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Noida: सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत के मामले में जेई बर्खास्त, बिल्डरों पर केस... संबंधित अधिकारियों को नोटिस
अमर उजाला नेटवर्क, नोएडा
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 18 Jan 2026 11:57 PM IST
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सार
क्षेत्र के जूनियर इंजीनियर नवीन कुमार की सेवाएं तत्काल समाप्त करने के आदेश जारी किए हैं।
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सेक्टर-150 टी प्वाइंट के पास मॉल के बेसमेंट के गड्ढे में कार समेत डूबे सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में एक जूनियर इंजीनियर को बर्खास्त कर दिया गया। वहीं, दो बिल्डरों के खिलाफ नॉलेज पार्क कोतवाली में एफआईआर दर्ज की गई है। युवराज के पिता की शिकायत के आधार पर रविवार को बिल्डर कंपनियों एमजेड विशटाउन और लोटस ग्रीन पर गैरइरादतन हत्या और लापरवाही का केस दर्ज किया गया।
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नोएडा प्राधिकरण के सीईओ डॉ. लोकेश एम ने सड़क पर ब्लिंकर व संकेतक नहीं होने पर क्षेत्र के जेई नवीन कुमार को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त करने के साथ ही, वरिष्ठ प्रबंधक व प्रबंधक को कारण बताओ नोटिस जारी किया। गौतमबुद्धनगर के अपर पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) डॉ. राजीव नारायण मिश्र ने बताया कि पीड़ित परिवार की तहरीर पर प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की गई है।
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युवराज के पिता ने अपनी शिकायत में कहा कि जिस जगह हादसा हुआ, वहां पहले भी कोहरे में एक ट्रक फंस चुका था, पर इससे कोई सबक नहीं लिया गया। बता दें कि शुक्रवार रात युवराज की कार नाले की दीवार तोड़कर पानी से भरे बेसमेंट में गिर गई थी। युवराज ने इसकी जानकारी घरवालों को दी, जिनकी सूचना पर पुलिस के साथ बचाव टीमें मौके पर पहुंचीं। हालांकि जरूरी बचाव उपकरण न होने से युवराज को पानी से निकाला नहीं जा सका और उसकी मौत हो गई।
नामजद बिल्डरों के भूखंड आवंटन की शुरू हुई जांच
नोएडा प्राधिकरण ने नामजद बिल्डरों के भूखंड आवंटन से लेकर नक्शा पास होने तक की जांच शुरू कर दी है। साथ ही, मौके पर खोदाई कराए जाने और सड़क से सुरक्षा इंतजाम नदारद होने की भी जांच की जा रही है। इसके लिए प्राधिकरण के महाप्रबंधक के नेतृृत्व में समिति का गठन किया गया है।
प्राधिकरण के डिफाल्टर हैं नामजद दोनों बिल्डर, 3000 करोड़ रुपये से ज्यादा है बकाया
जिन दो बिल्डर विजटाउन व लोटस ग्रीन बिल्डर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है दोनों बकाया जमा करने में नोएडा प्राधिकरण के डिफाल्टर हैं। प्राधिकरण अधिकारियों का कहना है कि इनको पूर्व में दोनों को कई बार नोटिस जारी किए जा चुके हैं। इसके बावजूद दोनों बिल्डरों ने पैसे जमा नहीं किए। यह जमीन स्पोर्ट्स सिटी के प्लॉट नंबर-2 की है। इस प्लॉट का आवंटन 7 जुलाई 2014 को लोटस ग्रीन को लीड मेंबर की अगुवाई में बने समूह को हुआ था।
इस प्लॉट पर प्राधिकरण का 3000 करोड़ रुपये से ज्यादा का बकाया है। प्लॉट में 24 उप-विभाजन किए गए, 13 ग्रुप हाउसिंग के नक्शे पास हुए। इसमें ही एक प्लॉट ए ब्लॉक में विजटाउन कंपनी को 27185 वर्गमीटर का दिया गया। इस पर प्राधिकरण का मार्च 2025 तक 129 करोड़ 59 लाख रुपये बकाया था। बीते 5 और 12 मार्च को नोटिस भी जारी किया गया था। लेकिन बकाया नहीं जमा हुआ है। न ही सेक्टर में खेल सुविधाओं का विकास हुआ है।
सीबीआई कर रही है जांच, अब पुलिस की स्पोर्ट्स सिटी में एंट्री
नोएडा प्राधिकरण की स्पोर्ट्स सिटी परियोजना सीएजी की ऑडिट आपत्तियों से घिरी हुई है। प्राधिकरण अधिकारियों पर बिल्डरों को फायदा पहुंचाने और 8643 करोड़ रुपये का घाटा उठाने और मौके पर खेल सुविधाएं नहीं विकसित कराने की गंभीर आपत्तियां ऑडिट में सामने आई थीं। इसके बाद फरवरी 2025 में हाईकोर्ट ने सीबीआई और ईडी जांच का आदेश दिया था। इस आदेश के क्रम में सीबीआई स्पोर्ट्स सिटी के प्लॉट नंबर-2 की जांच कर रही है। इस प्लॉट से जुड़ी फाइलें सीबीआई प्राधिकरण से लेकर जा चुकी हैं। मौके का ड्रोन सर्वे भी करवाया जा चुका है।
अब पुलिस भी प्लॉट व उसके नक्शे से जुड़ी जानकारियां प्राधिकरण से हासिल करेगी। प्राधिकरण ने स्पोर्ट्स सिटी के प्लॉट नंबर-2 से ओसी-सीसी के आवेदन पर लगी रोक शर्तों के साथ हटाकर समाधान के लिए मंजूरी 3 जनवरी को बोर्ड बैठक में ली थी। इसके बाद शुक्रवार को ही मंजूरी के मिनट जारी हुए। इसी रात यह बड़ा हादसा हुआ। इसके बाद केस दर्ज हुआ।