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हाईकोर्ट ने कहा: छोटे प्रतिष्ठानों को संचालन के पैमाने पर प्रदूषण की छूट नहीं दी जा सकती, दोषसिद्धि बरकरार

अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 06 Feb 2026 04:52 AM IST
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सार

अदालत ने कहा कि छोटे प्रतिष्ठानों को केवल उनके आकार या संचालन के पैमाने के आधार पर इस अपराध से मुक्त नहीं किया जा सकता।

Delhi High Court said small establishments cannot be given exemption from pollution on scale of operations
demo - फोटो : ANI
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विस्तार

दिल्ली हाईकोर्ट ने मिठाई की दुकान के मालिक की दोषसिद्धि को बरकरार रखा है, जिसमें उन्होंने बिना किसी उपचार के फर्श और बर्तनों/कंटेनरों की सफाई से उत्पन्न अपशिष्ट जल (एफ्लुएंट) को सार्वजनिक सीवर में छोड़ दिया था। अदालत ने कहा कि छोटे प्रतिष्ठानों को केवल उनके आकार या संचालन के पैमाने के आधार पर इस अपराध से मुक्त नहीं किया जा सकता।

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न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने अपने फैसले में कहा कि जल निकायों को प्रदूषित करने के गंभीर और लंबे समय तक रहने वाले परिणाम होते हैं। छोटे ढाबे, रेस्तरां और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां मिलकर बिना उपचारित एफ्लुएंट को सार्वजनिक सीवर और नालों में छोड़कर नदियों को काफी हद तक प्रदूषित करती हैं।
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अदालत ने कहा कि पर्यावरणीय मानदंडों का पालन सभी की साझा जिम्मेदारी है। छोटे पैमाने के कारोबारियों को भी प्रदूषण रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने होंगे, क्योंकि सामूहिक रूप से उनका योगदान पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है।

यह मामला चांदनी चौक स्थित एक मिठाई और नमकीन निर्माण इकाई से जुड़ा है, जहां दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) ने निरीक्षण के दौरान पाया कि कोई उपचार सुविधा नहीं थी और अपशिष्ट सीधे सार्वजनिक सीवर में डाला जा रहा था। ट्रायल कोर्ट ने 2017 में मालिक राज कुमार गुप्ता को दोषी ठहराया था और सजा सुनाई थी। 

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