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Faridabad News: बीके अस्पताल की आपातकालीन सेवाएं बदहाल, मरीजों को हाथों में पकड़नी पड़ रहीं ग्लूकोज- ब्लड की बोतलें
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ये कैसा इलाज: जब मरीज़ों को ही संभालनी पड़ें स्वास्थ्य सेवाएं। बीके नागरिक अस्पताल की हकीकत सामन
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। जिला नागरिक अस्पताल के आपातकालीन विभाग की व्यवस्थाओं पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों को बुनियादी सुविधाओं के लिए भी जूझना पड़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि कई मरीजों को समय पर बेड नहीं मिल पा रहा, जबकि कुछ मरीजों और उनके परिजनों को खुद ही चढ़ रही ग्लूकोज और ब्लड की बोतलों को संभालना पड़ रहा है।
आपातकालीन विभाग में सोमवार को पर्वतीय कॉलोनी निवासी साधना को ब्लड चढ़ाया जा रहा था, लेकिन ब्लड की बोतल तीमारदार के हाथ में ही थी। तीमारदार स्वयं ही बोतल को स्टैंड पर लगाने का प्रयास करते नजर आए। वहीं, एक अन्य महिला मरीज को ग्लूकोज की बोतल लगाकर उसके हाथ में ही पकड़ा दिया गया। मरीज खुद ही बेड के पास लगे स्टैंड पर बोतल लगाने का प्रयास करती रही। ऐसे में मरीजों और परिजनों ने सवाल उठाया कि यदि मरीज की हालत गंभीर हो तो ऐसी स्थिति में उसकी निगरानी कौन करेगा।
इतना ही नहीं, डबुआ निवासी जितेंद्र को आपातकालीन विभाग में काफी देर तक स्ट्रेचर पर ही लेटे रहना पड़ा। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में बेड खाली नहीं होने के कारण मरीज को लंबे समय तक स्ट्रेचर पर ही रखा गया। इससे मरीज को असुविधा के साथ-साथ संक्रमण का खतरा भी बना रहता है।
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मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि अस्पताल में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन इसके अनुरूप सुविधाओं का विस्तार नहीं हो पा रहा है। कई बार स्टाफ की कमी और बेड की उपलब्धता न होने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
आपातकालीन विभाग में मरीजों की संख्या अधिक होने के कारण कई बार व्यवस्थाएं प्रभावित हो जाती हैं। अस्पताल में मरीजों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने का लगातार प्रयास किया जा रहा है। मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाते हैं।-डॉ. विकास गोयल, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी
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फरीदाबाद। जिला नागरिक अस्पताल के आपातकालीन विभाग की व्यवस्थाओं पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों को बुनियादी सुविधाओं के लिए भी जूझना पड़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि कई मरीजों को समय पर बेड नहीं मिल पा रहा, जबकि कुछ मरीजों और उनके परिजनों को खुद ही चढ़ रही ग्लूकोज और ब्लड की बोतलों को संभालना पड़ रहा है।
आपातकालीन विभाग में सोमवार को पर्वतीय कॉलोनी निवासी साधना को ब्लड चढ़ाया जा रहा था, लेकिन ब्लड की बोतल तीमारदार के हाथ में ही थी। तीमारदार स्वयं ही बोतल को स्टैंड पर लगाने का प्रयास करते नजर आए। वहीं, एक अन्य महिला मरीज को ग्लूकोज की बोतल लगाकर उसके हाथ में ही पकड़ा दिया गया। मरीज खुद ही बेड के पास लगे स्टैंड पर बोतल लगाने का प्रयास करती रही। ऐसे में मरीजों और परिजनों ने सवाल उठाया कि यदि मरीज की हालत गंभीर हो तो ऐसी स्थिति में उसकी निगरानी कौन करेगा।
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इतना ही नहीं, डबुआ निवासी जितेंद्र को आपातकालीन विभाग में काफी देर तक स्ट्रेचर पर ही लेटे रहना पड़ा। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में बेड खाली नहीं होने के कारण मरीज को लंबे समय तक स्ट्रेचर पर ही रखा गया। इससे मरीज को असुविधा के साथ-साथ संक्रमण का खतरा भी बना रहता है।
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मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि अस्पताल में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन इसके अनुरूप सुविधाओं का विस्तार नहीं हो पा रहा है। कई बार स्टाफ की कमी और बेड की उपलब्धता न होने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
आपातकालीन विभाग में मरीजों की संख्या अधिक होने के कारण कई बार व्यवस्थाएं प्रभावित हो जाती हैं। अस्पताल में मरीजों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने का लगातार प्रयास किया जा रहा है। मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाते हैं।-डॉ. विकास गोयल, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी