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शक्ति को शक्ति विहीन करने के लिए गिराया बिल : सीमा त्रिखा
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पूर्व शिक्षा मंत्री सीमा त्रिखा ने कांग्रेस और विपक्षी दलों पर लगाया आरोप, 70 करोड़ महिलाओं से विश्वासघात करार दिया
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। संसद और विधानमंडलों में महिलाओं को 33% आरक्षण देने के बिल को गिराने पर जिले में अब सियासत तेज हो गई है। जिले के पक्ष-विपक्ष के कई बड़े नेताओं में जुबानी जंग चल रही है। इस मुद्दे पर पूर्व शिक्षा मंत्री सीमा त्रिखा ने कांग्रेस और इंडी गठबंधन पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि 17 अप्रैल का दिन भारत के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो सकता था, लेकिन कांग्रेस और विपक्षी दलों की सुनियोजित साजिश के चलते यह लोकतंत्र का एक काला दिन बन गया।
उन्होंने कहा कि शक्ति को शक्ति विहीन करने की यह कांग्रेस और विपक्षी दलों की साजिश है। इसी के तहत यह बिल गिराया गया। 17 अप्रैल 2026 को संसद में ‘नारी शक्ति वंदन’ केवल एक विधेयक ही नहीं गिरा, बल्कि विपक्ष का देश की 70 करोड़ माताओं, बहनों और बेटियों की आकांक्षाओं और सपनों पर सीधा प्रहार था। यह दिन देश के सामने यह स्पष्ट कर गया की कौन नारी सशक्तिकरण के पक्ष में खड़ा है और कौन उसके रास्ते में बांधा बनकर अड़ा है।
सोमवार को भाजपा जिला कार्यालय अटल कमल पर आयोजित प्रेस वार्ता में सीमा त्रिखा ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने विरासत पार्टी कार्यकर्ताओं को सौंपने के बजाय अपनी बेटी इंदिरा गांधी को आगे किया। इसी तरह राहुल गांधी को अवसर मिला तो उन्होंने आम महिला कार्यकर्ता को आगे बढ़ाने के बजाय बहन प्रियंका को सांसद बनाया। यह मानसिकता दर्शाती है कि ये लोग परिवारवाद से बाहर नहीं निकलना चाहते और अपने परिवार के अलावा किसी आम महिला को संसद में पहुंचने नहीं देना चाहते। यह पूरा मुद्दा परिवारवाद बनाम सामान्य महिला की लड़ाई को उजागर करता है। इस दौरान महिला मोर्चा जिला अध्यक्ष राजबाला सरधाना, जिला उपाध्यक्ष व महिला मोर्चा प्रभारी सीमा भारद्वाज, अलका भाटिया, अरुणिमा सिंह, प्रभा सोलंकी, रीटा गौसाईं, जिला मीडिया प्रभारी विनोद गुप्ता, जिला कार्यालय सचिव राज मदान उपस्थित रहे।
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फरीदाबाद। संसद और विधानमंडलों में महिलाओं को 33% आरक्षण देने के बिल को गिराने पर जिले में अब सियासत तेज हो गई है। जिले के पक्ष-विपक्ष के कई बड़े नेताओं में जुबानी जंग चल रही है। इस मुद्दे पर पूर्व शिक्षा मंत्री सीमा त्रिखा ने कांग्रेस और इंडी गठबंधन पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि 17 अप्रैल का दिन भारत के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो सकता था, लेकिन कांग्रेस और विपक्षी दलों की सुनियोजित साजिश के चलते यह लोकतंत्र का एक काला दिन बन गया।
उन्होंने कहा कि शक्ति को शक्ति विहीन करने की यह कांग्रेस और विपक्षी दलों की साजिश है। इसी के तहत यह बिल गिराया गया। 17 अप्रैल 2026 को संसद में ‘नारी शक्ति वंदन’ केवल एक विधेयक ही नहीं गिरा, बल्कि विपक्ष का देश की 70 करोड़ माताओं, बहनों और बेटियों की आकांक्षाओं और सपनों पर सीधा प्रहार था। यह दिन देश के सामने यह स्पष्ट कर गया की कौन नारी सशक्तिकरण के पक्ष में खड़ा है और कौन उसके रास्ते में बांधा बनकर अड़ा है।
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सोमवार को भाजपा जिला कार्यालय अटल कमल पर आयोजित प्रेस वार्ता में सीमा त्रिखा ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने विरासत पार्टी कार्यकर्ताओं को सौंपने के बजाय अपनी बेटी इंदिरा गांधी को आगे किया। इसी तरह राहुल गांधी को अवसर मिला तो उन्होंने आम महिला कार्यकर्ता को आगे बढ़ाने के बजाय बहन प्रियंका को सांसद बनाया। यह मानसिकता दर्शाती है कि ये लोग परिवारवाद से बाहर नहीं निकलना चाहते और अपने परिवार के अलावा किसी आम महिला को संसद में पहुंचने नहीं देना चाहते। यह पूरा मुद्दा परिवारवाद बनाम सामान्य महिला की लड़ाई को उजागर करता है। इस दौरान महिला मोर्चा जिला अध्यक्ष राजबाला सरधाना, जिला उपाध्यक्ष व महिला मोर्चा प्रभारी सीमा भारद्वाज, अलका भाटिया, अरुणिमा सिंह, प्रभा सोलंकी, रीटा गौसाईं, जिला मीडिया प्रभारी विनोद गुप्ता, जिला कार्यालय सचिव राज मदान उपस्थित रहे।

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