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Faridabad News: पर्यावरण सुधार को उठाए जा रहे बड़े कदम
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विश्व पृथ्वी दिवस : अरावली संरक्षण, जल प्रबंधन और कचरा नियंत्रण से पर्यावरण सुधार की हो रही पहल
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। विश्व पृथ्वी दिवस के अवसर पर फरीदाबाद अब केवल औद्योगिक शहर नहीं, बल्कि पर्यावरण सुधार की दिशा में बढ़ते कदमों के लिए भी पहचाना जा रहा है। बीते एक वर्ष में जिला प्रशासन और जनभागीदारी के सहयोग से अरावली की पहाड़ियों, जल स्रोतों और शहरी पर्यावरण को बेहतर बनाने के लिए कई स्तरों पर काम किया गया है। इन प्रयासों का उद्देश्य न केवल हरियाली बढ़ाना है, बल्कि भविष्य के लिए संतुलित और टिकाऊ पर्यावरण तैयार करना भी है।
अरावली क्षेत्र में हरित आवरण बढ़ाने के लिए बड़े स्तर पर पौधारोपण अभियान चलाया गया। दुर्गम पहाड़ियों में सीड बॉल तकनीक का इस्तेमाल कर ऐसे क्षेत्रों को भी कवर किया गया, जहां सामान्य तरीके से पौधरोपण संभव नहीं था। इसके साथ ही अवैध अतिक्रमण पर नियंत्रण और निगरानी बढ़ाकर प्राकृतिक क्षेत्र को सुरक्षित रखने की कोशिश की गई है।
जल संरक्षण को लेकर भी जिले में कई अहम पहलें सामने आई हैं। पुराने तालाबों को पुनर्जीवित करने, वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने और भूजल स्तर सुधारने के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम किया गया है। गांवों में सोक पिट निर्माण और किसानों को कम पानी में सिंचाई के लिए जागरूक करना इसी दिशा में उठाए गए कदम हैं।
प्रदूषण नियंत्रण के मोर्चे पर भी प्रयास तेज हुए हैं। सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ अभियान चलाकर बाजारों में निगरानी बढ़ाई गई है, वहीं कचरा निस्तारण को बेहतर बनाने के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। इन सभी प्रयासों का लक्ष्य शहर को स्वच्छ, हरित और संतुलित बनाना है।
चेक डैम और छोटे जलाशयों का निर्माण व 1.63 लाख पौधे लगाए गए
पिछले एक वर्ष में अरावली और शहरी क्षेत्रों में कुल 1 लाख 63 हजार 517 पौधे लगाए गए हैं। दुर्गम पहाड़ी इलाकों में हजारों सीड बॉल का छिड़काव किया गया, जिससे वर्षा के दौरान प्राकृतिक रूप से हरियाली बढ़ने की संभावना बनी है। पाली क्षेत्र सहित आसपास के इलाकों में लगभग एक करोड़ रुपये की लागत से चेक डैम और छोटे जलाशयों का निर्माण किया गया है, जो वर्षा जल को रोकने और वन्यजीवों को पानी उपलब्ध कराने में सहायक हैं।
55 गांवों में 115 सोक पिट तैयार किए जा रहे
जल संरक्षण के तहत 55 गांवों में 115 सोक पिट तैयार किए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य अतिरिक्त पानी को जमीन में पहुंचाकर भूजल स्तर को सुधारना है। मिशन अमृत सरोवर के तहत पुराने तालाबों का पुनरुद्धार कर उनकी जल संग्रहण क्षमता बढ़ाई गई है। इसके साथ ही अटल भूजल योजना के माध्यम से किसानों को टपक सिंचाई अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
कचरा प्रबंधन व निस्तारण के लिए प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं
सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें बाजारों में निरीक्षण और जागरूकता दोनों शामिल हैं। कचरा निस्तारण के लिए बंधवाड़ी वेस्ट मैनेजमेंट साइट पर आधुनिक तकनीकों का उपयोग बढ़ाया गया है, जिससे कचरे के ढेर को कम करने की दिशा में काम हो रहा है। साथ ही जिले में अलग-अलग स्थानों पर कचरा प्रबंधन व निस्तारण के लिए प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं।
