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Delhi Fire: बेटा गया था उज्जैन, माता-पिता और बड़े भाई की आग में हुई मौत, मां को बचाने में गई शिखा जैन की जान

अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: Sharukh Khan Updated Mon, 04 May 2026 02:59 PM IST
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सार

दिल्ली अग्निकांड में मारे गए चौथी मंजिल स्थित फ्लैट में रहने वाले नितिन जैन का छोटा बेटा उज्जैन गया था। इसलिए उसकी जान बच गई। बुजुर्ग मां को बचाने के चक्कर में शिखा जैन की जान चली गई। आग लगने के समय दूसरी मंजिल स्थित फ्लैट में बुजुर्ग माता-पिता समेत कुल आठ लोग मौजूद थे। शिखा ने दो नौकरानियों और माता-पिता को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, बच्चियों ने कूदकर जान बचाई थी।

Delhi Fire Son had gone to Ujjain parent and brother perish in fire Shikha die while trying to save her mother
Delhi Fire - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

दिल्ली के विवेक विहार अग्निकांड में इमारत की पीछे की ओर चौथी मंजिल स्थित फ्लैट में रहने वाले नितिन जैन, उनकी पत्नी शैली जैन और बड़े बेटे सम्यक जैन की मौत हो गई। मोर्चरी में मौजूद नितिन के भाई अंकित ने रोते हुए बताया कि शनिवार भाई से आखिरी बार बात हुई थी। इसके बाद सुबह उनको हादसे का पता चला।
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खबर मिलते ही वह भागे-भागे विवेक विहार पहुंचे। यहां पहुंचने पर उन्होंने देखा कि भाई की इमारत में आग लगी थी। आग से उनके भाई का फ्लैट भी जल चुका था। बाद में उनको भाई, भाभी और भतीजे की मौत का पता चला। वहीं नितिन का छोटा बेटा प्रसुख जैन शनिवार को ही महाकाल के दर्शन के लिए उज्जैन गया था। हादसे की सूचना मिलने के बाद वह फ्लाइट से दिल्ली लौट आया।
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नितिन के एक परिजन ने बताया कि पूरे परिवार को ही महाकाल के दर्शन के लिए उज्जैन जाना था, लेकिन कुछ जरूरी काम की वजह से वह नहीं जा पाए। प्रसुख ने अकेले ही उज्जैन जाने की जिद की, जिसके बाद उसे भेज दिया गया। दोपहर को वह वापस लौट आया। 

 

शाम के समय पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों के हवाले कर दिए गए।एक परिजन ने बताया कि नितिन जैन का क्रॉस रीवर मॉल में इंडस वैली के नाम से एक रेस्टोरेंट है। इसके अलावा उनका अपना गत्ते का भी कारोबार था। दोनों बेटे अपने पिता के साथ ही काम करते थे। 
 

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शिखा जैन की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
बुजुर्ग मां को बचाने के चक्कर में चली गई शिखा जैन की जान
तड़के पौने चार बजे इमारत के सभी लोग गहरी नींद में थे तभी शिखा की आंख खुली तो उन्होंने देखा कि घर में धमाका हुआ है और आग लग गई है। उन्होंने फौरन एक-एक कर घर के सभी लोगों को जगाया। इस बीच उन्होंने घर में मौजूद दोनों नौकरानियों को बाहर निकलने के लिए कहा। शिखा ने ही घर का दरवाजा खोला।
 

शिखा ने चिल्लाकर बिल्डिंग के लोगों को जगाने का भी प्रयास किया, लेकिन सभी गहरी नींद में थे जिसकी वजह से कोई जगा नहीं। इस बीच शिखा की दोनों नौकरानियां बाहर निकल गईं। पति नवीन के साथ मिलकर अपने बुजुर्ग पिता अरुण जैन को शिखा ने सीढ़ियों से नीचे उतार दिया। 

 

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विवेक विहार में चार मंजिला इमारत में लगी आग - फोटो : अमर उजाला
इस बीच आग ने फ्लैट के बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया। नवीन भागे-भागे पड़ोसियों के पास पहुंचे। वहां से गद्दे ले आए। उन्हें लगा कि शायद गद्दे कुछ काम आएंगे। शिखा की मां अंदर ही मौजूद थीं। शिखा उनको बचाने में लगी रहीं। नवीन ऊपर पहुंचे और इमारत की साइड में लगे खिड़की के कांच को तोड़ दिया। 

