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Solution: दिल्ली में हर जमीन की होगी यूनिक आईडी, बनेगा लैंड आधार कार्ड; सीएम ने कहा- भूमि विवादों में आएगी कमी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 16 Feb 2026 06:02 AM IST
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सार

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घोषणा की कि दिल्ली की प्रत्येक जमीन को 14 अंकों का यूनिक लैंड पार्सल आइडेंटिफिकेशन नंबर (यूएलपीआईएन) दिया जाएगा। यह व्यवस्था लैंड आधार कार्ड के रूप में काम करेगी, जिससे हर जमीन का डिजिटल हिसाब होगा और भूमि विवादों में कमी आएगी।
 

Every land in Delhi will have a unique ID, a land Aadhaar card will be created
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता - फोटो : X/Rekhagupta
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विस्तार

दिल्ली में भूमि प्रबंधन को पारदर्शी और विवाद-मुक्त बनाने के लिए दिल्ली सरकार हर जमीन को यूनिक पहचान देने जा रही है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घोषणा की कि दिल्ली की प्रत्येक जमीन को 14 अंकों का यूनिक लैंड पार्सल आइडेंटिफिकेशन नंबर (यूएलपीआईएन) दिया जाएगा। यह व्यवस्था लैंड आधार कार्ड के रूप में काम करेगी, जिससे हर जमीन का डिजिटल हिसाब होगा और भूमि विवादों में कमी आएगी।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पहल से भूमि रिकॉर्ड भू-संदर्भित (जियो-रेफरेंस्ड) होंगे और सीमांकन विवादों में भारी कमी आएगी। उन्होंने इसे भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े के खिलाफ एक मजबूत डिजिटल हथियार बताया। यह योजना भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय और भूमि संसाधन विभाग की पहल है, जिसकी शुरुआत 2016 में हुई थी, लेकिन दिल्ली में इसे अब मिशन मोड में लागू किया जाएगा। दिल्ली में जमीन और राजस्व विभाग से जुड़ा ये महत्वपूर्ण सुधार होने जा रहा है। 
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फेज वाइज पूरी दिल्ली में होगा लागू
योजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी दिल्ली सरकार के राजस्व विभाग की आईटी शाखा को सौंपी गई है, जिसे भारतीय सर्वेक्षण विभाग का तकनीकी सहयोग मिलेगा। सरकार चरणबद्ध तरीके से पूरे दिल्ली क्षेत्र में यूएलपीआईएन लागू करेगी और इसके लिए एसओपी व समयसीमा भी तय की जा रही है।

आधुनिक तकनीक से बनेगा डिजिटल लैंड मैप
सीएम ने बताया कि भू आधार के लिए अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। भारतीय सर्वेक्षण विभाग से करीब दो टेराबाइट उच्च गुणवत्ता का भू-स्थानिक डेटा और ड्रोन से ली गई ऑर्थो-रेक्टिफाइड इमेजरी के आधार पर दिल्ली का नया डिजिटल लैंड मैप तैयार किया जाएगा। 

भूमि विवादों और धोखाधड़ी पर लगेगी रोक 
सीएम के मुताबिक, यूएलपीआईएन प्रत्येक भूखंड के लिए स्थायी पहचान होगी। इससे एक ही जमीन के बहु-पंजीकरण, धोखाधड़ी वाले लेन-देन और सीमांकन विवादों पर रोक लगेगी। विभिन्न सरकारी विभागों के बीच भूमि डेटा का बेहतर समन्वय संभव होगा। गरीब और मध्यम वर्ग के लोग अस्पष्ट रिकॉर्ड के कारण कानूनी विवादों में फंस जाते हैं।

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