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Faridabad News: घर की जिम्मेदारी उठाकर बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल
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कोई फेरी लगाकर तो कोई घरों में काम करके संभाल रहीं अपना घर
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। औद्योगिक शहर फरीदाबाद में कई महिलाएं अब घर की जिम्मेदारियों के साथ छोटे स्वरोजगार और फेरी के काम से जुड़कर आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं। कपड़े बेचने से लेकर छोटे व्यापार तक, ये महिलाएं न सिर्फ अपने परिवार की आय में योगदान दे रही हैं, बल्कि सीमित संसाधनों के बीच अपने लिए एक स्थिर और सम्मानजनक पहचान भी बना रही हैं।
इनमें कई ऐसी महिलाएं हैं जिनके पति या तो अस्वस्थ हैं, बेरोजगार हैं या फिर परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों को पूरा करने में असमर्थ हैं। ऐसे में घर की पूरी जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई है। मजबूरी में शुरू किया हुआ काम अब उनके जीवन की सबसे बड़ी ताकत बन चुका है। सुबह घर के काम निपटाने के बाद ये महिलाएं बाजारों, कॉलोनियों और मोहल्लों में फेरी लगाने निकल पड़ती हैं और दिनभर मेहनत कर अपने परिवार का खर्च चलाती हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद वे बच्चों की पढ़ाई और घर की जरूरतों को पूरा करने में सफल हो रही हैं। यह सिलसिला फरीदाबाद के पल्ला, डबुआ और आसपास के कई क्षेत्रों में देखा जा रहा है, जहां महिलाएं अब धीरे-धीरे आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा रही हैं।
पहले घर चलाना बहुत मुश्किल था। पति की आमदनी स्थिर नहीं थी, इसलिए घर की जिम्मेदारी मेरे ऊपर आ गई। अब मैं फेरी लगाकर कपड़े बेचती हूं और अपने बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च खुद संभाल रही हूं। - कविता
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पति की तबीयत खराब रहने लगी तो घर की पूरी जिम्मेदारी मेरे कंधों पर आ गई। शुरुआत में बहुत मुश्किल हुई, लेकिन अब मैं आत्मनिर्भर बन गई हूं और अपने फैसले खुद लेती हूं। - अनीता
हम झुग्गी-झोपड़ी में रहते हैं, पहले सिर्फ दूसरों पर निर्भर थे। लेकिन अब रोज काम करके बच्चों का पेट पाल रही हूं। मेहनत जरूर है, लेकिन अब अपनी कमाई पर गर्व महसूस होता है। - पूनम
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। औद्योगिक शहर फरीदाबाद में कई महिलाएं अब घर की जिम्मेदारियों के साथ छोटे स्वरोजगार और फेरी के काम से जुड़कर आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं। कपड़े बेचने से लेकर छोटे व्यापार तक, ये महिलाएं न सिर्फ अपने परिवार की आय में योगदान दे रही हैं, बल्कि सीमित संसाधनों के बीच अपने लिए एक स्थिर और सम्मानजनक पहचान भी बना रही हैं।
इनमें कई ऐसी महिलाएं हैं जिनके पति या तो अस्वस्थ हैं, बेरोजगार हैं या फिर परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों को पूरा करने में असमर्थ हैं। ऐसे में घर की पूरी जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई है। मजबूरी में शुरू किया हुआ काम अब उनके जीवन की सबसे बड़ी ताकत बन चुका है। सुबह घर के काम निपटाने के बाद ये महिलाएं बाजारों, कॉलोनियों और मोहल्लों में फेरी लगाने निकल पड़ती हैं और दिनभर मेहनत कर अपने परिवार का खर्च चलाती हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद वे बच्चों की पढ़ाई और घर की जरूरतों को पूरा करने में सफल हो रही हैं। यह सिलसिला फरीदाबाद के पल्ला, डबुआ और आसपास के कई क्षेत्रों में देखा जा रहा है, जहां महिलाएं अब धीरे-धीरे आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा रही हैं।
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पहले घर चलाना बहुत मुश्किल था। पति की आमदनी स्थिर नहीं थी, इसलिए घर की जिम्मेदारी मेरे ऊपर आ गई। अब मैं फेरी लगाकर कपड़े बेचती हूं और अपने बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च खुद संभाल रही हूं। - कविता
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हम झुग्गी-झोपड़ी में रहते हैं, पहले सिर्फ दूसरों पर निर्भर थे। लेकिन अब रोज काम करके बच्चों का पेट पाल रही हूं। मेहनत जरूर है, लेकिन अब अपनी कमाई पर गर्व महसूस होता है। - पूनम