 31 चोरी की महंगी गाड़ियां बरामद की गई हैं। इस गिरोह ने अब तक 1000 से ज्यादा गाड़िया चुराने और उन्हें दस्तावेजों में हेरफेर करके बेचने की बात कबूली है।

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अपराध शाखा के पुलिस उपायुक्त आदित्य गौतम ने बताया कि पीतमपुरा निवासी एक व्यवसायी ने पांच अगस्त, 2025 को अपनी हुंडई क्रेटा कार चोरी होने की शिकायत दर्ज कराई थी। मामले की जांच पांच सितंबर, 2025 को अपराध शाखा को सौंपी गई। जांच में पता चला कि अंतरराज्यीय आपराधिक गिरोह महंगी गाड़ियां चुराने और चोरी की गई तथा लोन पर ली गई गाड़ियों को हासिल करने के काम में लिप्त था। गिरोह के सदस्य चेसिस नंबरों से छेड़छाड़ करते थे। जाली बिक्री पत्रों (फॉर्म-21), मनगढ़ंत दस्तावेजों और नकली बैंक अनापत्ति प्रमाण पत्र का इस्तेमाल करके धोखाधड़ी से रजिस्ट्रेशन हासिल करते थे।
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आरोप है कि वे यह सब ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी के कुछ एजेंटों और अधिकारियों की मिलीभगत से करते थे। बाद में इन गाड़ियों को ऐसे खरीदारों को बेच दिया जाता था जिन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं होती थी। इसके बाद शाखा में इसकी दूसरी प्राथमिकी दर्ज की गई। इंस्पेक्टर मनमीत मलिक की टीम ने दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, पंजाब और हिमाचल प्रदेश में कई राज्यों में जांच की। जांच के बाद 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।

गिरफ्तार किए गए आरोपी

1. दमनदीप सिंह: जालंधर, पंजाब निवासी दमनदीप सिंह (42) जालंधर, पंजाब में पुरानी कारों की डीलरशिप का एक आउटलेट चलाता था। ये इस अंतर-राज्यीय आपराधिक गिरोह का सरगना (मास्टरमाइंड) है। इस गिरोह में वाहन चोरी, पहचान चिह्नों के साथ जालसाजी और छेड़छाड़, तथा चोरी के वाहनों को जाली दस्तावेजों के आधार पर असली बताकर दोबारा पंजीकृत करवाकर बेचना शामिल है।

2. अरविंद शर्मा: चंडीगढ़, पंजाब निवासी अरविंद शर्मा (38) पंजाब से बीटेक स्नातक है और पहले लुधियाना में एक सॉफ्टवेयर कंपनी में काम करता था। वर्ष 2019 से, वह चंडीगढ़ अथॉरिटी के बाहर एक एजेंट के रूप में काम कर रहा था। वह ग्राहकों के लिए वाहन पंजीकरण की फाइलें तैयार करता और जमा करता है। प्रति पंजीकरण कमीशन के तौर पर 20,000–30,000 रुपये कमाता था।

3. अमनदीप: पीतमपुरा, दिल्ली निवासी अमनदीप (39) कीर्ति नगर में फर्नीचर की एक दुकान चलाता था। अमनदीप इस गिरोह के लिए बिचौलिए और फील्ड ऑपरेटिव (मैदानी कार्यकर्ता) के रूप में काम करता था।

4. सुभाष चंद: बिलासपुरी, हिमाचल प्रदेश निवासी सुभाष चंद (40) बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश में ''''पंजीकरण एवं लाइसेंसिंग प्राधिकरण'''' में क्लर्क के पद पर कार्यरत है। उसने दलालों के साथ मिलीभगत करके, जाली दस्तावेजों के आधार पर 350 से अधिक चोरी के वाहनों/ऋण-डिफॉल्ट (लोन न चुकाए गए) वाहनों का पंजीकरण किया।

5. मनबीर: अमृतसर, पंजाब निवासी मनबीर सिंह उर्फ मिंटा (32) गाड़ी चोरों से चोरी की गाड़ियां लेता था और उन्हें दमनदीप सिंह और दूसरों को बेच देता था। कुछ गाड़ियां वह सीधे उन खरीदारों को बेच देता था जिन्हें चोरी का शक नहीं होता था।

6. कंवरजीत: जालंधर, पंजाब निवासी कंवरजीत उर्फ जॉली (45) पुरानी (सेकंड-हैंड) गाड़ियां खरीदने और बेचने का काम करता था।

7. बृज मोहन कपूर: अमृतसर, पंजाब निवासी बृज मोहन कपूर उर्फ बॉबी (40) पुरानी (सेकंड-हैंड) गाड़ियां खरीदने और बेचने का काम करता था।

8. प्रदीप सिंह: फरीदाबाद, हरियाणा निवासी प्रदीप सिंह उर्फ हीरा (42) के पिता की बदरपुर, दिल्ली में इंजन मैकेनिक की दुकान थी। शुरू से ही उसने अपने पिता के साथ मैकेनिक के तौर पर काम करना शुरू कर दिया था। मैकेनिक का काम सीखने के बाद, उसने फरीदाबाद में अपनी खुद की मैकेनिक की दुकान खोली, जहाँ उसने धीरे-धीरे चेसिस नंबर पंच करना सीख लिया।

9. तिफ़्ले नौखेज: न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी निवासी तिफ़्ले नौखेज़ (43) एक नार्को सिंडिकेट का सदस्य है और नशीले पदार्थों की तस्करी में मदद करने के लिए गैर-कानूनी तरीके से हासिल की गई गाड़ियों को खरीदने और इस्तेमाल करने में सक्रिय रूप से शामिल था।

10. हेमराज सिंह: संगरूर, पंजाब निवासी हेमराज सिंह उर्फ हेमा (43) आरोपी हेमराज सिंह चोरी की गाड़ियां खरीदने वाला एक कुख्यात व्यक्ति है और अंतर-राज्यीय गाड़ी चोरी करने वाले सिंडिकेट की एक अहम कड़ी है। वह चोरी की और लोन पर ली गई, लेकिन लोन न चुकाई गई गाड़ियां लेता था और प्रदीप सिंह उर्फ हीरा के साथ मिलकर साजिश रचता था, ताकि गाड़ियों की पहचान छिपाने के लिए उनके चेसिस और इंजन नंबरों से छेड़छाड़ की जा सके। इसके बाद वह जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल करके बिलासपुर (हिमाचल प्रदेश) में उन गाड़ियों का फर्जी तरीके से दोबारा रजिस्ट्रेशन करवाता था और उन्हें पंजाब और हिमाचल प्रदेश में भारी गैर-कानूनी मुनाफे पर बेच देता था। चोरी की गाड़ियों को देखने में वैध लगने वाली संपत्ति में बदलने और इस रैकेट को चलाने में उसकी भूमिका बहुत अहम थी।

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