इन पहलों के चलते हरित क्षेत्र में बढ़ोतरी, जल संचयन क्षमता में सुधार और प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं। पौधारोपण, जल संरक्षण और कचरा प्रबंधन के संयुक्त प्रयासों से फरीदाबाद धीरे-धीरे “ग्रीन सिटी” की ओर बढ़ रहा है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। विश्व पृथ्वी दिवस के अवसर पर फरीदाबाद अब केवल औद्योगिक शहर नहीं, बल्कि पर्यावरण सुधार की दिशा में बढ़ते कदमों के लिए भी पहचाना जा रहा है। बीते एक वर्ष में जिला प्रशासन और जनभागीदारी के सहयोग से अरावली की पहाड़ियों, जल स्रोतों और शहरी पर्यावरण को बेहतर बनाने के लिए कई स्तरों पर काम किया गया है। इन प्रयासों का उद्देश्य न केवल हरियाली बढ़ाना है, बल्कि भविष्य के लिए संतुलित और टिकाऊ पर्यावरण तैयार करना भी है।
अरावली क्षेत्र में हरित आवरण बढ़ाने के लिए बड़े स्तर पर पौधारोपण अभियान चलाया गया। दुर्गम पहाड़ियों में सीड बॉल तकनीक का इस्तेमाल कर ऐसे क्षेत्रों को भी कवर किया गया, जहां सामान्य तरीके से पौधरोपण संभव नहीं था। इसके साथ ही अवैध अतिक्रमण पर नियंत्रण और निगरानी बढ़ाकर प्राकृतिक क्षेत्र को सुरक्षित रखने की कोशिश की गई है।
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जल संरक्षण को लेकर भी जिले में कई अहम पहलें सामने आई हैं। पुराने तालाबों को पुनर्जीवित करने, वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने और भूजल स्तर सुधारने के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम किया गया है। गांवों में सोक पिट निर्माण और किसानों को कम पानी में सिंचाई के लिए जागरूक करना इसी दिशा में उठाए गए कदम हैं।
प्रदूषण नियंत्रण के मोर्चे पर भी प्रयास तेज हुए हैं। सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ अभियान चलाकर बाजारों में निगरानी बढ़ाई गई है, वहीं कचरा निस्तारण को बेहतर बनाने के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। इन सभी प्रयासों का लक्ष्य शहर को स्वच्छ, हरित और संतुलित बनाना है।
चेक डैम और छोटे जलाशयों का निर्माण व 1.63 लाख पौधे लगाए गए
पिछले एक वर्ष में अरावली और शहरी क्षेत्रों में कुल 1 लाख 63 हजार 517 पौधे लगाए गए हैं। दुर्गम पहाड़ी इलाकों में हजारों सीड बॉल का छिड़काव किया गया, जिससे वर्षा के दौरान प्राकृतिक रूप से हरियाली बढ़ने की संभावना बनी है। पाली क्षेत्र सहित आसपास के इलाकों में लगभग एक करोड़ रुपये की लागत से चेक डैम और छोटे जलाशयों का निर्माण किया गया है, जो वर्षा जल को रोकने और वन्यजीवों को पानी उपलब्ध कराने में सहायक हैं।
55 गांवों में 115 सोक पिट तैयार किए जा रहे
जल संरक्षण के तहत 55 गांवों में 115 सोक पिट तैयार किए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य अतिरिक्त पानी को जमीन में पहुंचाकर भूजल स्तर को सुधारना है। मिशन अमृत सरोवर के तहत पुराने तालाबों का पुनरुद्धार कर उनकी जल संग्रहण क्षमता बढ़ाई गई है। इसके साथ ही अटल भूजल योजना के माध्यम से किसानों को टपक सिंचाई अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
कचरा प्रबंधन व निस्तारण के लिए प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं
सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें बाजारों में निरीक्षण और जागरूकता दोनों शामिल हैं। कचरा निस्तारण के लिए बंधवाड़ी वेस्ट मैनेजमेंट साइट पर आधुनिक तकनीकों का उपयोग बढ़ाया गया है, जिससे कचरे के ढेर को कम करने की दिशा में काम हो रहा है। साथ ही जिले में अलग-अलग स्थानों पर कचरा प्रबंधन व निस्तारण के लिए प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं।
इन पहलों के चलते हरित क्षेत्र में बढ़ोतरी, जल संचयन क्षमता में सुधार और प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं। पौधारोपण, जल संरक्षण और कचरा प्रबंधन के संयुक्त प्रयासों से फरीदाबाद धीरे-धीरे “ग्रीन सिटी” की ओर बढ़ रहा है।

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