{"_id":"6a7937902f3ce5abf3088dff","slug":"dwarka-medical-college-805-99-crore-approved-yet-project-stuck-on-paper-2026-08-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"Delhi : 805.99 करोड़ का फंड मंजूर, फिर भी कागजों से नहीं निकल रहा मेडिकल कॉलेज; मई में ही मिली थी ईएफसी मंजूरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Delhi : 805.99 करोड़ का फंड मंजूर, फिर भी कागजों से नहीं निकल रहा मेडिकल कॉलेज; मई में ही मिली थी ईएफसी मंजूरी
Mon, 10 Aug 2026 07:59 AM IST
Vijay Singh Pundir
धनंजय मिश्रा, अमर उजाला, नई दिल्ली
धनंजय मिश्रा, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Vijay Singh Pundir
Updated Mon, 10 Aug 2026 07:59 AM IST
सार
परियोजना की मौजूदा स्थिति इसलिए अहम है क्योंकि ईएफसी की मंजूरी के बावजूद अभी कैबिनेट स्तर की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। 28 जुलाई की समीक्षा बैठक के मिनट्स में कैबिनेट नोट की प्रक्रिया का उल्लेख है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि नोट किस स्तर पर लंबित है और इसमें देरी की वजह क्या है।
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Adobe Stock
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
द्वारका स्थित इंदिरा गांधी अस्पताल परिसर में प्रस्तावित आधुनिक मेडिकल कॉलेज की परियोजना को 805.99 करोड़ रुपये का फंड मंजूर होने के बावजूद जमीन पर काम शुरू होने की दिशा में अपेक्षित प्रगति नहीं हो सकी है।
विज्ञापन
मई में आर्थिक वित्त समिति (ईएफसी) से मंजूरी मिलने के करीब तीन महीने बाद 28 जुलाई को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई परियोजना समीक्षा बैठक में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने बताया कि मेडिकल कॉलेज का कैबिनेट नोट अभी प्रस्तुत किए जाने की प्रक्रिया में है।
विज्ञापन
सरकार ने मई में परियोजना को मंजूरी मिलने की जानकारी देते हुए इसे वर्ष 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा था। प्रस्ताव के तहत मेडिकल कॉलेज के साथ अकादमिक ब्लॉक, छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग छात्रावास और फैकल्टी आवास विकसित किए जाने हैं। निर्माण की जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की होगी, जबकि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग परियोजना की निगरानी करेगा।
विज्ञापन
परियोजना की मौजूदा स्थिति इसलिए अहम है क्योंकि ईएफसी की मंजूरी के बावजूद अभी कैबिनेट स्तर की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। 28 जुलाई की समीक्षा बैठक के मिनट्स में कैबिनेट नोट की प्रक्रिया का उल्लेख है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि नोट किस स्तर पर लंबित है और इसमें देरी की वजह क्या है।
ऐसे में 2028 की तय समयसीमा पर भी सवाल उठ रहे हैं। परियोजना में आगे कैबिनेट प्रक्रिया के बाद निर्माण से जुड़े प्रशासनिक और तकनीकी चरण पूरे करने होंगे। यदि इनमें अधिक समय लगता है तो इसका सीधा असर निर्माण शुरू होने और तय समय में कॉलेज तैयार करने की समयसीमा पर पड़ सकता है। फिलहाल सरकारी रिकॉर्ड में देरी का कारण स्पष्ट नहीं है।
अस्पताल और मेडिकल कॉलेज एक परिसर में होगा : इंदिरा गांधी अस्पताल, द्वारका पहले से ही बड़े शिक्षण अस्पताल के रूप में संचालित है। अस्पताल की आधिकारिक योजना के अनुसार इसे 1,725 बिस्तरों वाले शिक्षण अस्पताल और मेडिकल कॉलेज के रूप में विकसित किया जाना है।
वर्तमान में यहां 1,241 बिस्तरों वाला मल्टी-स्पेशियलिटी शिक्षण अस्पताल संचालित है। दूसरे चरण में 484 बिस्तरों वाले एमसीएच ब्लॉक के साथ मेडिकल कॉलेज और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों की भी योजना है। ऐसे में प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज को इसी अस्पताल परिसर से जोड़कर विकसित करने का उद्देश्य चिकित्सा शिक्षा और मरीजों के उपचार के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना है। इससे विद्यार्थियों को अस्पताल में व्यावहारिक प्रशिक्षण के लिए बड़ा क्लीनिकल बेस भी मिलेगा।
250 एमबीबीएस सीटें, शुरुआत 150 से
परियोजना पूरी होने के बाद मेडिकल कॉलेज में हर वर्ष 250 एमबीबीएस विद्यार्थियों के दाखिले की क्षमता विकसित करने की योजना है। शुरुआत में 150 विद्यार्थियों के साथ शिक्षण गतिविधियां शुरू करने का प्रस्ताव है। मेडिकल कॉलेज में अकादमिक ब्लॉक, छात्रावास और फैकल्टी आवास जैसी सुविधाएं पहले चरण में विकसित की जानी हैं।