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जब बॉलीवुड अभिनेत्री काजोल को बेटे ने डांटा
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 05 Nov 2014 11:40 PM IST
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स्वच्छ भारत अभियान की देशभर में हर कोई चर्चा कर रहा है। बॉलीवुड, उद्यमी से लेकर आम आदमी तक इसे लेकर काम कर रहा है। गंदगी से हर साल बीमारी के कारण लाखों बच्चों की मौत हो जाती है। बीमारियों के कारण तमाम बच्चे पांच साल की उम्र तक नहीं पहुंच पाते।
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फिल्म अभिनेत्री काजोल भी इससे इत्तेफाक रखती हैं। वे दो साल से गंदगी के शरीर में पहुंचने का मुख्य रास्ता यानी हाथ की सफाई को लेकर कैंपेन चला रही हैं।
बुधवार को दिल्ली में इसी के प्रति लोगों के सामने अपनी बात रखने के लिए वह वर्ल्ड इकोनॉमी फोरम (डब्ल्यूईए) के समिट में पहुंची। प्रस्तुत हैं इस दौरान उन्होंने हाथ की सफाई को लेकर 'अमर उजाला' संवाददाता बृजेश सिंह से हुई खास बातचीत के प्रमुख अंश।
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सवाल: हैंड सैनिटेशन कैंपेन से आप कब जुड़ीं। इसे आगे बढ़ाने में आपको किसी तरह की मुश्किल आई?
जवाब: करीब दो साल पहले मैं हैंड सैनिटेशन प्रोग्राम से जुड़ी। हाथ की गंदगी का खतरा बहुत ज्यादा होता है। इसके कारण लाखों बच्चे पांच साल की उम्र तक भी नहीं पहुंच पाते हैं। मगर अब बदलाव आ रहा है। गांवों व पिछड़े इलाकों में हम ज्यादा जा रहे हैं। वहां लोग मानते ही नहीं कि हाथ धोने से भी कुछ होता है। इसलिए कई बार टीम का मजाक भी उड़ाया जाता है। लोगों को हाथ धोने के लिए मनाना सबसे मुश्किल काम है। मेरा मानना है कि लोग अपने व्यवहार में बदलाव लाएं। तभी स्वच्छ भारत तैयार होगा। हमें प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत अभियान से थोड़ी मदद मिली है। लोग अब सफाई को गंभीरता से लेने लगे हैं।
सवाल: हाथ नहीं धोने के कारण कभी आपको डांट पड़ी?
जवाब: हाथ नहीं धोने के कारण मुझे बचपन में जरूर डांट पड़ी। मगर हाल फिलहाल मेरे बच्चों ने मुझे जरूर टोका। जब मैं एक बार बाहर से आकर बिना हाथ धोए फोक-स्पून से खाने लगी, मेरे बेटे ने मुझे टोकते हुए डांटा। तब मुझे हाथ धोने के लिए उठकर जाना पड़ा।
सवाल: आपको घर में इसे लागू कराने के लिए किसके साथ ज्यादा आसानी होती है। अजय देवगन या बच्चे?
जवाब: मुझे बच्चों के साथ ज्यादा आसानी होती है। क्योंकि बच्चों को समझाना आसान होता है मगर पति को नहीं। बच्चे जैसा देखते है वैसा सीखते हैं। पति को बार-बार समझाने के बाद भी अपनी आदत पर वापस लौट आते हैं। इसलिए मुझे लगता है कि पति ज्यादा लापरवाह हैं।
सवाल: एक पत्नी या महिला के रूप में आप इसे कैसे लेती हैं?
जवाब: इस कैंपेन को आगे बढ़ाने में एक महिला का रोल सबसे अहम होता है। जब हम छोटे थे तो तब हमे सिखाया जाता था या आदत डाली जाती थी की खाना खाने से पहले हाथ धोना चाहिए। मगर अब यह हमारी जरूरत है। महिला एक घर, परिवार संभालती है तो उसकी जिम्मेदारी अधिक है। वैसे भी बच्चे घर में जो देखते हैं वहीं फॉलो करते हैं। महिलाओं का रोल इसे आगे बढ़ाने में बेहद अहम है। जब मेरे बेबी हुआ तो मैने अपने सभी दोस्तों से कह दिया की वह छह महीने तक ना मिलें। अगर आते है तो अच्छे तरीके से हाथ धुलकर बच्चे से मिलें।
सवाल: इस कैंपेन को आगे बढ़ाने का क्या प्लान है?
जवाब: हम दो साल से गांवों में जाकर लोगों से मिलकर उन्हें हाथ धोने के लिए जागरूक कर रहे हैं। इसका फायदा भी मिला है। चाइल्ड मोर्टेलिटी में कमी भी आ रही है। हम जल्द ही मध्य प्रदेश जाने वाले हैं। वहां इस कैंपेन को आगे बढ़ाएंगे। विकसित भारत के लिए स्वच्छ भारत बेहद जरूरी है।
सवाल: बड़े परदे पर लंबे समय से आपका इंतजार हो रहा है, क्या वजह है?
जवाब: मुझे कमबैक के लिए किसी भी फिल्म की जरूरत नहीं है। मुझे अच्छी फिल्म का इंतजार है। जिस दिन वह मिल गई मैं बड़े परदे पर नजर आऊंगी। उम्मीद है जल्द ही ऐसा होगा।
