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Faridabad News: प्राकृतिक खेती के लाभों की जानकारी दी
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गांव खेड़ी कलां में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। गांव खेड़ी कलां में शनिवार को चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) फरीदाबाद की ओर से प्राकृतिक खेती पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें किसानों को रासायनिक खेती के दुष्प्रभाव और प्राकृतिक खेती के लाभों की जानकारी दी गई। साथ ही प्राकृतिक खेती से जुड़ी विभिन्न तकनीकों का प्रशिक्षण भी दिया गया।
कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ समन्वयक डॉ. अशोक कुमार देशवाल ने किसानों को केंद्र की विभिन्न योजनाओं की जानकारी देते हुए अधिक से अधिक प्राकृतिक खेती अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि रसायनों के बढ़ते प्रयोग से मिट्टी की उर्वरता, पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में प्राकृतिक खेती गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित खाद्यान्न उपलब्ध कराने का बेहतर विकल्प बन सकती है।
वरिष्ठ जिला विस्तार विशेषज्ञ (गृह विज्ञान) डॉ. वर्षा रानी ने खट्टी लस्सी, दशपर्णी अर्क और लाभकारी जीवाणुओं के उपयोग की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि महिलाएं अपने घरों की गृह वाटिका में प्राकृतिक खेती अपनाकर परिवार को रसायन मुक्त सब्जियां उपलब्ध करा सकती हैं। प्रशिक्षण में गांव खेड़ी कलां के 50 से अधिक किसानों और महिलाओं ने भाग लिया।
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अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। गांव खेड़ी कलां में शनिवार को चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) फरीदाबाद की ओर से प्राकृतिक खेती पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें किसानों को रासायनिक खेती के दुष्प्रभाव और प्राकृतिक खेती के लाभों की जानकारी दी गई। साथ ही प्राकृतिक खेती से जुड़ी विभिन्न तकनीकों का प्रशिक्षण भी दिया गया।
कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ समन्वयक डॉ. अशोक कुमार देशवाल ने किसानों को केंद्र की विभिन्न योजनाओं की जानकारी देते हुए अधिक से अधिक प्राकृतिक खेती अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि रसायनों के बढ़ते प्रयोग से मिट्टी की उर्वरता, पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में प्राकृतिक खेती गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित खाद्यान्न उपलब्ध कराने का बेहतर विकल्प बन सकती है।
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वरिष्ठ जिला विस्तार विशेषज्ञ (गृह विज्ञान) डॉ. वर्षा रानी ने खट्टी लस्सी, दशपर्णी अर्क और लाभकारी जीवाणुओं के उपयोग की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि महिलाएं अपने घरों की गृह वाटिका में प्राकृतिक खेती अपनाकर परिवार को रसायन मुक्त सब्जियां उपलब्ध करा सकती हैं। प्रशिक्षण में गांव खेड़ी कलां के 50 से अधिक किसानों और महिलाओं ने भाग लिया।
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