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Faridabad News: खेलों की तैयारी छोड़कर अस्पताल के चक्कर काट रहे खिलाड़ी
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आयु सत्यापन का मेडिकल न बनने से फंसी जिला स्तरीय प्रतियोगिता
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसजीएफआई) में कई खेलों की ब्लॉक स्तरीय प्रतियोगिताएं संपन्न होने के बाद अब जिला स्तरीय खेलों की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं लेकिन ब्लॉक स्तर पर बाजी मारकर जिला स्तर के लिए चयनित हुए खिलाड़ियों के सामने एक बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई है।
प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए अनिवार्य आयु सत्यापन मेडिकल सर्टिफिकेट न बनने के कारण एथलेटिक्स, फुटबॉल और बास्केटबॉल समेत विभिन्न खेलों के करीब 40 से 50 खिलाड़ी पिछले छह दिनों से नागरिक अस्पताल (बीके अस्पताल) और ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज के चक्कर काटने को मजबूर हैं। अस्पतालों में डॉक्टरों की टालमटोल की नीति के कारण खिलाड़ी परेशान हैं। खिलाड़ियों का आरोप है कि डॉक्टर उन्हें एक कमरे से दूसरे कमरे और एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल दौड़ा रहे हैं लेकिन कोई भी संतोषजनक जवाब देने को तैयार नहीं है। अभ्यास का कीमती समय अस्पतालों में भटकने में बर्बाद हो रहा है। खिलाड़ियों ने खेल विभाग और स्वास्थ्य प्रशासन से गुहार लगाई है कि जल्द से जल्द कोई विशेष शिविर या एकल खिड़की की व्यवस्था की जाए, ताकि उनका मेडिकल सर्टिफिकेट समय पर बन सके और वे बिना किसी मानसिक तनाव के मैदान पर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दे सकें।
हम पिछले पांच दिनों से बीके अस्पताल आ रहे हैं। हर बार कोई न कोई नया बहाना बनाकर दूसरे डॉक्टर के पास भेज दिया जाता है। हमारी प्रैक्टिस छूट रही है। -शांतनू, खिलाड़ी
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आधे खिलाड़ी ईएसआईसी में हैं और आधे बीके में। दोनों ही जगह कोई सुनने वाला नहीं है। मेडिकल समय पर नहीं बना तो जिला स्तरीय ट्रायल से बाहर हो जाएंगे। -आवेश, खिलाड़ी
डॉक्टरों से सही जवाब तक नहीं मिल पा रहा है। ब्लॉक स्तर जीतकर आए थे कि आगे खेलेंगे, पर यहां कागजी कार्रवाई में ही हमारा भविष्य दांव पर लग गया है। -अमन, खिलाड़ी
रोज सुबह आस लगाए अस्पताल आते हैं और शाम को बिना मेडिकल बनवाए निराश होकर लौटते हैं। हमारी महीनों की मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा है। -छाया, खिलाड़ी
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसजीएफआई) में कई खेलों की ब्लॉक स्तरीय प्रतियोगिताएं संपन्न होने के बाद अब जिला स्तरीय खेलों की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं लेकिन ब्लॉक स्तर पर बाजी मारकर जिला स्तर के लिए चयनित हुए खिलाड़ियों के सामने एक बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई है।
प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए अनिवार्य आयु सत्यापन मेडिकल सर्टिफिकेट न बनने के कारण एथलेटिक्स, फुटबॉल और बास्केटबॉल समेत विभिन्न खेलों के करीब 40 से 50 खिलाड़ी पिछले छह दिनों से नागरिक अस्पताल (बीके अस्पताल) और ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज के चक्कर काटने को मजबूर हैं। अस्पतालों में डॉक्टरों की टालमटोल की नीति के कारण खिलाड़ी परेशान हैं। खिलाड़ियों का आरोप है कि डॉक्टर उन्हें एक कमरे से दूसरे कमरे और एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल दौड़ा रहे हैं लेकिन कोई भी संतोषजनक जवाब देने को तैयार नहीं है। अभ्यास का कीमती समय अस्पतालों में भटकने में बर्बाद हो रहा है। खिलाड़ियों ने खेल विभाग और स्वास्थ्य प्रशासन से गुहार लगाई है कि जल्द से जल्द कोई विशेष शिविर या एकल खिड़की की व्यवस्था की जाए, ताकि उनका मेडिकल सर्टिफिकेट समय पर बन सके और वे बिना किसी मानसिक तनाव के मैदान पर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दे सकें।
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हम पिछले पांच दिनों से बीके अस्पताल आ रहे हैं। हर बार कोई न कोई नया बहाना बनाकर दूसरे डॉक्टर के पास भेज दिया जाता है। हमारी प्रैक्टिस छूट रही है। -शांतनू, खिलाड़ी
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आधे खिलाड़ी ईएसआईसी में हैं और आधे बीके में। दोनों ही जगह कोई सुनने वाला नहीं है। मेडिकल समय पर नहीं बना तो जिला स्तरीय ट्रायल से बाहर हो जाएंगे। -आवेश, खिलाड़ी
डॉक्टरों से सही जवाब तक नहीं मिल पा रहा है। ब्लॉक स्तर जीतकर आए थे कि आगे खेलेंगे, पर यहां कागजी कार्रवाई में ही हमारा भविष्य दांव पर लग गया है। -अमन, खिलाड़ी
रोज सुबह आस लगाए अस्पताल आते हैं और शाम को बिना मेडिकल बनवाए निराश होकर लौटते हैं। हमारी महीनों की मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा है। -छाया, खिलाड़ी