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Delhi NCR News: एम्स में बुजुर्गों की सेहत और लंबी उम्र पर मंथन, विशेषज्ञों ने बताए बेहतर जीवन के उपाय
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बुजुर्गों की सेहत, मानसिक स्वास्थ्य और बेहतर जीवन पर मंथन
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के बायोफिजिक्स विभाग और नेशनल सेंटर फॉर एजिंग ने तीन दिवसीय लॉन्गेविटी कॉन्क्लेव का आयोजन किया है। मंगलवार को कॉन्क्लेव के दूसरे दिन देश-विदेश के विशेषज्ञ जुटे। उन्होंने बुजुर्गों की बढ़ती आबादी, उनकी सेहत और मानसिक स्वास्थ्य पर चर्चा की।
विशेषज्ञों ने न्यूरोलॉजिकल बीमारियों, डिमेंशिया और कैंसर पर विचार साझा किए। गिरने से बचाव, खान-पान और सामाजिक सुरक्षा जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। बुजुर्गों की देखभाल के तरीकों पर भी बात की गई। एनआईएचएफडब्ल्यू के सोशल साइंसेज विभाग के पूर्व प्रोफेसर और हेड एएम खान ने एक महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने बताया कि बुजुर्गों की देखभाल सिर्फ बीमारी के इलाज तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उनके शारीरिक, मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य का भी ध्यान रखना जरूरी है। यह कॉन्क्लेव एसोसिएशन ऑफ जेरोन्टोलॉजी (इंडिया) के 22वें द्विवार्षिक सम्मेलन का हिस्सा है। इसका विषय साइंस एंड आर्ट ऑफ लॉन्गेविटी है।
डिमेंशिया और मानसिक स्वास्थ्य पर जोर
कार्यक्रम में डिमेंशिया और उम्र बढ़ने के साथ होने वाली दिमागी बीमारियों पर विशेष ध्यान दिया गया। एम्स के न्यूरोलॉजी विभाग की विभागाध्यक्ष मंजरी त्रिपाठी ने याददाश्त कमजोर होने के कारणों पर चर्चा की। उन्होंने भारत में डिमेंशिया से प्रभावित बुजुर्गों की पहचान और बेहतर देखभाल की जरूरत बताई। मंजरी त्रिपाठी ने कहा कि बुजुर्गों के इलाज में उनकी जरूरतों और पसंद को ध्यान में रखना होगा। तकनीक के इस्तेमाल से निगरानी और इलाज को बेहतर बनाने पर भी बात हुई।
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स्वस्थ जीवन और सामाजिक भूमिका
कॉन्क्लेव में लंबी और स्वस्थ उम्र पर भी सत्र हुए। ममता शर्मा ने कहा कि सिर्फ लंबी उम्र पाना ही पर्याप्त नहीं है। व्यक्ति का स्वस्थ, सक्रिय और सम्मानजनक जीवन जीना भी जरूरी है। खान-पान, व्यायाम, नींद और सामाजिक जुड़ाव को स्वस्थ उम्र बढ़ाने के लिए अहम बताया गया। विशेषज्ञों ने बुजुर्गों की देखभाल में परिवार और समाज की भूमिका पर जोर दिया। उन्हें अकेलेपन से बचाना और समाज की मुख्यधारा से जोड़ना आवश्यक है। युवा और बुजुर्गों के बीच संवाद बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के बायोफिजिक्स विभाग और नेशनल सेंटर फॉर एजिंग ने तीन दिवसीय लॉन्गेविटी कॉन्क्लेव का आयोजन किया है। मंगलवार को कॉन्क्लेव के दूसरे दिन देश-विदेश के विशेषज्ञ जुटे। उन्होंने बुजुर्गों की बढ़ती आबादी, उनकी सेहत और मानसिक स्वास्थ्य पर चर्चा की।
विशेषज्ञों ने न्यूरोलॉजिकल बीमारियों, डिमेंशिया और कैंसर पर विचार साझा किए। गिरने से बचाव, खान-पान और सामाजिक सुरक्षा जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। बुजुर्गों की देखभाल के तरीकों पर भी बात की गई। एनआईएचएफडब्ल्यू के सोशल साइंसेज विभाग के पूर्व प्रोफेसर और हेड एएम खान ने एक महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने बताया कि बुजुर्गों की देखभाल सिर्फ बीमारी के इलाज तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उनके शारीरिक, मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य का भी ध्यान रखना जरूरी है। यह कॉन्क्लेव एसोसिएशन ऑफ जेरोन्टोलॉजी (इंडिया) के 22वें द्विवार्षिक सम्मेलन का हिस्सा है। इसका विषय साइंस एंड आर्ट ऑफ लॉन्गेविटी है।
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डिमेंशिया और मानसिक स्वास्थ्य पर जोर
कार्यक्रम में डिमेंशिया और उम्र बढ़ने के साथ होने वाली दिमागी बीमारियों पर विशेष ध्यान दिया गया। एम्स के न्यूरोलॉजी विभाग की विभागाध्यक्ष मंजरी त्रिपाठी ने याददाश्त कमजोर होने के कारणों पर चर्चा की। उन्होंने भारत में डिमेंशिया से प्रभावित बुजुर्गों की पहचान और बेहतर देखभाल की जरूरत बताई। मंजरी त्रिपाठी ने कहा कि बुजुर्गों के इलाज में उनकी जरूरतों और पसंद को ध्यान में रखना होगा। तकनीक के इस्तेमाल से निगरानी और इलाज को बेहतर बनाने पर भी बात हुई।
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स्वस्थ जीवन और सामाजिक भूमिका
कॉन्क्लेव में लंबी और स्वस्थ उम्र पर भी सत्र हुए। ममता शर्मा ने कहा कि सिर्फ लंबी उम्र पाना ही पर्याप्त नहीं है। व्यक्ति का स्वस्थ, सक्रिय और सम्मानजनक जीवन जीना भी जरूरी है। खान-पान, व्यायाम, नींद और सामाजिक जुड़ाव को स्वस्थ उम्र बढ़ाने के लिए अहम बताया गया। विशेषज्ञों ने बुजुर्गों की देखभाल में परिवार और समाज की भूमिका पर जोर दिया। उन्हें अकेलेपन से बचाना और समाज की मुख्यधारा से जोड़ना आवश्यक है। युवा और बुजुर्गों के बीच संवाद बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।