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Faridabad News: सड़कों पर 10 हजार लावारिस मवेशी, गोशाला का काम अधूरा
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निगम स्थायी समाधान के बजाय पकड़े गए मवेशियों को नूंह भेजने की तैयारी कर रहा है
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। सुप्रीम कोर्ट ने लावारिस मवेशियों को राष्ट्रीय समस्या मानते हुए राज्यों और नगर निकायों को जवाबदेह ठहराया है। कोर्ट ने कहा है कि पशु प्राकृतिक स्पीड ब्रेकर नहीं हो सकते हैं। फरीदाबाद शहर की सड़कों पर करीब 10 हजार लावारिस मवेशी घूम रहे हैं। भूपानी की गोशाला अब तक तैयार नहीं हो सकी है। ऐसे में निगम स्थायी समाधान के बजाय पकड़े गए मवेशियों को नूंह भेजने की तैयारी कर रहा है। इस बीच सड़क हादसों का खतरा लगातार बना हुआ है।
सुप्रीम कोर्ट ने लावारिस पशुओं से होने वाले हादसों को राष्ट्रीय समस्या बताते हुए पीड़ितों के लिए मुआवजे की व्यवस्था, पशुओं की टैगिंग, मालिकों की जवाबदेही तय करने की बात कही है। साथ ही नगर निकायों में नोडल अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश भी दिए हैं। हालांकि जिले में स्थिति अभी भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। नगर निगम के अनुसार, शहर से लावारिस पशुओं को पकड़ने के लिए सिर्फ दो कैटल कैचर वाहन है। वहीं, निगम की 18 सदस्यीय टीम भी अभियान चला रही है। अगले दो महीनों में दो हजार पशु पकड़ने का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती उन्हें रखने के लिए पर्याप्त स्थान की है। निगम अधिकारियों के मुताबिक, स्थानीय गोशालाओं में जगह सीमित होने के कारण बड़ी संख्या में पशुओं को नूंह भेजने की योजना बनाई जा रही है।
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पशुपालकों के खिलाफ होगी एफआईआर दर्ज
नगर निगम अब पशुओं को सड़कों पर छोड़ने वाले पशुपालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी भी कर रहा है। पहले पहली बार पशु पकड़े जाने पर 5,100 रुपये और दूसरी बार 11 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाता था, लेकिन अब कानूनी कार्रवाई की भी तैयारी है। निगम का दावा है कि इससे पशुपालकों की लापरवाही पर अंकुश लगेगा।
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