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Delhi: महज 11 साल में जवाब दे गया नत्थू कॉलोनी फ्लाईओवर, जांच में पाया गया खतरनाक; अब टूटेगा... फिर बनेगा

अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 19 Jan 2026 02:29 AM IST
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सार

इसकी सुरक्षा को लेकर कराई गई जांच में बड़े वाहनों के लिए यह फ्लाईओवर खतरनाक पाया गया है।

Delhi: Nathu Colony flyover fails in just 11 years, inspection finds it dangerous
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : AI
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विस्तार
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पूर्वी दिल्ली के शाहदरा इलाके में बना नत्थू कॉलोनी फ्लाईओवर को तोड़कर फिर से बनाया जाएगा। इसकी सुरक्षा को लेकर कराई गई जांच में बड़े वाहनों के लिए यह फ्लाईओवर खतरनाक पाया गया है। जिसके चलते पिलर और गार्डर छोड़कर अन्य सभी काम फिर से होगा। फ्लाईओवर के दोनों केरिज-वे तोड़कर फिर से बनाए जाएंगे। 125 करोड़ की लागत से अंडरपास सहित बने इस फ्लाईओवर पर साढ़े सात साल पहले ट्रैफिक शुरू हुआ था। ट्रैफिक शुरू होने के छह माह बाद ही इसके स्लैब गिरने लगे थे। जिसके बाद इसके ऊपर बड़े वाहनों के गुजरने पर प्रतिबंध लग गया था।

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यह फ्लाईओवर जिस उद्देश्य से बना था कि पूर्वी दिल्ली और गाजियाबाद के बीच भारी मालवाहक ट्रैफिक को सुगम बनाना वह लक्ष्य पिछले करीब सात साल से अधूरा है। 2019 से ही भारी वाहनों पर पाबंदी है, जिससे रोजाना हजारों वाहन वैकल्पिक रास्तों पर धकेले जा रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि फ्लाईओवर के निर्माण में प्रयुक्त सामग्री की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठे हैं। लोड टेस्ट और सतर्कता (विजिलेंस) जांच में सामने आया कि ढांचा भारी भार सहने में सक्षम नहीं है। 
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जगह-जगह दरारें और गड्ढे इसकी उम्र और मजबूती पर प्रश्नचिह्न लगाते हैं। फ्लाईओवर का निर्माण 2015 में दिल्ली सरकार के पर्यटन विभाग ने कराया था, जबकि 2016 में इसके रखरखाव की जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की सौंपी गई थी। 2018 में दरारें दिखीं और 2019 में भारी वाहनों पर रोक लगा दी गई। मई 2025 में नेताजी सुभाष प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एनएसयूटी) से लोड टेस्ट कराया गया। सितंबर में रिपोर्ट सौंपी गई, जिसे एक निजी कंसल्टेंट के जरिए परखा गया।

डेक स्लैब पैनल बनाने की सिफारिश...
बताया जा रहा है कि फ्लाईओवर के डेक स्लैब पैनल को लेकर सलाह दी गई है। फ्लाईओवर के पूरे प्रीकास्ट डेक सिस्टम को हटा दिया जाए और उसकी जगह कास्ट-इन-सीटू रीइन्फोर्स्ड कंक्रीट डेक स्लैब बनाए जाएं। इस तकनीक से मौके पर ही स्लैब बनाते हुए आगे बढ़ा जाता है। माना जा रहा है कि इस फ्लाईओवर को तोड़ने में एक से डेढ़ साल और इसे फिर से बनाने में भी एक से डेढ़ साल का समय लग सकता है।

किसी पर नहीं हुई कार्रवाई...
स्थानीय विधायक जितेंद्र महाजन का कहना है कि पिछले सात साल से बड़े वाहनों का फ्लाईओवर पर प्रतिबंध है और अब इसे फिर से बनाने पर तीन साल का समय लगेगा। इसे बनाने में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार हुआ है लेकिन आज तक न तो बनाने वाली कंपनी और न ही किसी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई हुई है। उन्होंने इसे लेकर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को पत्र भी लिखा है।

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