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कानून लागू करना केंद्र सरकार का काम, हम प्रार्थना पत्र नहीं दे सकते : हाईकोर्ट
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- सड़क दुर्घटना में लापरवाही की धाराएं तुरंत लागू करने की मांग वाली याचिका को खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने की टिप्पणी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को सड़क दुर्घटनाओं में लापरवाही से मौत के मामलों में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 106(2) को तत्काल लागू कराने की मांग वाली जनहित याचिका (पीआईएल) खारिज कर दी। खंडपीठ ने कहा, यह केंद्र सरकार का काम है कि वह जब उचित समझे, अधिसूचना जारी करे। बिना अधिसूचना के धारा 106(2) बीएनएस को लागू करने का प्रार्थना पत्र हम नहीं दे सकते।
मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि इस धारा को लागू करने के लिए अधिसूचना जारी करना केंद्र सरकार का अधिकार है, अदालत का नहीं। अदालत ने याचिका को पूरी तरह बेबुनियाद बताते हुए कहा कि ऐसी प्रार्थनाएं न केवल समझ से परे हैं, बल्कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत न्यायिक अधिकारिता के दायरे में भी नहीं आतीं। इसके साथ ही पीआईएल खारिज कर दी गई।
वकील रितु गाबा की ओर से दायर याचिका में केंद्र सरकार को धारा 106(2) लागू करने का निर्देश देने के अलावा दिल्ली पुलिस को गृह मंत्री अमित शाह, राहुल गांधी सहित सभी सांसदों के खिलाफ मतदाताओं को गुमराह करने और धोखाधड़ी का मामला दर्ज करने का निर्देश देने की भी मांग की गई थी। अदालत ने इन मांगों पर कोई राहत देने से इन्कार करते हुए याचिका को सिरे से खारिज कर दिया।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को सड़क दुर्घटनाओं में लापरवाही से मौत के मामलों में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 106(2) को तत्काल लागू कराने की मांग वाली जनहित याचिका (पीआईएल) खारिज कर दी। खंडपीठ ने कहा, यह केंद्र सरकार का काम है कि वह जब उचित समझे, अधिसूचना जारी करे। बिना अधिसूचना के धारा 106(2) बीएनएस को लागू करने का प्रार्थना पत्र हम नहीं दे सकते।
मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि इस धारा को लागू करने के लिए अधिसूचना जारी करना केंद्र सरकार का अधिकार है, अदालत का नहीं। अदालत ने याचिका को पूरी तरह बेबुनियाद बताते हुए कहा कि ऐसी प्रार्थनाएं न केवल समझ से परे हैं, बल्कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत न्यायिक अधिकारिता के दायरे में भी नहीं आतीं। इसके साथ ही पीआईएल खारिज कर दी गई।
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वकील रितु गाबा की ओर से दायर याचिका में केंद्र सरकार को धारा 106(2) लागू करने का निर्देश देने के अलावा दिल्ली पुलिस को गृह मंत्री अमित शाह, राहुल गांधी सहित सभी सांसदों के खिलाफ मतदाताओं को गुमराह करने और धोखाधड़ी का मामला दर्ज करने का निर्देश देने की भी मांग की गई थी। अदालत ने इन मांगों पर कोई राहत देने से इन्कार करते हुए याचिका को सिरे से खारिज कर दिया।
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