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Save Yamuna: यमुना को साफ करने वाले एसटीपी ही बढ़ा रहे हैं प्रदूषण, डीपीसीसी ने जल बोर्ड पर लगाया जुर्माना

नितिन राजपूत, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 16 Feb 2026 06:40 AM IST
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The STPs that clean the Yamuna are only increasing pollution
यमुना नदी file - फोटो : अमर उजाला
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जीवनदायिनी यमुना नदी को स्वच्छ बनाने के लिए लगाए गए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स (एसटीपी) ही इसे प्रदूषित कर रहे हैं। 15 एसटीपी से निकलने वाला पानी निर्धारित मानकों पर फेल हुआ है, जिससे यमुना की गंदगी कम होने के बजाय बढ़ रही है। इस लापरवाही के लिए दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) ने दिल्ली जल बोर्ड पर 2.89 करोड़ रुपये का पर्यावरणीय जुर्माना लगाया है। 

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यह कार्रवाई राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के आदेश पर की गई है। एनजीटी ने अपने आदेश में कहा था कि दिल्ली के कई एसटीपी सही तरीके से काम नहीं कर रहे हैं और तय मानकों को पूरा करने में असफल हैं। डीपीसीसी ने एनजीटी को सौंपी अपनी रिपोर्ट में बताया कि कई एसटीपी के आउटलेट से निकलने वाला पानी निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतर रहा था। 
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हालांकि कुछ प्लांट्स डिजाइन के हिसाब से सही पाए गए, लेकिन फिर भी मानक पूरे नहीं हो सके। डीपीसीसी ने कुल जुर्माना अलग-अलग एसटीपी पर लगाया है। ओखला फेज-5 पर 20.80 लाख रुपये का जुर्माना लगा है। मोलरबंद, वसंत कुंज फेज-1, फेज-2 और मेहरौली एसटीपी पर 27.60 लाख रुपये का जुर्माना लगा है। यमुना विहार फेज-1 और फेज-3 पर 29 लाख रुपये जुर्माना हुआ है। 

सोनिया विहार और कापसहेड़ा एसटीपी पर 18-18 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। निलोठी फेज-1 पर 6 लाख रुपये, दिल्ली गेट नाला फेज-1 पर 17.40 लाख रुपये और कोंडली फेज-2 व फेज-3 पर 11 लाख रुपये का जुर्माना तय किया गया। घिटोरनी एसटीपी पर 25 लाख रुपये और सेन नर्सिंग होम नाला पर 5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।

ये एसटीपी रेड श्रेणी में रखे गए
डीपीसीसी की रिपोर्ट में बताया गया कि 16 अक्तूबर 2025 को हुई एक कमेटी बैठक में एसटीपी पर जुर्माना लगाने का फॉर्मूला तय किया गया। कमेटी ने एसटीपी को रेड श्रेणी में रखते हुए उद्योगों की तरह जुर्माना लगाने की योजना बनाई। इस प्रक्रिया को 14 नवंबर 2025 को मंजूरी दी गई। डीपीसीसी के सीनियर इंजीनियर डॉ. अनवर अली खान ने कहा कि यह कार्रवाई यमुना नदी की सफाई और पर्यावरण संरक्षण के लिए जरूरी है। जुर्माने से डीजेबी पर अपने एसटीपी सुधारने का दबाव बनेगा।

मानकों पर खरे नहीं उतरे प्लांट 
एनजीटी ने 22 अगस्त 2025 को आदेश दिया था कि दिल्ली के 14 एसटीपी जुलाई 2025 तक तय मानकों पर खरे नहीं उतरे थे। इसके बाद डीपीसीसी ने जुलाई से अक्तूबर 2025 तक जांच की, जिसमें 15 एसटीपी (एक अतिरिक्त शामिल) मानकों पर फेल पाए गए। इन प्लांट्स से निकलने वाला दूषित पानी सीधे यमुना में गिरता है, जिससे नदी का प्रदूषण बढ़ता है। डीपीसीसी ने इनके संचालकों को शो-कॉज नोटिस जारी कर जुर्माना लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

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