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Cyber Crime: रूस में पढ़ाई करके बना साइबर एक्सपर्ट, नोएडा आकर करने लगा ठगी; गृह मंत्रालय के इनपुट पर गिरफ्तार
अमर उजाला नेटवर्क, नोएडा
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 19 Jan 2026 05:37 AM IST
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सार
पुलिस का दावा है कि आरोपी रूस में साइबर एक्सपर्ट की पढ़ाई करने के बाद यहां सेंटर चला रहा था। वह पहले रूस में सट्टेबाजी एप के नेटवर्क से जुड़ा रहा।
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
नोएडा पुलिस ने गृह मंत्रालय के इनपुट पर सेक्टर-एक में ऑनलाइन सट्टेबाजी और ठगी के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़ा कॉल सेंटर पकड़ा है। कॉल सेंटर संचालक नेपाल के जिला मोरंग के उर्लावरी थाना क्षेत्र के मोरंग मोहल्ला निवासी अनूप श्रेष्ठ (31) को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस का दावा है कि आरोपी रूस में साइबर एक्सपर्ट की पढ़ाई करने के बाद यहां सेंटर चला रहा था। वह पहले रूस में सट्टेबाजी एप के नेटवर्क से जुड़ा रहा। कॉल सेंटर में ठगी और सट्टेबाजी भारत में प्रतिबंधित वन एक्सबेट ऑनलाइन बेटिंग ऐप पर लोगों से पैसे लगवाकर ठगी की जा रही थी।
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कुछ दिन पहले श्रीनगर में ठगी का मामला दर्ज हुआ था। श्रीनगर व अंतरराष्ट्रीय कड़ी जुड़ने के बाद जांच एजेंसियां भी इस कॉल सेंटर को लेकर सक्रिय हो गईं। नोएडा पुलिस से कई बिंदुओं पर जानकारी ली गई है। पुलिस इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (आईफोरसी) के संपर्क में भी है। इस नेटवर्क से करोड़ों की ठगी का अनुमान है। एजेंसियों की नजर मौके से मिले सर्वर सिस्टम पर है।
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एडीसीपी नोएडा शैव्या गोयल ने बताया कि गृह मंत्रालय से सूचना मिली थी कि नोएडा के सेक्टर-1 स्थित कंपनी के दफ्तर में अवैध रूप से ऑनलाइन बेटिंग एप का कॉल सेंटर चलाया जा रहा है। इस पर पुलिस ने जांच शुरू की तो सामने आया कि सेक्टर एक स्थित कंपनी के दूसरे तल पर कॉल सेंटर कर्मचारी लोगों को ऑनलाइन बेटिंग के लिए प्रेरित कर रहे हैं। इसके बाद पुलिस ने छापा मारकर मुख्य आरोपी अनूप को पकड़ा। वह यहां सेक्टर-94 स्थित सुपरनोवा सोसाइटी में रहता था।
ऐसे बना साइबर एक्सपर्टर
फेज-1 थाना के प्रभारी अमित मान ने बताया कि पूछताछ में सामने आया है कि अनूप ने नेपाल से स्नातक तक पढ़ाई की। उसके बाद 2022 में रूस गया और वहां वन एक्सबेट कंपनी के कॉल सेंटर में नौकरी की। इसके साथ ही साइबर एक्सपर्ट की पढ़ाई भी की। करीब ढाई साल तक वहां काम किया। साथ ही नवंबर 2022 से जून 2025 तक ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्क को नजदीक से समझा और संचालित किया। बाद में कंपनी की एक रूसी अधिकारी के कहने पर उसे भारत भेज दिया गया। यहां आने बाद आरोपी को रेडी ऐप के जरिये निर्देश दिए जाते थे और दिल्ली में कंपनी का डायरेक्टर बताकर उससे काम कराया जाता था। नोएडा में कॉल सेंटर का संचालन किया जा रहा था। आरोपी और कंपनी मालिकों द्वारा इस्तेमाल किए गए बैंक खातों की जानकारी जुटाई जा रही है।
म्यूल अकाउंट में जमा कराते थे रकम
पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी और उसके साथी भारत में प्रतिबंधित बेटिंग एप को तकनीकी सहायता देने के नाम पर चला रहे थे। देश के लोगों को फोन कर या ऑनलाइन संपर्क कर ऑनलाइन जुए में पैसा लगाने के लिए उकसाते थे। ग्राहकों से कहा जाता था कि वे वेबसाइट पर दिखाए गए बैंक खातों में पैसे जमा करें। ये खाते असल में म्यूल होते थे जिनका इस्तेमाल ठगी और धन शोधन के लिए किया जाता था।
पैसा एक खाते से दूसरे खाते में घुमाकर अंत में आरोपी और उसके नेटवर्क के खातों में पहुंचाया जाता था। इसके साथ ही तकनीकी सहायता के नाम पर भी पैसा ट्रांसफर करवाया जाता था। बड़ा सट्टा लगाने पर रकम ठग ली जाती थी। वहीं हार-जीत पर भी इनका प्रतिशत तय था। यह एप भारत में पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके बावजूद थर्ड पार्टी एपीके फाइल के जरिये इसे डाउनलोड कर लोगों से जुआ खिलाया जा रहा था।