दिल्ली पर जहरीली हवा का अटैक: उखड़ रही सांसें..गैस चैंबर बनी राजधानी, AQI 400 पार; क्यों घुल रहा फिजा में जहर?
लगातार बनी हुई गंभीर वायु गुणवत्ता का मुख्य कारण मौसम का मिजाज है। ऐसे में तापमान में कमी के कारण प्रदूषण के स्तर में भारी वृद्धि हुई है और पश्चिमी विक्षोभ के चलते वायु गुणवत्ता जो नीचे फंसी हुई ठंडी हवा को ऊपर उठने नहीं देती है। इसी ठंडी हवा में गाड़ियों का धुआं और निर्माण की धूल जैसे प्रदूषक जमा हो जाते हैं।
विस्तार
राजधानी में पारा गिरने और खराब मौसम की स्थिति ने दिल्ली को गैस चैंबर बना दिया है। राजधानी में लगातार चार दिन से हवा बेहद खराब श्रेणी में बरकरार थी, लेकिन रविवार को फिजा गंभीर श्रेणी में पहुंच गई। सुबह की शुरुआत धुंध और कोहरे की मोटी परत से हुई। वहीं, पूरे दिन आसमान में स्मॉग की मोटी चादर भी दिखाई दी। इसके चलते कई इलाकों में दृश्यता बेहद कम रही। यही नहीं, सांस के मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। साथ ही, लोगों को आंखों में जलन जैसी समस्या हुई। यही नहीं, सड़कों पर लोग मास्क पहने हुए दिखे। ऐसे में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 440 दर्ज किया गया। यह हवा की गंभीर श्रेणी है। इसमें शनिवार की तुलना में 40 सूचकांक की वृद्धि दर्ज की गई।
NCR में गाजियाबाद सबसे प्रदूषित
दूसरी ओर, एनसीआर में गाजियाबाद की हवा सबसे अधिक प्रदूषित रही। यहां एक्यूआई 458 दर्ज किया गया, यह हवा की गंभीर श्रेणी है। वहीं, नोएडा में 430, गुरुग्राम में 378 और ग्रेटर नोएडा में 402 एक्यूआई दर्ज किया गया। इसके अलावा, फरीदाबाद की हवा सबसे साफ रही। यहां सूचकांक 247 दर्ज किया गया। यह हवा की मध्यम श्रेणी है। इसके अलावा, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने शनिवार देर रात को दिल्ली-एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (ग्रेप)-4 की पाबंदियां लागू कर दी हैं। ऐसे में राजधानी में अब ग्रेप के सारे चरण लागू हैं। इन चरण के तहत प्रदूषण को कम करने के लिए 5-पॉइंट एक्शन प्लान को सख्ती से लागू किया जाएगा।
तय मानक से लगभग चार गुना अधिक पीएम2.5 और पीएम10
दिल्ली में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए निर्णय सहायता प्रणाली के अनुसार, वाहन से होने वाला प्रदूषण 12.46 फीसदी रहा। इसके अलावा पेरिफेरल उद्योग से 7.81, आवासीय इलाकों से 3.30, निर्माण गतिविधियों से 1.50 और कूड़ा जलाने की 1.22 फीसदी की भागीदारी रही। सीपीसीबी के अनुसार, शनिवार को हवा पूर्व दिशा से 5 किलोमीटर प्रतिघंटे के गति से चली। वहीं, अनुमानित अधिकतम मिश्रण गहराई 850 मीटर रही। इसके अलावा, वेंटिलेशन इंडेक्स 1500 मीटर प्रति वर्ग सेकंड रहा। दूसरी ओर, दोपहर तीन बजे हवा में पीएम10 की मात्रा 431.3 और पीएम2.5 की मात्रा 282.2 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज की गई। वहीं, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) का पूर्वानुमान है कि सोमवार को हवा बेहद खराब श्रेणी में पहुंचने की आशंका है। इससे लोगों को फोरी राहत मिल सकती है।
क्यों बिगड़ती जा रही दिल्ली की हवा?
विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार बनी हुई गंभीर वायु गुणवत्ता का मुख्य कारण मौसम का मिजाज है। ऐसे में तापमान में कमी के कारण प्रदूषण के स्तर में भारी वृद्धि हुई है और पश्चिमी विक्षोभ के चलते वायु गुणवत्ता जो नीचे फंसी हुई ठंडी हवा को ऊपर उठने नहीं देती है। इसी ठंडी हवा में गाड़ियों का धुआं और निर्माण की धूल जैसे प्रदूषक जमा हो जाते हैं। प्रदूषकों को ऊपर जाने का रास्ता नहीं मिलता, इसलिए वे जमीन के बहुत करीब फंसे रहते हैं। साथ ही, जब बारिश नहीं होती और हवा भी धीरे चलती है, तो यह फंसा हुआ प्रदूषण बाहर नहीं निकल पाता, जिससे स्थिति कई गुना खराब हो जाती है।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक?
यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है। 101-200 का मतलब वायु प्रदूषण का स्तर मध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब और 301 से 400 के बीच का अर्थ वायु गुणवत्ता की बेहद खराब श्रेणी को दर्शाता है। 401 से 500 की श्रेणी में वायु की गुणवत्ता गंभीर बन जाती है। ऐसी स्थिति में इंसान की सेहत को नुकसान पहुंचता है। पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए यह जानलेवा है।
इन इलाकों में सबसे अधिक रहा प्रदूषण
-बवाना-483
-मुंडका-483
-रोहिणी-483
-अशोक विहार-481
-आनंद विहार-478
-वजीराबाद-475
-नेहरू नगर-473
-नॉर्थ कैंपस-473
-चांदनी चौक-472
-सोनिया विहार-472
-बुराड़ी क्रॉसिंग-470
-पडपड़गंज--470
-आरके पुरम-470
-जेएलएन स्टेडियम-469
-डीटीयू-468
-आईटीओ-466
वायु प्रदूषण से आंखों के संक्रमण और जलन का खतरा बढ़ा
वायु प्रदूषण न सिर्फ सांस और दिल की बीमारियों को बढ़ाता है, बल्कि इससे आंखों से जुड़ी समस्याओं का खतरा भी काफी बढ़ जाता है। खासकर सर्दियों में बढ़ने वाला स्मॉग आंखों में संक्रमण, जलन और सूखेपन की बड़ी वजह बन रहा है। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि इससे लोगों को बचाव करना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार, हवा में मौजूद बारीक कण पीएम2.5 आंखों के लिए सबसे अधिक नुकसानदेह हैं। ये कण गाड़ियों के धुएं, धूल, कचरा जलाने और पटाखों से निकलते हैं और इतने छोटे होते हैं कि आसानी से आंखों में चले जाते हैं। इससे आंखों की सामने की परत पर खरोंच, जलन और संक्रमण हो सकता है।
हाथों से आंखें रगड़ने से बचें
आरएमएल अस्पताल की ऑप्थल्मोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ. तारू दीवान ने बताया कि सर्दियों में स्मॉग लंबे समय तक बना रहता है, जिससे एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस और आंखों के सूखेपन के मामले बढ़ जाते हैं। उन्होंने गंदे हाथों से आंखें रगड़ने से बचने की सलाह दी, क्योंकि इससे संक्रमण का खतरा और बढ़ जाता है। नेत्र विशेषज्ञ डॉ. अजय शर्मा ने बताया कि सर्दियों में उनके पास लाल, खुजली वाली, पानी आने वाली और जलन वाली आंखों के मरीजों की संख्या बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि पीएम2.5 आंखों की प्राकृतिक सुरक्षा को कमजोर कर देता है, जिससे सूखापन, धुंधला दिखना और रोशनी से परेशानी होने लगती है। वहीं, डॉ. उमेश बरेजा के अनुसार, प्रदूषण की वजह से आंखों में लालिमा, जलन और पानी आने की समस्या आम हो गई है। लंबे समय तक स्क्रीन देखने वालों और कांटेक्ट लेंस पहनने वालों में यह दिक्कत अधिक देखी जा रही है। उन्होंने बताया कि धूम्रपान और पैसिव स्मोकिंग भी आंखों की सेहत के लिए नुकसानदायक हैं।
वायु प्रदूषण आंखों की बीमारियों का प्रमुख कारण
ऑल इंडिया ऑप्थल्मोलॉजिकल सोसाइटी के सदस्य डॉ. जेएस भल्ला ने बताया कि बाहर और घर के अंदर का वायु प्रदूषण, दोनों ही आंखों की बीमारियों का कारण बन सकते हैं। उन्होंने बताया कि पीएम2.5 का अधिक स्तर आंखों की गंभीर बीमारियों से भी जुड़ा हुआ है। डॉक्टरों के अनुसार, कुछ आसान सावधानियों से आंखों को सुरक्षित रखा जा सकता है। बाहर जाते समय चश्मा पहनें, घर लौटने के बाद आंखें और चेहरा साफ पानी से धोएं, आंखों को रगड़ने से बचें और अधिक प्रदूषण वाले दिनों में बाहर कम निकलें। अगर आंखों की परेशानी बनी रहे, तो तुरंत आंखों के डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। डॉक्टरों ने कहा कि प्रदूषण से पूरी तरह बचना मुश्किल है, लेकिन थोड़ी सावधानी अपनाकर आंखों को काफी हद तक सुरक्षित रखा जा सकता है।