पेट में 'पथरी का पहाड़': 45 मिनट की सर्जरी में डॉक्टरों ने निकाले चार हजार से ज्यादा स्टोन, कैसे चला पता?
मरीज की जान बचाने के लिए तुरंत ऑपरेशन करना बेहद जरूरी था। अस्पताल के सीनियर डायरेक्टर डॉ. बीडी पाठक के नेतृत्व में सर्जिकल टीम ने तुरंत मोर्चा संभाला। मरीज की अन्य गंभीर बीमारियों को देखते हुए यह सर्जरी बहुत जोखिम भरी थी।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
क्या आपने कभी सुना है कि किसी इंसान के शरीर के अंदर पत्थरों की पूरी की पूरी खदान मौजूद हो? हरियाणा के फरीदाबाद से एक ऐसा ही चौंकाने वाला और दुर्लभ मामला सामने आया है। यहां नीलम चौक स्थित एक निजी अस्पताल में डॉक्टरों ने एक 41 वर्षीय मरीज के गॉल ब्लैडर (पित्ताशय) से एक-दो नहीं, बल्कि 4,000 से भी अधिक पथरियां (गॉलस्टोन) निकाली हैं। शहर में इतनी भारी संख्या में पथरी निकलने के मामले उंगलियों पर गिने जा सकते हैं।
बीमारियों का घर था शरीर, जांच में उड़े होश
यह सर्जरी डॉक्टरों के लिए किसी 'मेडिकल थ्रिलर' से कम नहीं थी, क्योंकि मरीज का शरीर कई बीमारियों का घर बन चुका था। 46 बीएमआई वाले इस बेहद मोटे मरीज को ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया, टाइप-2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और 'एक्यूट किडनी इंजरी' जैसी कई गंभीर समस्याएं थीं।
पेट दर्द और अपच से तड़प रहा था मरीज
वह पिछले कई दिनों से पेट के असहनीय दर्द, लगातार उल्टियों और गंभीर अपच से तड़प रहा था। जब डॉक्टरों ने जांच की, तो तस्वीरें हैरान करने वाली थीं। मरीज के गॉल ब्लैडर में खतरनाक स्तर की सूजन थी और वह गाढ़े फ्लूइड (बाइलरी स्लज) व हजारों छोटे-छोटे (माइक्रोस्कोपिक) पत्थरों से खचाखच भरा हुआ था।
महज 45 मिनट में हुआ 'महा-ऑपरेशन'
मरीज की जान बचाने के लिए तुरंत ऑपरेशन करना बेहद जरूरी था। अस्पताल के सीनियर डायरेक्टर डॉ. बीडी पाठक के नेतृत्व में सर्जिकल टीम ने तुरंत मोर्चा संभाला। मरीज की अन्य गंभीर बीमारियों को देखते हुए यह सर्जरी बहुत जोखिम भरी थी। ऐसे में डॉक्टरों ने 'मिनिमली इनवेसिव लैप्रोस्कोपिक तकनीक' का सहारा लिया और बिना कोई बड़ा चीरा लगाए महज 45 मिनट के भीतर इस जटिल ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दे दिया। इस चमत्कारिक सर्जरी में नेफ्रोलॉजी और इंटरनल मेडिसिन टीम ने भी अपना अहम सहयोग दिया।
तेजी से हो रहा है सुधार
डॉ. पाठक ने बताया कि आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से एनेस्थीसिया का समय कम रखा जा सका, जो मरीज के लिए वरदान साबित हुआ। राहत की बात यह है कि इस सफल सर्जरी के कुछ दिन बाद ही मरीज को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। परिवार वाले भी बेहद खुश हैं क्योंकि भयंकर दर्द झेलने वाला उनका मरीज अब तेजी से रिकवर कर रहा है और बिना किसी सहारे के आम इंसान की तरह फिर से चलने-फिरने लगा है।