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Bahraich: नेपाल में तेज हुई हिंदू राष्ट्र की मांग, भारत की सीमा से लगे आठ जिलों में आंदोलन से काठमांडो पर दबाव
Sun, 09 Aug 2026 03:26 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अतुल अवस्थी, बहराइच
अतुल अवस्थी, बहराइच
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 09 Aug 2026 03:26 AM IST
सार
हिंदू संगठनों ने काठमांडो के अलावा भारत की सीमा से लगे मोरंग, सुनसरी, सप्तरी, सिरहा, बारा, पर्सा और रौतहट में आंदोलन चलाने का दावा किया है।
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सांकेतिक चित्र
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
नेपाल को दोबारा वैदिक सनातन हिंदू राष्ट्र घोषित करने की मांग तेज हो गई है। हिंदू संगठनों ने काठमांडो के अलावा भारत की सीमा से लगे मोरंग, सुनसरी, सप्तरी, सिरहा, बारा, पर्सा और रौतहट में आंदोलन चलाने का दावा किया है। संगठनों ने सरकार से तीन महीने के भीतर सर्वदलीय बैठक बुलाकर हिंदू राष्ट्र की बहाली पर चर्चा और आगे की प्रक्रिया के लिए समयसीमा तय करने की मांग की है।
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संयुक्त हिंदू मोर्चा ने हाल में गृह मंत्री सुदन गुरुंग को ज्ञापन सौंपकर नेपाल की सांविधानिक पहचान पर पुनर्विचार के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की। नेपाल हिंदू स्वयंसेवक संघ की पशुपति शिक्षा प्रचार समिति के राष्ट्रीय संगठन सचेतक वासुदेव ने कहा कि संगठनों की ओर से सरकार के समक्ष लगातार यह मांग रखी जा रही है।
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उनके अनुसार, सरकार और हिंदू प्रतिनिधियों के बीच हाल में हुई बातचीत में धार्मिक सौहार्द, सुरक्षा और धार्मिक संस्थानों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। इसी दौरान तीन महीने में सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग भी रखी गई। नेपाल में रह रहे विदेशी नागरिकों के दस्तावेजीकरण समेत अन्य विषय भी उठे। हालांकि, नेपाली अधिकारियों ने बैठक को औपचारिक समझौता नहीं माना। अधिकारियों के अनुसार, संगठनों को अपनी मांगें रखने का अवसर देने के लिए बैठक हुई थी।
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तराई-मधेश के जिलों तक मुद्दा पहुंचने का दावा
हिंदू राष्ट्र की बहाली का मुद्दा काठमांडो से आगे भारत सीमा से लगे तराई-मधेश के जिलों तक पहुंचने का दावा किया जा रहा है। बता दें कि नेपाल वर्ष 2007 के बाद धर्मनिरपेक्ष गणराज्य बना। इसके बाद से हिंदू राष्ट्र की बहाली की मांग समय-समय पर उठती रही है। खुली सीमा और दोनों देशों के गहरे सामाजिक-सांस्कृतिक संबंधों को देखते हुए सांविधानिक पहचान की बहस का असर सीमा क्षेत्रों पर भी पड़ सकता है। हालांकि, सरकार की आगे की राजनीतिक प्रक्रिया स्पष्ट नहीं है।
द. एशिया में अहम मुद्दा बन सकता है : प्रशांत
नेपालगंज के हिंदू संगठन से जुड़े प्रमोद कुमार प्रशांत ने कहा कि मांग व्यापक राजनीतिक आंदोलन बनी तो इसका असर काठमांडो की सत्ता-राजनीति से आगे पड़ सकता है। खुली सीमा, मधेश की सामाजिक संरचना, धार्मिक व सांस्कृतिक संबंधों के कारण यह बहस भारत-नेपाल संबंधों और दक्षिण एशिया की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।
नेपाल हिंदू राष्ट्र बने तो खुशी की बात : किशोर
अवध क्षेत्र के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सामाजिक समरसता प्रमुख राज किशोर ने कहा कि नेपाल के हिंदू राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ना खुशी की बात होगी। पहाड़ी क्षेत्रों से उठी आवाज को मैदानी क्षेत्रों में भी समर्थन का दावा है। संभावित अस्थिरता का फायदा उठाकर देशविरोधी तत्व भारत में प्रवेश न कर सकें, इसके लिए सीमा पर निगरानी जरूरी है।
नेपालगंज में बोले लोग- पहचान भी चाहिए और सौहार्द भी
भारत-नेपाल सीमा पर हिंदू राष्ट्र की मांग अब राजनीतिक मंचों तक सीमित नहीं रह गई है। रुपईडीहा से नेपालगंज तक बाजारों, चौक-चौराहों और आम लोगों की बातचीत में नेपाल को फिर हिंदू राष्ट्र बनाने की चर्चा हो रही है। हालांकि लोगों का कहना है कि धार्मिक व सांस्कृतिक पहचान की मांग के साथ सामाजिक सौहार्द और शांति भी जरूरी है। रुपईडीहा-नेपालगंज के बीच रोजाना आवागमन करने वालों में भी इस मुद्दे पर चर्चा है। फिलहाल सीमा क्षेत्र में जनजीवन सामान्य है।
लोग बोले---
हिंदू राष्ट्र की मांग को समर्थन मिल रहा है लेकिन किसी तरह का विवाद या तनाव नहीं होना चाहिए। -रमा शर्मा, निवासी, नेपालगंज
हिंदू राष्ट्र की मांग उठाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। इसे शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ाया जाना चाहिए। -बुद्धि प्रसाद न्यौपाने, नेपालगंज
धार्मिक पहचान और सामाजिक सद्भाव दोनों साथ चलने चाहिए। -उमा क्षेत्री, नेपालगंज
आम लोगों की प्राथमिकता शांति और सामान्य जनजीवन है। -मीन प्रसाद द्विवेदी, वैदिक सनातन हिंदू भजन कीर्तन संस्था, नेपाल