नवीन ने नीचे गद्दे पहले ही डाले हुए थे। दोनों बेटियों रक्षता और प्रियल को उन्होंने दूसरी मंजिल से नीचे कूदने के लिए कहा। दूसरी ओर शिखा ने किसी तरह आग की लपटों के बीच बीमार मां को बाहर निकाला लेकिन खुद अंदर फंस गई। नवीन झुलसने के बाद भी किसी तरह फ्लैट से निकलने में कामयाब हो गए। 
 

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इसी इमारत में एसी फटने से लगी थी आग - फोटो : पीटीआई
इस बीच मदद को आए लोगों ने शिखा की मां दर्शना जैन को बाहर सुरक्षित निकाल लिया। बाद में नवीन को भी सुरक्षित स्थान पर ले आया गया। शिखा फ्लैट में अचेत होकर गिर गईं। बाद में उनका झुलासा हुआ शव बरामद हुआ। 

 

पति नवीन की हालत नाजुक बनी हुई है। एक अन्य परिजन सुरेश ने बताया कि मूलरूप से होडल हरियाणा के रहने वाले नवीन का सदर बाजार इलाके में गत्ते का बड़ा कारोबार है। नवीन की छोटी बेटी प्रियल 10वीं कक्षा की छात्रा है। बड़ी बेटी रक्षता नोएडा के एक कॉलेज से बीबीए कर रही है। हादसे में नवीन, रक्षता, प्रियल जख्मी हैं। इनका इलाज जारी है।

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दिल्ली अग्निकांड में मारे गए लोगों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए लेकर जाते हुए - फोटो : पीटीआई
अस्पताल की मोर्चरी के बाहर मची थी चीख-पुकार
मृतकों के शव पोस्टमार्टम के लिए जब जीटीबी अस्पताल की मोर्चरी लाए गए तो यहां पहुंचे परिजन और जान-पहचान वाले चित्कार उठे। दोस्त-रिश्तेदार फफक-फफक कर रो रहे थे। दोपहर 12 बजकर 12 मिनट पर जैसे ही पहले दो शव पोस्टमार्टम के लिए स्ट्रेचर पर मोर्चरी के लिए लाए गए तो गम से मायूस चेहरे और आंखों में भरा दुख आंसुओं के जरिये छलक पड़ा।

 

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आग में मारे गए लोगों की डेड बॉडी जीटीबी अस्पताल के शवगृह में पोस्टमार्टम के लिए ले जाते हुए - फोटो : अमर उजाला
शवों के जल जाने की वजह से शव बैग भी कहीं- कहीं से हल्के काले रहे थे दिख
शव जली अवस्था में होने की वजह से बॉडी रखने वाले बैग सफेद से कई जगह काले हो गए। हादसे में जान गंवाने वाले लोगों को लेकर परिजन चर्चा कर रहे थे। हर कोई यही कह रहा था कि काश अरविंद जैन का पूरा परिवार भी पोते का जन्मदिन मनाने के लिए मानेसर चला जाता तो आज सभी जीवित होते। अरविंद जैन के परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों का रो-रोकर बुरा हाल था।

 

हादसे में जान गंवाने वाली अनीता जैन के बुआ के बेट संजय जैन ने बताया कि उन्होंने हादसे में जीजा अरविंद सहित परिवार के पांच सदस्यों को खो दिया है। अशोक विहार से अस्पताल पहुंचे आंचल के भाई विक्रांत जैन कुछ बोलने की स्थिति में नहीं थे। परिजनों ने किसी तरह उन्हें संभाला तो फफक पड़े कि परिवार की इकलौती बेटी थी। अब मुझे राखी कौन बांधेगा। निशांक के चचेरे भाई सचिन ने बताया कि वह विवेक विहार फेज-2 में रहते है। हादसे की सूचना मिलने पर तुरंत दौड़े चले आए लेकिन सब कुछ उजड़ गया है।

 

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विलाप करते हुए दिल्ली अग्निकांड में मारे गए लोगों के परिजन - फोटो : पीटीआई
नेता भी सांत्वना देने के लिए पहुंचे अस्पताल
हादसे में जान गंवाने वाले परिवार के सदस्यों को सांत्वना देने के लिए अलग-अलग राजनैतिक दलों के नेता भी अस्पताल में पहुंचे। केंद्रीय राज्यमंत्री और पूर्वी दिल्ली से सांसद हर्ष मल्होत्रा ने अस्पताल पहुंचकर घायलों का हाल जाना और घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। इसमें आम आदमी पार्टी के विधायक कुलदीप कुमार और संजीव झा अस्पताल पहुंचकर हादसे को दुखद बताया।
 
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