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Faridabad News: ठेले पर शव ले जाने के मामले में अस्पताल को क्लीन चिट
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प्रक्रिया की पूरी समझ न होने के कारण एंबुलेंस का प्रयोग नहीं कर पाए थे प्रयोग
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। बादशाह खान (बीके) सिविल अस्पताल में एक महिला के शव को ठेले पर ले जाने के मामले में हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने अस्पताल प्रशासन को लापरवाही के आरोपों से मुक्त कर दिया। आयोग के समक्ष पेश की गई विस्तृत जांच रिपोर्ट के आधार पर यह स्पष्ट हुआ कि अस्पताल स्टाफ की ओर से कोई लापरवाही या मानवाधिकारों का उल्लंघन नहीं हुआ था।
आयोग द्वारा गठित तीन सदस्यीय स्वतंत्र जांच समिति की रिपोर्ट के अनुसार मृतका अनुराधा को 28 जनवरी 2026 को दोपहर करीब 2:35 बजे मृत घोषित किया गया था। जांच में सामने आया कि अस्पताल के नर्सिंग स्टाफ ने परिजनों को रेड क्रॉस सोसाइटी द्वारा प्रदान किए जाने वाला शव वाहन सुविधा के बारे में स्पष्ट रूप से सूचित किया था। शिकायतकर्ता (महिला के पति) ने भी अपने बयान में स्वीकार किया कि उन्हें जानकारी दी गई थी, लेकिन प्रक्रिया (जैसे कंट्रोल रूम से संपर्क करना) की पूरी समझ न होने के कारण वे सुविधा का लाभ नहीं ले सके और शव को निजी स्तर पर ले गए। कंट्रोल रूम के रिकॉर्ड के अनुसार, उस दिन परिजनों की ओर से वाहन के लिए कोई कॉल भी प्राप्त नहीं हुई थी।
आयोग का प्रदेशव्यापी सख्त रुख और नए निर्देश
यद्यपि फरीदाबाद अस्पताल को इस मामले में राहत मिली है, लेकिन न्यायमूर्ति ललित बत्रा की अध्यक्षता वाले आयोग ने इसे गरिमा के अधिकार से जुड़ा गंभीर विषय मानते हुए पूरे हरियाणा के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया कि मृत व्यक्ति का सम्मान बनाए रखना राज्य की जिम्मेदारी है और इसके लिए एंबुलेंस के बजाय शव वैन का उपयोग अनिवार्य होना चाहिए। प्रत्येक जिले में कम से कम एक कार्यात्मक हियरस वैन उपलब्ध हो और वह किसी एनजीओ या रेड क्रॉस के माध्यम से संचालित की जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि ये वाहन अस्पताल परिसर में ही तैनात रहें। गरीब और अनपढ़ लोगों की मदद के लिए अस्पताल स्टाफ को संवेदनशील बनाया जाए ताकि वे सरकारी सुविधाओं का लाभ उठा सकें। प्रदेश के सभी सिविल सर्जनों से उनके जिले में शव वाहनों की उपलब्धता और उनकी स्थिति पर एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट मांगी गई है। आयोग ने स्वास्थ्य विभाग को यह भी सुझाव दिया है कि गर्भवती महिलाओं की मुफ्त एंबुलेंस सेवा की तर्ज पर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए शवों के मुफ्त परिवहन हेतु एक व्यापक राज्य-स्तरीय नीति बनाई जाए। इस मामले की अगली सुनवाई 13 अगस्त को निर्धारित की गई है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। बादशाह खान (बीके) सिविल अस्पताल में एक महिला के शव को ठेले पर ले जाने के मामले में हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने अस्पताल प्रशासन को लापरवाही के आरोपों से मुक्त कर दिया। आयोग के समक्ष पेश की गई विस्तृत जांच रिपोर्ट के आधार पर यह स्पष्ट हुआ कि अस्पताल स्टाफ की ओर से कोई लापरवाही या मानवाधिकारों का उल्लंघन नहीं हुआ था।
आयोग द्वारा गठित तीन सदस्यीय स्वतंत्र जांच समिति की रिपोर्ट के अनुसार मृतका अनुराधा को 28 जनवरी 2026 को दोपहर करीब 2:35 बजे मृत घोषित किया गया था। जांच में सामने आया कि अस्पताल के नर्सिंग स्टाफ ने परिजनों को रेड क्रॉस सोसाइटी द्वारा प्रदान किए जाने वाला शव वाहन सुविधा के बारे में स्पष्ट रूप से सूचित किया था। शिकायतकर्ता (महिला के पति) ने भी अपने बयान में स्वीकार किया कि उन्हें जानकारी दी गई थी, लेकिन प्रक्रिया (जैसे कंट्रोल रूम से संपर्क करना) की पूरी समझ न होने के कारण वे सुविधा का लाभ नहीं ले सके और शव को निजी स्तर पर ले गए। कंट्रोल रूम के रिकॉर्ड के अनुसार, उस दिन परिजनों की ओर से वाहन के लिए कोई कॉल भी प्राप्त नहीं हुई थी।
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आयोग का प्रदेशव्यापी सख्त रुख और नए निर्देश
यद्यपि फरीदाबाद अस्पताल को इस मामले में राहत मिली है, लेकिन न्यायमूर्ति ललित बत्रा की अध्यक्षता वाले आयोग ने इसे गरिमा के अधिकार से जुड़ा गंभीर विषय मानते हुए पूरे हरियाणा के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया कि मृत व्यक्ति का सम्मान बनाए रखना राज्य की जिम्मेदारी है और इसके लिए एंबुलेंस के बजाय शव वैन का उपयोग अनिवार्य होना चाहिए। प्रत्येक जिले में कम से कम एक कार्यात्मक हियरस वैन उपलब्ध हो और वह किसी एनजीओ या रेड क्रॉस के माध्यम से संचालित की जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि ये वाहन अस्पताल परिसर में ही तैनात रहें। गरीब और अनपढ़ लोगों की मदद के लिए अस्पताल स्टाफ को संवेदनशील बनाया जाए ताकि वे सरकारी सुविधाओं का लाभ उठा सकें। प्रदेश के सभी सिविल सर्जनों से उनके जिले में शव वाहनों की उपलब्धता और उनकी स्थिति पर एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट मांगी गई है। आयोग ने स्वास्थ्य विभाग को यह भी सुझाव दिया है कि गर्भवती महिलाओं की मुफ्त एंबुलेंस सेवा की तर्ज पर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए शवों के मुफ्त परिवहन हेतु एक व्यापक राज्य-स्तरीय नीति बनाई जाए। इस मामले की अगली सुनवाई 13 अगस्त को निर्धारित की गई है।